Delhi Voter List Revision: दिल्ली के वोटर्स ध्यान दें! 30 जून से शुरू हो रही SIR प्रक्रिया, CEO अशोक कुमार ने बताया पूरा प्लान

Delhi Voter List Revision: दिल्ली में वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा अभियान शुरू करने का ऐलान किया है. जानिए 30 जून से शुरू होने वाली SIR प्रक्रिया क्या है, कैसे होगा घर-घर वेरिफिकेशन, कौन से दस्तावेज होंगे जरूरी, किन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटेंगे और कब जारी होगी दिल्ली की नई फाइनल वोटर लिस्ट.

Delhi SIR Process
Delhi SIR Process

संजय शर्मा

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दिल्ली में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अशोक कुमार ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की है. निर्वाचन आयोग के इस बड़े फैसले के तहत दिल्ली में आगामी 30 जून से वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण का काम बड़े स्तर पर शुरू होने जा रहा है. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर लोगों की गणना करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी योग्य मतदाता छूटने न पाए. डिजिटल होते दौर में निर्वाचन आयोग का यह एक बेहद अहम कदम माना जा रहा है.

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क्या है इन्यूमरेशन फॉर्म और कैसे काम करेगी प्रक्रिया

30 जून से शुरू हो रही इस मुहिम के तहत BLO हर घर जाकर मतदाताओं को इन्यूमरेशन यानी गणना फॉर्म वितरित करेंगे. खास बात यह है कि यह फॉर्म पूरी तरह से 'प्री-फिल्ड' होगा, जिसमें वर्तमान मतदाता सूची के अनुसार आपकी सभी जानकारियां पहले से मौजूद होंगी. मतदाताओं को इस तरह के दो फॉर्म मिलेंगे, जिसमें से एक फॉर्म भरकर बीएलओ को वापस सौंपना होगा और दूसरा फॉर्म वे अपने पास रिकॉर्ड के तौर पर रख सकेंगे. 

बीएलओ दोनों ही फॉर्म पर अपने काउंटर साइन करेंगे, जो इस बात का पक्का सबूत होगा कि आपका फॉर्म जमा हो चुका है. फॉर्म भरने में यदि किसी मतदाता को कोई समस्या आती है, तो फॉर्म के सबसे ऊपर बीएलओ का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होगा, जिससे उनसे सीधे संपर्क कर मदद ली जा सकती है. इसके अलावा राजनीतिक दलों के 'बूथ लेवल असिस्टेंस' भी फील्ड में मौजूद रहेंगे, जो लोगों की सहायता करेंगे.

2002 की वोटर लिस्ट में नाम न होने पर क्या करें

जिन लोगों के नाम साल 2002 की मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं, उनके लिए निर्वाचन आयोग ने इन्यूमरेशन फॉर्म के पीछे स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की हैं. ऐसे मतदाताओं को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें फॉर्म के पीछे दिए गए निर्देशों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने होंगे. ध्यान देने वाली बात यह है कि ये दस्तावेज शुरुआत में इन्यूमरेशन फॉर्म के साथ जमा नहीं करने हैं, बल्कि जब विभाग की तरफ से कोई नोटिस या स्क्रूटनी की प्रक्रिया होगी, तब इन्हें ईआरओ के समक्ष प्रस्तुत करना होगा. इसके लिए कुल 12 तरह के वैध दस्तावेजों की सूची फॉर्म पर दी गई है, जिसमें जन्मतिथि से जुड़े प्रमाण भी शामिल हैं.

इन 5 श्रेणियों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगातार ऑडिट चलता रहेगा. इस दौरान 'ASDF' यानी पांच श्रेणियों के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे. इनमें 'एब्सेंट' (अनुपस्थित), 'शिफ्टेड' (दूसरी जगह स्थानांतरित), 'डेथ' (मृतक), 'डुप्लीकेट' (दोहरी प्रविष्टि वाले) और 'फॉरेन' (विदेशी नागरिक) शामिल हैं. ये लोग मतदाता सूची के लिए पात्र नहीं माने जाते हैं, इसलिए इनके नाम हटा दिए जाएंगे. वहीं, जो अन्य योग्य मतदाता हैं, उन्हें अपना नाम सूची में बनाए रखने या जुड़वाने के लिए उचित दस्तावेज ईआरओ को दिखाने होंगे.

घर बंद मिलने पर क्या होगा और ऑनलाइन विकल्प

इस अभियान के दौरान बीएलओ कुल दो महीने की अवधि में मतदाताओं के घर कम से कम तीन बार चक्कर लगाएंगे. यदि पहली बार में ही मतदाता घर पर मिल जाता है और फॉर्म की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो काम वहीं समाप्त हो जाएगा. लेकिन यदि कोई मतदाता कामकाजी है और पहली या दूसरी बार में घर बंद मिलता है, तो बीएलओ तीसरी बार आने पर इन्यूमरेशन फॉर्म को घर के दरवाजे के नीचे से अंदर ड्रॉप कर देंगे. इसके अलावा यदि किसी कारणवश फॉर्म गुम हो जाता है या खराब हो जाता है, तो मतदाताओं के पास ऑनलाइन विकल्प भी मौजूद है, जहां से फॉर्म डाउनलोड करके ऑनलाइन ही जमा किया जा सकता है.

जानिए कब आएगी ड्राफ्ट और फाइनल वोटर लिस्ट

इन्यूमरेशन फॉर्म जमा होने के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा प्राप्त डेटा के आधार पर ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल का प्रकाशन किया जाएगा. दिल्ली के लिए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करने की तारीख 5 अगस्त तय की गई है. इसके बाद मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया जाएगा. इन सभी आपत्तियों के निपटारे के बाद दिल्ली में 7 अक्टूबर 2026 को फाइनल मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी यह प्रक्रिया जून से अक्टूबर के बीच पूरी कर ली जाएगी ताकि आगामी चुनावों का रास्ता साफ हो सके.

क्या यह देश का आखिरी SIR है?

निर्वाचन आयोग ने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि अब देश में चुनावी प्रक्रियाएं और डेटा पूरी तरह से डिजिटल हो चुके हैं. डिजिटलाइजेशन के इस दौर में अब हर जानकारी ऑनलाइन और रियल-टाइम अपडेट हो रही है. यही वजह है कि निर्वाचन आयोग की तरफ से यह संभावना जताई जा रही है कि शायद यह देश का आखिरी SIR हो. इसके बाद भविष्य में इस तरह से घर-घर जाकर बड़े पैमाने पर पुनरीक्षण अभियान चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

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