Sonam Wangchuk Video: दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को अस्पताल ले जाया गया है. दावा है कि प्रशासन ने यह कदम उनकी लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए उठाया है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि ये कार्रवाई माननीय हाई कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की मेडिकल सलाह के आधार पर की गई है. इस कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद समर्थकों और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी देखने को मिली. इसी बीच अस्पताल जाने से पहले का सोनम वांगचुक का वीडियो सामने आया है, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है.
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शरीर का 20 फीसदी हिस्सा खत्म
वीडियो में सोनम वांगचुक कह रहे हैं कि वे अभी भी जिंदा हैं. अनशन की वजह से उनके शरीर का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा चला गया है. फैट्स के बाद अब उनके मसल्स खत्म हो चुके हैं और इसके बाद अब शरीर के अंगों यानी ऑर्गंस पर असर पड़ेगा. इसके बाद आखिर में दिमाग पर असर होगा, लेकिन अभी वह नौबत नहीं आई है. आज उनकी भूख हड़ताल का 20वां दिन खत्म हो रहा है.
जब प्याज की कीमत से गिर गई सरकार
वीडियो में सोनम वांगचुक ने देश की जनता से एक बड़ा सवाल पूछा है. उन्होंने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि क्या इस आंदोलन से कोई जवाबदेही तय होगी? क्या शिक्षा मंत्री इस्तीफा देंगे? इस पर वांगचुक ने जनता से ही सवाल किया कि भारत के लोगों को अपने बच्चों की जान और शिक्षा ज्यादा प्यारी है या फिर प्याज. उन्होंने याद दिलाया कि देश के इतिहास में जनता के आंदोलन की ताकत से तीन बार सरकारें गिरी हैं. साल 1980 में केंद्र सरकार गिरी, जबकि 1998 में दिल्ली और राजस्थान की सरकारें गिर गई थीं. वह पूरा आंदोलन सिर्फ प्याज की कीमतों को लेकर था.
20 जुलाई को संसद मार्च का एलान
सोनम वांगचुक ने शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि इस साल 20 से ज्यादा छात्रों ने आत्महत्याएं की हैं. अगर अब भी कोई बदलाव नहीं हुआ, तो अगले सालों में यह संख्या दोगुनी-चौगुनी हो जाएगी और फिर किसी के भी घर की बारी आ सकती है. उन्होंने कहा कि जब प्याज के लिए सरकारें गिर सकती हैं, तो क्या बच्चों के जीवन के लिए एक इस्तीफा भी नहीं हो सकता? वांगचुक ने भावुक होते हुए कहा कि वे तो एक अकेले भूखे इंसान हैं, असली ताकत देश की जनता है. उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को अपने साथ संसद की तरफ मार्च करने की बड़ी अपील की है.
पुलिस ने जारी किया आधिकारिक बयान
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले पर अपना आधिकारिक बयान जारी किया है. पुलिस के मुताबिक, सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार खराब हो रही थी, इसलिए उन्हें जरूरी इलाज के लिए अस्पताल शिफ्ट करना बेहद जरूरी था. पुलिस ने बताया कि जब वे हाई कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे थे, तो वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की. इस वजह से मौके पर हल्की झड़प जैसी स्थिति बन गई थी. हालांकि, पुलिस ने पूरा संयम बरतते हुए इस प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा किया.
प्रदर्शनकारियों से जगह खाली करने की अपील
धरना स्थल से जो वीडियो सामने आया है, उसमें देखा जा सकता है कि पुलिस सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से बाहर ले जा रही है. इस दौरान वांगचुक हाथ हिलाते हुए नजर आ रहे हैं. उनके समर्थक इस कार्रवाई का लगातार विरोध कर रहे थे, लेकिन पुलिस उन्हें शांति से अस्पताल ले गई. पुलिस ने अपने बयान के आखिर में जंतर-मंतर पर मौजूद सभी प्रदर्शनकारियों से एक विशेष अपील की है. पुलिस ने कहा है कि किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए सभी लोग शांतिपूर्ण तरीके से जल्द से जल्द इस जगह को खाली कर दें.
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