आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा अपने जनहित के मुद्दों को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने संसद में 'पैटर्निटी लीव' (पितृत्व अवकाश) का मुद्दा उठाकर सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. राघव चड्ढा ने मांग की है कि भारत में पैटर्निटी लीव को एक कानूनी अधिकार बनाया जाना चाहिए ताकि बच्चों के पालन-पोषण में पिता की भागीदारी को भी मान्यता मिल सके. सांसद ने अपने बात के पीछे तर्क भी दिए है बताया कि यह क्यों जरूरी है. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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'जिम्मेदारी सिर्फ मां की क्यों?'
राघव चड्ढा ने सदन में कहा कि जब बच्चे का जन्म होता है, तो बधाई माता-पिता दोनों को मिलती है, लेकिन उसकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी केवल मां के हिस्से डाल दी जाती है. उन्होंने तर्क दिया कि हमारा वर्तमान सिस्टम केवल 'मैटर्निटी लीव' (मातृत्व अवकाश) को मान्यता देता है, जो एक सामाजिक विफलता है और हमारे कानून इसे और मजबूत कर रहे हैं.
पिता के लिए 'नेसेसिटी' है साथ रहना
सांसद ने भावनात्मक पक्ष रखते हुए कहा कि एक महिला गर्भावस्था और प्रसव के कठिन दौर से गुजरती है. ऐसे समय में उसे अपने पति के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. पति की मौजूदगी कोई 'लग्जरी' नहीं बल्कि 'नेसेसिटी' (जरूरत) है. एक पिता को अपने नवजात बच्चे की देखभाल और नौकरी बचाने के बीच किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
प्राइवेट सेक्टर की अनदेखी पर उठाए सवाल
राघव चड्ढा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ही 15 दिनों की पैटर्निटी लीव मिलती है. जबकि भारत की 90% वर्कफोर्स प्राइवेट सेक्टर में है, जहां यह अधिकार है ही नहीं. उन्होंने स्वीडन, आइसलैंड और जापान जैसे देशों का उदाहरण दिया, जहां 90 दिनों से लेकर 52 हफ्तों तक की गारंटीड पैटर्निटी लीव मिलती है.
कानून में दिखे 'साझा जिम्मेदारी'
उन्होंने सरकार से मांग की कि बच्चों का पालन-पोषण एक साझा जिम्मेदारी (Shared Responsibility) है और इसकी झलक हमारे कानूनों में भी दिखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि केयर-गिविंग को सिर्फ मां की जिम्मेदारी मानकर जेंडर डिवाइड को और गहरा नहीं किया जाना चाहिए. अब देखना होगा कि राघव चड्ढा की इस मांग पर केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है और क्या प्राइवेट सेक्टर के लाखों पिताओं को जल्द ही कोई खुशखबरी मिलेगी.
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नितिन गडकरी संग राघव चड्ढा की 'मस्ती' भरी बातचीत, क्या AAP छोड़ BJP में शामिल होने की है तैयारी?
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