राजधानी दिल्ली में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सियासत और आम जनता की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. इस बीच ओखला विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इस पूरी प्रक्रिया पर बहस को और तेज कर दिया है. ओखला के एक मुस्लिम परिवार को SIR के तहत नोटिस मिलने के बाद 'दिल्ली तक' (Dilli Tak) की टीम ने जमीनी हकीकत जानने के लिए परिवार से खास बातचीत की. कैमरे के सामने इस परिवार ने अपनी परेशानियों और मन की बात खुलकर साझा की है.
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क्या है पूरा मामला?
दिल्ली में चल रहे SIR अभियान के तहत कई इलाकों में वोटर लिस्ट से नाम कटने और लोगों को नोटिस मिलने की खबरें आ रही हैं. ओखला जैसे घनी आबादी वाले और मुस्लिम बहुल इलाकों में इसे लेकर लोगों में विशेष चिंता देखी जा रही है. हाल ही में जब ओखला के एक स्थानीय मुस्लिम परिवार को प्रशासनिक नोटिस मिला, तो उनके माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं.
परिवार ने कैमरे पर क्या कहा?
'दिल्ली तक' के कैमरे पर बात करते हुए परिवार के सदस्यों ने बताया कि अचानक इस तरह के नोटिस मिलने से वे बेहद हैरान और परेशान हैं. उनका कहना है कि वे सालों से यहां रह रहे हैं और उनके पास पहचान के सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद इस तरह की प्रक्रिया से उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. परिवार ने अपील की है कि प्रशासन इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बरते ताकि किसी भी आम नागरिक या वैध मतदाता का नाम गलती से सूची से बाहर न हो.
चुनाव आयोग और प्रशासन की सफाई
दूसरी, तरफ चुनाव आयोग (Election Commission) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने पहले ही स्पष्ट किया है कि SIR नोटिस मिलने का मतलब यह कतई नहीं है कि किसी का नाम वोटर लिस्ट से डिलीट कर दिया गया है. यह केवल एक सत्यापन (Verification) प्रक्रिया है, जिसमें मतदाताओं को अपने सही दस्तावेज और जानकारियां जमा करने का अवसर दिया जाता है ताकि अंतिम सूची बिल्कुल त्रुटिहीन तैयार हो सके.
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