जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट में एक छात्र कुर्सियों को सटाकर बाएं पैर को फैलाकर बैठा था. पैर पर प्लास्टर चढ़ा था और उसपर स्केच पेन से लिखा था- 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो'. इंडिया टुडे की एसोसिएट एडिटर अनीशा माथुर उस छात्र तक पहुंची. पहले तो छात्र ने टूटे हुए पैर को मेडल बताया. फिर उसने जो आपबीती बताई वो बेहद हैरान करने वाला थी. छात्र ने बताया कि जब वो पुलिस की लाठी से बुरी तरह से घायल हो चुका था, उसकी एक पैर फ्रैक्चर हो चुका था तब उसके सहयोगी उसे एंबुलेंस में बैठाकर अस्पताल रवाना कर रहे थे. तभी पुलिस आई और उसे एंबुलेंस से निकालकर पीटा.
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छात्र लवकुश प्रजापति का पैर भले टूट गया हो पर उनका हौसला जिंदाबाद है. लवकुश जैसे कई छात्र जो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में घायल हुए थे वे अब धरना-स्थल पर लौटने लगे हैं. उनकी एक ही मांग है- 'शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो.'
हक की लड़ाई में लाठियां ही मेडल- लवकुश
इंडिया टुडे से बात करते हुए लवकुश प्रजापति ने कहते हैं- "आज जब हम अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, तो हमें इनाम के तौर पर लाठियां मिल रही हैं. ऐसे में यह लाठी हमारे लिए किसी मेडल से कम नहीं है.'' लवकुश ने प्लास्टर पर मैसेज को लेकर बताया कि जैसे मेडल मिलता है तो उसपर नाम तो लिखा ही रहता है. मुझे यही मेडल मिला है इसलिए धर्मेंद्र प्रधान का नाम लिख दिया हूं.
पीछे से छोड़े गए आंसू गैस के गोले, मंच पर बोला गया धावा
लाठीचार्ज वाले दिन का खौफनाक मंजर याद करते हुए लवकुश ने बताया कि अचानक पुलिस ने पीछे से आंसू गैस के गोले छोड़ने शुरू कर दिए. इसके तुरंत बाद ताबड़तोड़ लाठियां भांजी जाने लगीं. मैं अपने मंच पर मौजूद था, तभी पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और लाठियों से हमला कर दिया. ऐसा लगा जैसे पैर तोड़ने का ही प्रयास किया जा रहा हो. इसके बाद मेरा पूरा पैर बुरी तरह चोटिल हो गया. जब स्थिति बिगड़ी तो टीम मैनेजमेंट के लोग और मेरे साथियों ने मुझे सुरक्षित निकालकर एंबुलेंस तक पहुंचाने की कोशिश की."
3 से 4 घंटे तक भटकते रहे साथी, नहीं मिली एंबुलेंस
लवकुश का आरोप है कि घटना के बाद उन्हें तत्काल इलाज नहीं मिलने दिया गया. उन्होंने दावा किया कि मौके पर एंबुलेंस मौजूद होने के बावजूद उन्हें अस्पताल ले जाने से रोका गया. एंबुलेंस चालकों और पुलिसकर्मियों का कहना था कि घायलों को ले जाने की अनुमति नहीं है.
लवकुश के मुताबिक, "मेरे दोस्त मुझे लेकर 3 से 4 घंटे तक चारों दिशाओं में भटकते रहे. जब कहीं से मदद नहीं मिली, तब जाकर किसी तरह मुझे अस्पताल पहुंचाया गया और इलाज शुरू हो सका."
25 दिनों से डटे हैं मैदान में, मांग पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष- लवकुश
प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लवकुश पिछले 25 दिनों से यानी पहले दिन से इस आंदोलन में लगातार डटे हुए हैं. शरीर पर लगी गंभीर चोटों और पुलिस के सख्त रुख के बावजूद लवकुश और उनके साथी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. छात्रों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और जिम्मेदारी तय नहीं की जाती, तब तक उनका यह आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा.
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