महावीर ने CBSE से 12वीं की परीक्षा पास की है. उन्होंने ग्रेजुएशन कोर्स के लिए विदेशी यूनिवर्सिटीज़ में अप्लाई किया है, लेकिन उन्हें CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से किए गए मूल्यांकन (evaluation) पर गुस्सा है. उनके ठीक बगल में उनकी छोटी बहन सान्वी खड़ी है. वह अपने आस-पास हो रही चीजों को समझने की कोशिश कर रही है. यह 6 जून की सुबह है और जगह है जंतर-मंतर - दिल्ली की जानी-मानी और मुख्य विरोध प्रदर्शन वाली जगह. भीड़ अभी भी आ रही है, तापमान बढ़ रहा है और उमस भी बढ़ रही है.
ADVERTISEMENT
'आज ये भाई के साथ हुआ कल मेरे साथ...'- सान्वी ने जताई चिंता
यह पहली बार है जब महावीर और सान्वी किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं. महावीर ने कहा, "OSM सिस्टम की कोई जरूरत नहीं थी. उन्होंने यह सिस्टम उन टीचर्स पर थोपा जो दूर-दराज़ के इलाकों से काम कर रहे हैं. उन्हें लंबे समय तक बड़े पैमाने पर ट्रायल करने चाहिए थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसका असर किस पर पड़ा? हम स्टूडेंट्स पर." सिस्टम के प्रति अपनी निराशा ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा, "मेरी आंसर शीट में मेरी कॉपी के कुछ पन्ने नहीं थे. अगर मेरे मार्क्स 3-4 भी कम हो जाते हैं, तो मेरी सीट जा सकती है. समस्या यह है कि मैं री-इवैल्यूएशन (दोबारा मूल्यांकन) के लिए अप्लाई भी नहीं कर सकता और न ही अपनी यूनिवर्सिटी एप्लीकेशन में अपनी मार्कशीट बदल सकता हूं."
महावीर के पिता हर्ष बोले- बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं देख सकते
आठवीं क्लास की स्टूडेंट सान्वी ने कहा कि वह अपने भाई और उसके दोस्तों के साथ जो हुआ, उस पर नज़र रख रही हैं. जंतर-मंतर पर मौजूद सबसे कम उम्र के प्रदर्शनकारियों में से एक सान्वी ने कहा, "अगर उनके साथ ऐसा हो सकता है, तो अगली बारी मेरी है. मुझे भी 10वीं और 12वीं की परीक्षा देनी है. हमें विरोध करना चाहिए और जवाबदेही की मांग करनी चाहिए." खास बात यह है कि उनके माता-पिता ने CJP के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के फैसले का समर्थन किया. माहवीर के पिता हर्ष ने कहा कि सरकार और मंत्रियों से जवाबदेही मांगना ज़रूरी है, "हम उन्हें अपने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए नहीं देख सकते."
प्रदर्शन में 50 साल के शंकर ने दिया गजब जवाब
विरोध प्रदर्शन के शुरुआती घंटों में, जंतर-मंतर पर "कंटेंट क्रिएटर्स और यूट्यूबर्स" की भारी भीड़ थी. हर कोई अपने एजेंडे पर काम कर रहा था और कंटेंट की तलाश में था. इन यूट्यूबर्स की वजह से बनी इस उलझन के बीच, ओम शंकर अपने आस-पास हो रही चीज़ों को समझने की कोशिश कर रहे थे. जब मैंने उनसे पूछा कि आप यहां क्यों आए हैं, तो 50 की उम्र के शंकर ने कहा, "मेरी बेटी के लिए."
ओम शंकर ने सवाल किया, "मेरी बेटी NEET-UG में शामिल हुई थी. पेपर लीक हो गया. दोबारा परीक्षा 21 जून को होगी, लेकिन क्या गारंटी है कि इसमें फिर से गड़बड़ी नहीं होगी?" "वह कहती हैं - क्या होगा अगर अमीर और ताकतवर लोग फिर से सिस्टम का गलत इस्तेमाल करके अपने फायदे के लिए काम करें." उन्होंने अपना फोन निकालकर एक और एंट्रेंस टेस्ट का एडमिट कार्ड दिखाया, जो उनकी बेटी ने अब रिसर्च के क्षेत्र में जाने के लिए चुना है.
प्रदर्शनकारियों की धर्मेंद्र प्रधान के स्तीफे की मांग की
CJP के पहले विरोध प्रदर्शन के दौरान, अभिजीत दीपके और उनके समर्थक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते रहे, लेकिन शायद, विरोध प्रदर्शन के आयोजकों को भी यह एहसास नहीं हुआ कि CBSE-OSM की गड़बड़ी का मुद्दा माता-पिता और प्रभावित छात्रों के लिए कितना बड़ा था. या फिर, अपने पहले विरोध प्रदर्शन के दौरान तालमेल की कमी के कारण वे इन सभी बातों को ठीक से समझ नहीं पाए.
जब दीपके जंतर-मंतर पहुंचे, तो वहां न तो कोई मंच था और न ही कोई अनाउंसमेंट सिस्टम. वह ज़मीन पर बैठ गए और एक कमज़ोर साउंड सिस्टम के ज़रिए समर्थकों को संबोधित करने की कोशिश की. वहीं, कंटेंट क्रिएटर्स जंतर-मंतर के हर कोने में छोटे-बड़े समूहों में इस पल का फ़ायदा उठाते रहे. दोपहर तक, एक कामचलाऊ मंच तैयार कर लिया गया. CJP के समर्थक बैरिकेड्स पर चढ़कर लगातार बैकड्रॉप को थामे रहे. दीपके के समर्थकों ने उन्हें अपने कंधों पर उठाया और मंच पर पहुंचाया. मंच की ओर बढ़ते हुए, उन्होंने एक हाथ में बाबा साहेब अंबेडकर की किताब लेकर भीड़ का अभिवादन किया. जल्द ही वक्ताओं, जिनमें क्लाइमेट एक्टिविस्ट और एजुकेशन एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी शामिल थे, के भाषणों का सिलसिला शुरू हो गया.
खास बात यह है कि आज दिल्ली पुलिस का रवैया अलग था. वे प्रदर्शनकारियों के साथ विनम्रता से पेश आए. GenZ प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर की ओर बढ़ने या व्यवस्था बनाए रखने की अपील अंग्रेज़ी में की गई. जंतर-मंतर पर मंच, स्पीकर, फ्लेक्स और बैनर के सामान को लाने-ले जाने में भी कोई रुकावट नहीं डाली गई. बहुत कम तैयारियों के बावजूद, 6 जून के विरोध प्रदर्शन के दौरान दीपके और उनकी टीम का काम आसानी से हो गया.
इस बीच, दीपके ने चेतावनी दी है कि अगर पेपर लीक और CBSE-OSM की गड़बड़ियों को लेकर शिक्षा मंत्री प्रधान इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा.
कांग्रेस नाराज, केजरीवाल ने CJP का समर्थन किया
कांग्रेस ने 'कॉकरोच' विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया आंदोलन से दूरी बनाए रखी. कांग्रेस की सीनियर मीडिया कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजिस्ट सुप्रिया श्रीनेत ने दीपके और CJP पर परोक्ष रूप से निशाना साधा. उन्होंने सवाल उठाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ खास प्रदर्शनकारियों को सुविधाएं कैसे दी गईं, जबकि पेपर लीक को लेकर NSUI के आंदोलन में उन्हें बाधाओं का सामना करना पड़ा था. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उनके नेता राहुल गांधी हमेशा GenZ के साथ खड़े रहे हैं.
वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने CJP आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है. केजरीवाल ने कहा, "कॉकरोच आंदोलन देश के युवाओं के भारी गुस्से और निराशा का इज़हार है. उन्हें देश-विरोधी कहने के बजाय, मोदी सरकार को उनके मुद्दों का समाधान करना चाहिए. AAP उनकी मांगों का समर्थन करती है. प्रधानमंत्री को शिक्षा मंत्री को तुरंत बर्खास्त करना चाहिए." उन्होंने CJP विरोध प्रदर्शन के लिए शिवसेना-UBT के समर्थन का भी समर्थन किया.
NEET सुधारों पर NTA ने मानी चूक, RTI में अधूरी जानकारी देने के बाद जारी किया नया स्पष्टीकरण
ADVERTISEMENT


