देश भर में इस वक्त मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर हंगामा मचा हुआ है. कांग्रेस समेत विपक्ष के कई दल इसे लेकर लगातार प्रदर्शन भी कर रहे है. इसी बीच 28 सितंबर 2026 को योगेंद्र यादव और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा अगले प्रदर्शन की अनुमति (परमिशन) लेने के सिलसिले में दिल्ली के संसद मार्ग थाना पहुंचे थे. पुलिस अधिकारियों से मुलाकात करने और अनुमति न मिलने पर अपनी आपत्ति दर्ज कराने के बाद उन्होंने थाने से बाहर आकर घोषणा की कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर को दोबारा हल्लाबोल प्रदर्शन करेंगे. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
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2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी
योगेंद्र यादव और नेहा बोरा ने थाने से बाहर निकलते ही आगामी 2 अक्टूबर को सुबह 11:00 बजे जंतर-मंतर पर एक बड़े प्रोटेस्ट का ऐलान किया है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने एसएचओ के पास जाकर विधिवत इंटिमेशन यानी सूचना पत्र सबमिट किया है. उनका कहना है कि जंतर-मंतर एक डेजिग्नेटेड प्रोटेस्ट साइट है और संविधान नागरिकों को अपने अधिकारों के हनन के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का पूरा हक देता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली पुलिस इस बार लोकतांत्रिक असहमति के अधिकार को कुचलने के बजाय उनके इस प्रदर्शन को फैसिलिटेट करेगी.
एसआईआर और वोटिंग अधिकारों का मुद्दा
प्रदर्शनकारियों ने देश भर में लगभग 13 करोड़ लोगों के वोटिंग अधिकार डिलीट होने और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के तहत समाज के सबसे गरीब और अंतिम पायदान पर खड़े लोगों, महिलाओं तथा अल्पसंख्यकों के नाम बड़े पैमाने पर काटे जा रहे हैं. चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित धांधलियों के खिलाफ तमाम नागरिक किसी एक संगठन के बैनर तले नहीं, बल्कि आम जनता के हक की लड़ाई लड़ने के लिए 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन जंतर-मंतर पर एकजुट होंगे.
प्रशासनिक बहानेबाजी पर तीखा हमला
पिछली बार प्रोटेस्ट कॉल के दौरान पुलिस और प्रशासन द्वारा परमिशन न होने का बहाना बनाए जाने पर योगेंद्र यादव और नेहा बोरा ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि इस बार प्रशासन या सरकार के पास यह बहाना नहीं बचेगा कि उन्होंने पहले से लिखित सूचना नहीं दी थी, क्योंकि इस बार उन्होंने निर्धारित समय से काफी पहले ही अधिकारियों को लिखित इंटिमेशन सौंप दिया है. उन्होंने सरकार और पुलिस तंत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश में शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट करने की अनुमति भी छीन ली जाए, तो यह सीधे तौर पर नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर कुठाराघात है.
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