'हमने तो बेटे को देश को दे दिया...' जंतर-मंतर पर वायरल इरफान के माता-पिता ने बयां की संघर्ष की दास्तान, देखिए खास बातचीत

दिनेश यादव

28 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 28 2026 5:25 PM)

Irfan Parents Interview: जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान चर्चा में आए इरफान के माता-पिता ने पहली बार अपने संघर्ष, बेटे के बचपन, परिवार की आर्थिक तंगी और उसके देश के लिए समर्पण पर खुलकर बात की. जानिए क्यों इरफान ने शादी से इनकार किया, कैसे परिवार ने मुश्किल हालात में उनका साथ दिया और क्यों उनकी मां ने कहा, 'हमने तो बेटे को देश को दे दिया.'

Irfan Parents Interview
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सोशल मीडिया पर छाए इरफान की पहचान भले ही देश और समाज से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से बोलने वाले युवा के रूप में बन चुकी हो, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे उनके परिवार का एक लंबा और कड़ा संघर्ष रहा है. इरफान की मां ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को पूरी तरह से देश के लिए छोड़ दिया है. उन्होंने बताया कि जब भी परिवार इरफान को किसी काम से रोकता था, वह वहीं चले जाते थे. पिछले 12-15 सालों से इरफान लगातार विभिन्न आंदोलनों से जुड़े हुए हैं. जब उनसे शादी-ब्याह की बात की जाती है, तो इरफान का साफ कहना होता है कि पहले देश का इंसाफ जरूरी है.

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शादी का रिश्ता ठुकराया, टूट गई सगाई

इरफान के पारिवारिक जीवन को लेकर उनकी मां ने एक बड़ा ख़ुलासा किया. उन्होंने बताया कि इरफान का रिश्ता तय किया गया था, लेकिन इरफान ने सगाई तोड़ दी. परिवार का कहना है कि जब भी घर बसाने या शादी की बात छिड़ती है, तो इरफान यह कहकर मना कर देते हैं कि जब तक देश में भुखमरी और अन्याय है, वे शादी नहीं करेंगे. मां-बाप ने जब देखा कि इरफान अपनी बात के पक्के और मनमौजी हैं, तो उन्होंने भी उन्हें अपने फैसले लेने के लिए आजाद कर दिया.

पिता की खामोश आंखें और भावुक आंसू

बातचीत के दौरान इरफान के 77 वर्षीय पिता काफी शांत नजर आए. इरफान ने बताया कि उनके पिता थोड़ा कम सुनते हैं और जीवनभर उन्होंने रेहड़ी-पटरी लगाकर परिवार को पाला है. इंटरव्यू के दौरान जब पिता से बेटे की सफलता और प्रसिद्धि पर सवाल किया गया, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए. भले ही पिता ने मुंह से कम शब्द कहे, लेकिन उनकी आंखों के आंसुओं ने बेटे के लिए उनके त्याग और गर्व की पूरी कहानी बयां कर दी.

बचपन में पढ़ाई से भागना और भटकना

इरफान के बचपन के दिनों का जिक्र करते हुए उनकी मां ने बताया कि इरफान का मन पढ़ाई-लिखाई में कभी नहीं लगा. एक बार बर्फ बेचने वाले किसी परिचित ने उनका स्कूल में दाखिला भी कराया, लेकिन इरफान वहां से भी भाग आते थे. बचपन में जहां भी पूजा-पाठ या कोई सामाजिक आयोजन होता था, इरफान वहीं चले जाते थे. उनके पिता उन्हें ढूंढ-ढूंढकर घर लाते थे और संभालते थे.

गहने बेचे, पर बच्चों को कभी 'चोर' नहीं बनने दिया

इरफान की मां ने अपने कठिन दिनों को याद करते हुए बताया कि परिवार ने बेहद तंगहाली में दिन काटे हैं. गुजर-बसर के लिए गन्ना छीलकर बेचा, फल बेचे, बर्फ बेची और झुग्गियां बनाकर रहे. जब उनकी झुग्गी टूट गई, तब भी परिवार ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने अपने गहने तक बेच दिए ताकि बच्चों को खाना खिला सकें, लेकिन बच्चों को कभी गलत रास्ते पर या चोरी की तरफ नहीं जाने दिया. माँ का कहना है कि आज उनके बच्चे सही राह पर हैं, इसलिए उन्हें अपने पुराने संघर्षों का कोई अफसोस नहीं है.

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