'सफदरजंग पर भरोसा नहीं...' सोनम वांगचुक की पत्नी पहुंचीं हाई कोर्ट, कहा- कहीं और हो इलाज

संजय शर्मा

• 10:59 AM • 19 Jul 2026

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सफदरजंग अस्पताल से उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है. उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वांगचुक को परिवार, वकीलों और निजी डॉक्टरों से मिलने नहीं दिया जा रहा.

Gitanjali Angmo
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Sonam Wangchuk News: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर चल रहे विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है. उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सफदरजंग अस्पताल से उन्हें किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने या तुरंत रिहा करने की मांग की है. उनका कहना है कि अस्पताल पर अब उनका भरोसा नहीं रहा और वांगचुक को इलाज के नाम पर गैरकानूनी तरीके से रोका गया है.

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हाई कोर्ट में क्या मांग की गई?

याचिका में कहा गया है कि सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन के 21वें दिन थे, जब उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद से उन्हें परिवार, वकीलों और पिछले कई दिनों से उनकी सेहत पर नजर रखने वाले निजी डॉक्टरों से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है.

याचिका में अदालत से मांग की गई है कि इस कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन माना जाए. साथ ही वांगचुक को अस्पताल से रिहा करने या परिवार की पसंद के किसी अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश दिया जाए.

I have lost faith in Safdarjung Government Hospital.
The hospital told us @Wangchuk66’s potassium had dropped to 2.9, describing it as alarming and life-threatening. Yet, in its public health bulletin, it conveniently omitted the actual number, referring only to "decreasing…

— Gitanjali J Angmo (@GitanjaliAngmo) July 19, 2026

पत्नी ने मेडिकल रिपोर्ट पर उठाए सवाल

गीतांजलि आंग्मो ने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए हैं. उनके मुताबिक अस्पताल ने परिवार को बताया कि सोनम वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर 2.9 तक गिर गया है और इसे गंभीर स्थिति बताया गया. लेकिन सार्वजनिक हेल्थ बुलेटिन में यह आंकड़ा साझा नहीं किया गया.

उन्होंने दावा किया कि काफी आग्रह के बाद परिवार को स्वतंत्र लैब में ब्लड सैंपल की जांच कराने की अनुमति मिली. वहां की रिपोर्ट में पोटैशियम का स्तर 3.5 बताया गया, जिसे सामान्य सीमा में माना जाता है. इसी आधार पर उन्होंने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं.

डिस्चार्ज नहीं करने का भी आरोप

गीतांजलि का आरोप है कि परिवार की लगातार मांग के बावजूद अस्पताल प्रशासन न तो वांगचुक को डिस्चार्ज कर रहा है और न ही उन्हें किसी निजी अस्पताल में ले जाने की अनुमति दे रहा है.

उन्होंने यह भी दावा किया कि अस्पताल की मंजिल पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं और पूरे अस्पताल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण परिवार की आवाजाही भी सीमित कर दी गई है.

'यह इलाज नहीं, अवैध हिरासत'

गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि यह मामला सिर्फ इलाज का नहीं बल्कि अवैध हिरासत का है. उनका कहना है कि यदि सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और सरकार की होगी.

अब इस पूरे मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से जल्द सुनवाई की उम्मीद है. अदालत के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में रहेंगे या उन्हें किसी अन्य अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति मिलेगी.