Abhijeet Dipke FIR Latur: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके के 'स्कूल ठीक करो' अभियान को लेकर महाराष्ट्र के लातूर में बड़ा बवाल खड़ा हो गया है. 15 अगस्त से शुरू हुए इस अभियान के तहत अभिजीत दिपके लातूर के औसा इलाके में स्थित जिला परिषद स्कूल पहुंचे थे और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर यह चौंकाने वाला दावा किया था कि स्कूल में असली बच्चों की जगह दूसरे स्कूल के स्टूडेंट्स को लाकर बैठाया गया है. लेकिन अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है.
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जिस स्कूल में गड़बड़ी उजागर करने का दावा अभिजीत दिपके कर रहे थे, उसी स्कूल के प्रशासन और महिला शिक्षकों की शिकायत पर अभिजीत दिपके, अजिंक्य शिंदे और उनके साथियों के खिलाफ औसा पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है.
क्या है पूरा मामला?
नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन के बाद CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने देश के सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के मकसद से 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की थी. इसी कड़ी में 20 अगस्त को दोपहर करीब 1:00 बजे वह लातूर जिले के औसा के पास जावली में स्थित जिला परिषद स्कूल पहुंचे.
वहां जाकर उन्होंने कक्षाओं के अंदर बच्चों से बातचीत की और पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग की. इसके बाद सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए दिपके ने दावा किया कि स्कूल में अव्यवस्था और कम हाजिरी छिपाने के लिए बाहर से दूसरे स्कूल के बच्चों को लाकर बैठाया गया है. इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीति के नाम पर लोग सड़कों पर उतर सकते हैं, तो सरकारी स्कूलों की बदहाली पर आवाज क्यों नहीं उठाई जाती.
शिक्षकों के आरोप और पुलिस कार्रवाई
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, स्कूल प्रशासन और शिक्षकों में भारी आक्रोश फैल गया. महिला शिक्षक की शिकायत के आधार पर औसा पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.
शिक्षकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुख्य बिंदु:
- बिना अनुमति प्रवेश: अभिजीत दिपके और उनके साथी बिना किसी प्रशासनिक या विभागीय अनुमति के स्कूल परिसर और कक्षाओं में जबरन घुसे.
- कामकाज में बाधा: कक्षाओं में जाकर बच्चों से सवाल-जवाब करने और करीब 2 घंटे तक रुकने के कारण शैक्षणिक कामकाज प्रभावित हुआ.
- झूठी अफवाह फैलाना: शिक्षकों का कहना है कि कक्षाओं में बैठे बच्चे उसी स्कूल के पंजीकृत स्टूडेंट्स थे, लेकिन दिपके ने उन्हें दूसरे स्कूल का बताकर झूठी अफवाह फैलाई और संस्था को बदनाम किया.
- धमकी और अपमान: बिना इजाजत रिकॉर्डिंग पर जब शिक्षकों ने आपत्ति जताई, तो उन्हें सस्पेंड कराने की धमकियां दी गईं और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया.
BNS की धाराओं में केस दर्ज
शिक्षकों की इस शिकायत के आधार पर औसा पुलिस थाने में अभिजीत दिपके, अजिंक्य शिंदे और उनके 4-5 अन्य साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. इनमें बिना अनुमति सरकारी परिसर में घुसना, झूठे आरोप लगाकर मानहानि करना और शिक्षकों को धमकी देना शामिल है.
गौरतलब है कि इससे पहले मुंबई और जयपुर समेत अन्य शहरों में भी CJP कार्यकर्ताओं के बिना इजाजत स्कूलों में जाने पर विवाद की खबरें आई थीं, जिसके बाद लातूर में दर्ज हुई यह एफआईआर इस मामले को और गरमा रही है.
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