लद्दाख को छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल करने और पर्यावरण की रक्षा के अलावा नीट पेपर लीक मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के आंदोलन में अब एक बड़ा मोड़ आ गया है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष ने खुद जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की और उन्हें एक विशेष पत्र सौंपा. वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए SCBA अध्यक्ष ने देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया और केंद्र सरकार को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी.
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सोनम वांगचुक देश की धरोहर हैं - एडवोकेट विकास सिंह
जंतर-मंतर पर मीडिया से मुखातिब होते हुए SCBA अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने सोनम वांगचुक के संघर्ष की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा, "मैं पिछले कई वर्षों से देख रहा हूं कि सोनम वांगचुक देश के लिए क्या कर रहे हैं. उन्होंने राष्ट्र की महान सेवा की है और वे इस देश की एक अनमोल धरोहर हैं. वे ईमानदारी और निष्ठा की प्रतिमूर्ति हैं. इस अनशन के माध्यम से उन्होंने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है. एक राजनीतिक व्यक्ति होने के नाते मैंने भी उनसे अनशन खत्म करने की भावुक अपील की है, क्योंकि मेरा मानना है कि अगर उन्हें कुछ भी अनहोनी होती है, तो यह देश का बड़ा नुकसान होगा. वे जीवित रहकर इस देश के लिए कहीं अधिक बड़ा योगदान दे सकते हैं."
राजनीतिक नैतिकता के गिरते स्तर पर बरसे अधिवक्ता सिंह
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने आज के नेताओं में नैतिक जिम्मेदारी के अभाव पर गहरी निराशा जताई. उन्होंने सीधे तौर पर देश में चल रहे नीट (NEET) परीक्षा विवाद को उठाते हुए कहा, "आज की राजनीतिक में लगातार गिरावट आ रही है, जहां नेताओं की नाक के नीचे सब कुछ हो जाता है, लेकिन कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता. NEET परीक्षा में क्या हुआ? उन्होंने उन लाखों छात्रों के भविष्य और जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है जो महीनों तक दिन-रात मेहनत करते हैं और अंत में उन्हें पता चलता है कि पेपर लीक हो गया था. यह शिक्षा मंत्री की एक बहुत बड़ी नाकामी है, और इसके बावजूद उनका इस्तीफा न देना बेहद शर्मनाक है."
उन्होंने अतीत की राजनीति की याद दिलाते हुए कहा कि एक दौर वह था जब एक रेल दुर्घटना होने पर भी देश के रेल मंत्री तुरंत अपना नैतिक इस्तीफा सौंप देते थ,। लेकिन आज का दौर ऐसा आ गया है कि चाहे 10 हादसे हो जाएं, किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगती और इस्तीफे का नामोनिशान नहीं होता.
सोनम वांगचुक की सेहत पर चिंता, पूरे देश से साथ आने की अपील
वांगचुक की सेहत पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति इस समय ठीक नहीं है. उन्होंने कहा, "वे काफी अस्वस्थ हैं, लेकिन उन्होंने मेरे पत्र को पढ़ा और सहमति में अपना सिर हिलाया कि वे इस पर विचार करेंगे. वे कब और किन परिस्थितियों में अपना अनशन समाप्त करेंगे, यह मैं नहीं जानता, लेकिन मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूं कि वे जल्द से जल्द कोई सकारात्मक निर्णय लें ताकि उनकी सेहत और अधिक न बिगड़े." उन्होंने साफ किया कि पूरा देश इस समय व्यवस्था में सुधार की वांगचुक की इस लड़ाई के साथ खड़ा है.
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