Delhi SIR: SIR में फंस गए बड़े-बड़े दिग्गज! क्यों दिया 33 लाख लोगों को SIR नोटिस? क्या है कहानी?

राजू झा

• 09:11 AM • 22 Sep 2026

दिल्ली में चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही 'विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया के तहत नाम मैच न होने और गड़बड़ियों के कारण करीब 33 लाख लोगों को नोटिस भेजे गए हैं.

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देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही 'विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. दिल्ली में करीब 33 लाख से अधिक मतदाताओं को डेटा में गड़बड़ी और नाम मैच न होने के चलते SIR नोटिस भेजे गए हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि इन नोटिसों की जद में देश के बड़े-बड़े दिग्गज और वीआईपी भी आ गए हैं.

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वीआईपी हस्तियों के नाम भी 'Unmapped' श्रेणी में

News Tak की रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान कई प्रमुख राजनेताओं, अधिकारियों और जजों के नाम या तो 'Unmapped' या 'Mismatch' की श्रेणी में रख दिए गए हैं.

मुख्य वीआईपी नाम:

  • एस. जयशंकर: विदेश मंत्री और उनकी पत्नी का नाम अनमैप्ड श्रेणी में.
  • लालकृष्ण आडवाणी: भाजपा के वरिष्ठ नेता.
  • जगदीप धनखड़: उपराष्ट्रपति और उनकी पत्नी सुदेश धनखड़.
  • अरविंद केजरीवाल: पूर्व सीएम और उनका पूरा परिवार.
  • रेखा गुप्ता: दिल्ली की सीएम.
  • अन्य प्रमुख नाम: चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, सेबी चेयरमैन कांता पांडे, कपिल सिब्बल, मनीष सिसोदिया, अभिषेक मनु सिंघवी, बांसुरी स्वराज, वीरेंद्र सचदेवा और पूर्व जस्टिस मदन बी. लोकुर .

मनीष सिसोदिया के मामले में नोटिस भेजा गया है, लेकिन उसमें त्रुटि की कोई स्पष्ट वजह तक दर्ज नहीं की गई है.

क्या है 'Unmapped' का मतलब?

जब वोटर लिस्ट और SIR फॉर्म के डेटा में नाम, पिता का नाम, स्पेलिंग या अन्य जानकारियों में अंतर आता है तो सिस्टम उसे 'Unmapped' या 'Mismatch' चिन्हित कर देता है. चुनाव आयोग का कहना है कि 2002 की वोटर लिस्ट और सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों/लॉजिकल एरर की वजह से ऑटो-जनरेटेड नोटिस जारी हुए हैं.

आंकड़ों का खेल: लाखों नाम काटे गए

दिल्ली में SIR प्रक्रिया से पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 1 करोड़ 45 लाख थी. प्रक्रिया के बाद यह आंकड़ा घटकर करीब 97 लाख रह गया है, यानी लगभग 47.5 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. इसके अलावा 35 लाख से अधिक लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, जिनमें से 60,000 से अधिक नोटिसों में कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं है.

23 विपक्षी दलों ने CJI को लिखी चिट्ठी

इस गड़बड़ी और नोटिस प्रक्रिया को लेकर 23 विपक्षी दलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखकर इसे अपारदर्शी और गैर-लोकतांत्रिक करार दिया है.

नाम कटने से कैसे बचाएं? महत्वपूर्ण तिथियां

  • स्पेशल कैंप: 20 सितंबर और 27 सितंबर को सभी पोलिंग बूथों पर विशेष कैंप लगाए गए हैं.
  • दस्तावेज जमा करने की अंतिम तिथि: प्रभावित मतदाता 30 सितंबर 2026 तक अपने ERO (Electoral Registration Officer) या BLO के पास जरूरी कागजात जमा करा सकते हैं.
  • जांच प्रक्रिया: 29 अक्टूबर तक सभी आपत्तियों की जांच पूरी की जाएगी.
  • अंतिम वोटर लिस्ट: 4 नवंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी. यदि तब तक सुधार नहीं हुआ, तो नाम कट जाएगा और आपको फॉर्म-6 भरकर नया आवेदन करना होगा.

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