दिल्ली नगर निगम (MCD) में भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. सीबीआई ने शहादरा नॉर्थ जोन के डिप्टी कमिश्नर (DC) अभिषेक मिश्रा और अकाउंट ऑफिसर (AO) दिव्यांशु गौतम को ₹4 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई एमसीडी के ही दो लाइसेंस इंस्पेक्टरों की शिकायत पर की गई है. जानिए कौन है ये अधिकारी और क्या है पूरा मामला.
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कौन हैं अभिषेक मिश्रा?
गिरफ्तार किए गए डिप्टी कमिश्नर अभिषेक मिश्रा भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर रह चुके हैं और वर्तमान में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर एमसीडी में तैनात थे. इतने बड़े पद और सैन्य पृष्ठभूमि के बावजूद वे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिर गए हैं.
क्या है पूरा मामला?
मामला एमसीडी के दो लाइसेंस इंस्पेक्टरों की बहाली से जुड़ा है. इन इंस्पेक्टरों ने कथित तौर पर भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल होने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था. उनकी बहाली की फाइल 14 अक्टूबर से ही डीसी अभिषेक मिश्रा ने अटका रखी थी. फाइल को आगे बढ़ाने के बदले अकाउंट ऑफिसर दिव्यांशु के जरिए प्रति इंस्पेक्टर ₹2 लाख (कुल ₹4 लाख) की मांग की गई थी.
पूर्व मेयर ने निभाई अहम भूमिका
इस भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने में पूर्वी दिल्ली के पूर्व मेयर श्याम सुंदर अग्रवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जब एक इंस्पेक्टर के पास रिश्वत देने के लिए पूरे पैसे नहीं थे, तो पूर्व मेयर ने अपनी जेब से ₹1 लाख दिए ताकि इन भ्रष्ट अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़वाया जा सके.
ऐसे बिछाया गया CBI का जाल
योजना के मुताबिक, सीबीआई ने जाल बिछाया और अकाउंट ऑफिसर को रिश्वत की रकम लेने के लिए राजघाट बुलाया. जैसे ही एओ ने पैसे लिए, सीबीआई ने उसे दबोच लिया. इसके बाद एओ के जरिए डीसी को फोन करवाया गया. डीसी ने उसे पैसे लेकर अपने घर बुलाया. जैसे ही डीसी ने रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, सीबीआई की टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. सीबीआई अब इस मामले में आगे की पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस भ्रष्टाचार के खेल में और कौन-कौन से बड़े अधिकारी या सिंडिकेट शामिल हैं.
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