दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) के 37 दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर एक चेहरा लगातार छाया हुआ है, इरफान. कभी स्कूल का मुंह न देखने वाले और पढ़े-लिखे न होने के बावजूद इरफान जब देश, संविधान, मजदूरों के हक और राजनीति पर धाराप्रवाह बोलते हैं, तो हर कोई दंग रह जाता है. न्यूज तक की टीम जब दिल्ली की जेजे कॉलोनी स्थित उनके निवास पर पहुंची, तो इरफान की जीवन कहानी और उनके संघर्ष का एक अलग ही पहलू सामने आया.
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नारियल निकालकर पेट पालने से लेकर जेजे कॉलोनी के 12 गज के कमरे तक
इरफान का बचपन बेहद तंगहाली में गुजरा. वह बताते हैं कि उनका लालन-पालन झुग्गी-झोपड़ियों में हुआ. बचपन में गरीबी का आलम यह था कि वह यमुना नदी से लोगों द्वारा बहाए गए नारियल निकालकर इकट्ठा करते थे और उन्हें अठन्नी-अठन्नी में बेचकर अपना पेट पालते थे. झुग्गियां टूटने के बाद वह बेघर हुए और फिर दिल्ली की जेजे कॉलोनी में 12 गज के एक छोटे से कच्चे मकान में रहने लगे. आज भी वह इसी 12 गज के कमरे में बर्फ बेचने का काम करते हैं और अपनी आजीविका चलाते हैं. इतनी गरीबी के बावजूद इरफान अपनी हालत पर किसी से तरस या आर्थिक मदद नहीं चाहते. उनका कहना है कि उनकी अकेले की जिंदगी बदलने से देश नहीं बदलेगा, बल्कि देश के करोड़ों मजदूरों और शोषितों का जीवन सुधारने से असली बदलाव आएगा.
2011 के अन्ना आंदोलन से बदला नजरिया, यूट्यूब से सीखा ज्ञान
इरफान ने बताया कि उनका सामाजिक सफर साल 2011 के अन्ना आंदोलन से शुरू हुआ था. उस समय वह दिल्ली एयरपोर्ट पर मजदूरी करते थे और ड्यूटी खत्म करके रामलीला मैदान पहुंच जाते थे. वहां उन्हें पढ़े-लिखे छात्रों और विचारकों की बातें सुनकर देश और समाज को समझने की प्रेरणा मिली. भले ही वह लिखना-पढ़ना नहीं जानते, लेकिन वह यूट्यूब पर साहित्य, महापुरुषों के डॉक्यूमेंट्रिज और निष्पक्ष पत्रकारिता सुनकर सब कुछ याद रखते हैं. वह संविधान की प्रस्तावना से लेकर राजा राममोहन राय, स्वामी रामकृष्ण परमहंस, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले जैसे महान समाज सुधारकों के विचारों को बखूबी समझते और बोलते हैं.
राहुल गांधी के साथ 'भारत जोड़ो यात्रा' में दिल्ली से कश्मीर तक चले थे इरफान
इरफान ने बातचीत के दौरान बताया कि जब देश में नफरत और सांप्रदायिकता का माहौल बन रहा था, तब राहुल गांधी की 'मोहब्बत की दुकान' के संदेश ने उन्हें बहुत प्रभावित किया. इरफान राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' में शामिल हुए और दिल्ली से लेकर कश्मीर तक पैदल चले थे. उन्होंने कहा कि उन्होंने यात्रा में देखा कि राहुल गांधी रात में 2 बजे भी मजदूरों से मिलने पहुंच जाते थे, जिससे साफ होता है कि उनके मन में गरीबों के लिए हमदर्दी है.
'राहुल गांधी सत्ता में आए तो मांगूंगा न्यूनतम मजदूरी का वादा'
राहुल गांधी को लेकर इरफान ने बेबाकी से अपनी राय रखते हुए कहा कि अगर उन्हें राहुल गांधी से दोबारा मिलने का मौका मिलता है, तो वह उनसे एक वादा मांगेंगे. इरफान ने कहा- 'मैं राहुल जी से कहूंगा कि आप देश के बड़े नेता हैं, आज नहीं तो कल सत्ता में आएंगे. आप मुझसे वादा कीजिए कि इस देश के मजदूरों और श्रमिकों को उनका वाजिब हक देंगे. पूरे देश में एक समान न्यूनतम मजदूरी लागू करेंगे और ऐसा कानून बनाएंगे जो कागजों के बजाय धरातल पर कड़ाई से लागू हो.'
'जिंदगी भर निष्पक्ष विपक्ष की भूमिका निभाऊंगा'
इरफान ने स्पष्ट किया कि कई आंदोलनों का हिस्सा रहने (जैसे अन्ना आंदोलन, CAA-NRC प्रदर्शन, किसान आंदोलन और पहलवानों का धरना) के बावजूद वह किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे. उनका कहना है कि वह जीवन भर जनता, मजदूरों, किसानों और युवाओं के हक में बिना किसी डर के सरकार से सवाल पूछते रहेंगे और निष्पक्ष विपक्ष की भूमिका निभाएंगे.
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