राजस्थान के एक ग्रामीण इलाके में स्थित स्कूल भवन को गिराए जाने को लेकर ग्रामीणों और CJP प्रतिनिधियों के बीच विवाद गहरा गया है. स्थानीय ग्रामीणों ने CJP टीम पर स्कूल को जबरन गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाया है, जिसके बाद गांव के लोगों ने एकजुट होकर इसका कड़ा विरोध किया.
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इस पूरे विवाद पर एक स्थानीय ग्रामीण महिला ने 'Dilli Tak' से बातचीत में बड़ा खुलासा किया है. महिला ने बताया कि यह स्कूल गांव के बच्चों की शिक्षा का मुख्य केंद्र है. अगर इसे तोड़ दिया गया तो मोहल्ले के करीब 20 से 25 छोटे बच्चों के पास पढ़ने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी. वर्तमान में भी स्कूल की उचित मरम्मत न होने के कारण बच्चों को मजबूरन दूसरों के घरों, चारे-बाड़े और अस्थाई जगहों पर जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है.
CJP टीम के दावों पर सवाल
महिला ने बताया कि CJP के लोग यह दावा कर रहे थे कि वे स्कूल के सुधार और व्यवस्था को बेहतर करने आए हैं. हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि वे सुधार के नाम पर केवल भवन को ध्वस्त करने और विरोध पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए पहले ही बजट पास हो चुका है.
गाड़ी रोकने और झड़प की घटना
CJP प्रतिनिधियों के साथ हुई कहासुनी और मारपीट की खबरों पर सफाई देते हुए महिला ने स्पष्ट किया कि गांव वालों ने पहले ही उन्हें यहां आने से मना किया था. इसके बावजूद CJP की टीम सुबह-सुबह फिर से पहुंच गई और कार्रवाई की कोशिश करने लगी. इसके बाद गांव वालों ने एकजुट होकर आपत्ति जताई, जिससे दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और खींचतान की स्थिति बन गई.
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक बच्चों की पढ़ाई का कोई ठोस विकल्प और स्कूल भवन के जीर्णोद्धार की स्पष्ट गारंटी नहीं मिलती, वे किसी भी कीमत पर स्कूल को टूटने नहीं देंगे.
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