कई बार हुए बीमार, फिर भी हिम्मत नहीं हारी...झुंझुनूं के जतिन चाहर कैसे बने JEE Advanced के AIR-3? जानें पूरी कहानी 

AIR 3 Jatin Chahar Success Story: JEE Advanced 2026 में राजस्थान के झुंझुनूं के जतिन कुमार चाहर ने AIR-3 हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है. तैयारी के दौरान दो बार पीलिया और एक बार टायफाइड जैसी गंभीर बीमारियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. जानिए कैसे 6 साल की मेहनत, परिवार के सहयोग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अनुशासित दिनचर्या ने जतिन को देश के टॉप-3 छात्रों में शामिल कर दिया.

Jatin Chahar Success Story
Jatin Chahar Success Story

सुशील कुमार जोशी

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राजस्थान का सीकर एक बार फिर चर्चा में है. इस बार चर्चा का विषय कोई लांछन नहीं है बल्कि गर्व का है क्योंकि झुंझुनूं के एक छोटे से गांव के रहने वाले जतिन कुमार चाहर ने देश के सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक JEE Advanced 2026 में AIR-3 यानी तीसरा स्थान प्राप्त किया है. इसी उपलब्धि के साथ ही वह राजस्थान मूल के विद्यार्थियों में सबसे ज्यादा नंबर पाने वाले छात्र बन गए है. रिजल्ट जारी होने के बाद से ही झुंझुनूं में खुशी का माहौल है और सभी इसे प्रदेश के गौरवपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं. इसी बीच AIR-3 बने जतिन चाहर ने हमारे संवाददाता से खास बातचीत की है और बताया कि कैसे वो अपनी तैयारी के दौरान बीमार हुए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आज इस मुकाम को हासिल किया. साथ ही उन्होंने सक्सेस मंत्रा भी बताया कि किस तरह पढ़ाई करके वे आज थर्ड टॉपर बने है. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.

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6 साल से कर रहे थे तैयारी

मिली जानकारी के मुताबिक जतिन कुमार चाहर झुंझुनूं जिले के छोटे से गांव गोठ के रहने वाले है. पिछले 6 साल से वह सीकर में रहकर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और आखिरकार  उन्हें इस बार सफलता मिल ही गई. जतिन को 360 में से 319 नंबर मिले जिससे उन्होंने AIR-3 हासिल किया. साथ ही यह भी पता चला है कि जतिन ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन दिखाया है. 

पढ़ाई के दौरान हुए बीमार, लेकिन हिम्मत नहीं हारी

मिली जानकारी के मुताबिक, जतिन का यहां तक पहुंचने का सफर काफी संघर्ष पूर्ण रहा है. जतिन जब इस प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे तब उन्हें दो बार पीलिया और 1 बार टायफाइड हो गया. इस दौरान उन्हे करीबन दो महीने तक अस्पताल और घर के बीच आना-जाना करना पड़ा, जिससे उनकी पढ़ाई काफी प्रभावित हुई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. जतिन ने बताया कि शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार से मिले सहयोग की वजह से वह वापस पटरी पर आ गए और शानदार  सफलता हासिल की.

जतिन के पिता दिनेश चाहर भारतीय वायुसेना में वारंट ऑफिसर है, जबकि उनकी माता मोनिका कुमारी एक सामान्य गृहिणी है. ग्रामीण परिवेश से निकलर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले जतिन की सफलता की कहानी अब हजारों स्टूडेंट के लिए प्रेरणा बन गई है.

क्या है जतिन का सक्सेस मंत्रा?

जतिन ने साफ कहा है कि उनके इस सफलता के पीछे माता-पिता, शिक्षकों और परिवार का विश्वास है, जिसकी वजह से हर मुश्किल काम में उनका आत्मविश्वास बना रहा है. उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर की जाए तो किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है. जतिन ने आगे कहा कि, मैंने अपना लक्ष्य हमेशा सामने रखा, पढ़ाई के समय मोबाइल को दूर रखता था और समय को छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटकर काम करता था ताकि फोकस बना रहा.

जतिन ने बताया कि वह लगभग 7 से 8 घंटे पढ़ाई करता था. नींद से कभी समझौता नहीं किया और करीब 7 घंटे की नींद जरूर लेता था, क्योंकि अच्छी तैयारी के लिए स्वस्थ शरीर और दिमाग जरूरी है. साथ ही क्लास के बाद सेल्फ स्टडी, नोट्स रिवीजन और प्रश्नों की प्रैक्टिस पर सबसे ज्यादा ध्यान देता था. साथ ही रोजाना पढ़े हुए विषय को दोहराने की उनकी आदत बन गई थी. जतिन भी AIR-1 शुभम और AIR-2 कबीर की तरह ही IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करना चाहते है.

जतिन के मुताबिक, जब भी उनके कम नंबर आते थे तो उनके माता-पिता हौसला बढ़ाते और बेहतर के लिए प्रेरित करते थे. अगर परिवार में कोई भी कार्यक्रम हो रहा है तो ध्यान रखा जाता कि मेरी पढ़ाई पर इसका बुरा असर ना पड़े. साथ ही शिक्षकों ने मुझे हर समय मदद और इसी वजह से आज मैं इस मुकाम को हासिल कर पाया. जतिन ने बताया कि वो मोबाइल फोन काफी कम यूज करते और साथ ही उनका कोई सोशल मीडिया अकाउंट भी नहीं है.

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