PM Narendra Modi CCS Meeting: ईरान को लेकर इजरायल और अमेरिका के साथ चल रहे सैन्य टकराव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है. भारत भी हालात पर लगातार निगरानी रखे हुए है. रविवार रात नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पश्चिम एशिया की ताजा स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में प्रभावित इलाके में आने-जाने वाले भारतीय यात्रियों और तय एग्जाम में बैठने वाले स्टूडेंट्स को होने वाली मुश्किलों के साथ-साथ इलाके की सिक्योरिटी और इकोनॉमिक और कमर्शियल एक्टिविटी पर इसके बड़े असर का भी रिव्यू किया गया.
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सीसीएस की बैठक में ईरान हमले पर चर्चा
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में 28 फरवरी को ईरान में हुए हवाई हमलों और उसके बाद खाड़ी देशों में बढ़ी हिंसा की घटनाओं पर विस्तृत ब्रीफिंग दी गई. बैठक के दौरान समिति ने खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई. इसके साथ ही, क्षेत्र से गुजरने वाले भारतीय यात्रियों और वहां रहकर परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को होने वाली दिक्कतों पर भी विस्तार से चर्चा की गई. सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को प्रभावित भारतीयों की हर संभव मदद करने के निर्देश दिए हैं.
इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन पर बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात कर क्षेत्र के मौजूदा हालातों पर चर्चा की. इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने हालिया घटनाक्रमों पर भारत की चिंताओं से उन्हें अवगत कराया. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समय नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. भारत ने एक बार फिर शांति बहाल करने की बात दोहराई.
भारतीय समुदाय की देखभाल के लिए किया शुक्रिया
पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बातचीत की. प्रधानमंत्री ने यूएई पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की और इन हमलों में हुई जानमाल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त किया. पीएम मोदी ने कहा, "भारत इस मुश्किल समय में यूएई के साथ खड़ा है." उन्होंने यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की देखभाल करने के लिए राष्ट्रपति का शुक्रिया अदा किया और कहा कि हम तनाव कम करने, इलाके में शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करते हैं.
कूटनीति और संवाद पर भारत का जोर
कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है. बैठक में यह तय किया गया कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के पक्ष में है. सरकार अब इस बात पर कड़ी नजर रख रही है कि युद्ध जैसी इन स्थितियों का भारत की आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों पर क्या असर पड़ सकता है.
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