कोटा जो कि एजुकेशन हब के नाम से जाना जाता है, आज एक बार रिजल्ट के कारण चर्चा में है. जैसे ही देर रात 1 बजे JEE Advanced 2026 का रिजल्ट सामने आया, तो इस बार टॉपर और सेकेंड टॉपर दोनों ही कोटा में पढ़ाई करने वाले निकले. लेकिन इस बार की जो कहानी है वो रैंक, नंबर और कट-ऑफ से कहीं हटकर है क्योंकि यह दोस्ती और कामयाब होने की जिद की अलग ही दास्तान है. दरअसल कोटा में रहकर पढ़ाई करने वाले दो दोस्तों ने ही JEE Advanced 2026 में देश भर में टॉप-2 में रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है.
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बिहार के गया के रहने वाले शुभम कुमार ने AIR-1 यानी ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की, जबकि उन्हीं के दोस्त गुरुग्राम के कबीर छिल्लर मात्र 1 अंक से पीछे रह गए और AIR-2 बन गए. लेकिन सबसे खास बात यह है कि दोनों एक ही हॉस्टल में रहते थे, पढ़ते-लिखते थे, शाम को मूड फ्रेश करने के लिए साथ खेला भी करते थे. जेईई रिजल्ट जारी होने के बाद दोनों ही छात्रों की खूब चर्चा हो रही है और लोग उनके बारे में जानना चाह रहे है. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.
टॉप-3 में एलन इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स का कब्जा
दरअसल IIT रुड़की ने देर रात 1 बजे JEE-Advanced 2026 का रिजल्ट जारी किया तो पता चला कि टॉप-3 पर इस बार मशहूर कोचिंग सेंटर एलन इंस्टीट्यूट का रहा. शुभम कुमार AIR-1 बने और उन्हें 360 में से 330 नंबर मिले. वहीं AIR-2 कबीर छिल्लर को 329 अंक मिले, जबकि AIR-3 सीकर के जतिन चाहर को 319 नंबर मिले. अगर महिला स्टूडेंट्स की बात करें तो दिल्ली जोन की आरोही देशपांडे ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया और 280 अंक लाकर 77वीं रैंक प्राप्त की.
ऐसे किया मुकाम हासिल
JEE Advanced 2026 के परिणाम आने के बाद टॉपर के नंबर से ज्यादा उनकी दोस्ती की चर्चा हो रही है. शुभम और कबीर दोनों कोटा के एक ही हॉस्टल में रहते थे, जहां शुभम चौथी मंजिल पर तो कबीर 7वीं मंजिल पर रहता था. पढ़ाई के दौरान दोनों एक-दूसरे से मिलते-जुलते और पढ़ाई को लेकर हो रहे संदेह को दूर करते थे. साथ ही दोनों दिन भर पढ़ाई करने के बाद शाम को बैडमिंटन भी खेला करते थे ताकि माइंड फ्रेश रहे. लगातर मेहनत और अनुशासन की वजह से दोनों ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक में टॉप कर दिखाया. अब दोनों दोस्त IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग करने का सपना देख रहे है.
AIR-1 शुभम का सक्सेस मंत्रा!
गया के रहने वाले शुभम पिछले 2 साल से मां-बाप से दूर होकर कोटा में पढ़ाई कर रहे थे. शुभम के पिता शिवकुमार एक व्यवसायी हैं जबकि उनकी मां कंचन देवी एक गृहिणी है. आज बेटे के इस कामयाबी पर दोनों खुशी से फूले नहीं समा रहे है. शुभम को इससे पहले JEE-Main 2026 में 300 में से 295 अंक मिले थे और वह AIR-6 बना था. शुभम के सक्सेस मंत्रा की बात करें तो उनका कहना है कि सफलता लंबे घंटों तक पढ़ने से नहीं मिलती है, बल्कि क्वालिटी स्टडी से छिपी होती है.
शुभम ने बताया कि उसने कभी भी 16 घंटे पढ़ाई नहीं की, उसके बजाय रोज 6 घंटे फोकस होकर अपनी पढ़ाई की. उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ अपने उठने से लेकर सब-कुछ का दिनचर्या फिक्स कर रखा था. वह रोज 10:30 बजे सो जाते और फिर सुबह 6:30 बजे उठते थे. शुभम ने बताया कि रोज उठने के लिए उन्होंने कोई अलार्म नहीं लगाया बल्कि बॉडी क्लॉक सेट किया था.
इसके अलावा खाने में भारी-भरकम नाश्ते की जगह वो अंकुरित मूंग और फल खाते थे, फोकस बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया और फिल्मों से दूरी बनाना, तनाव कम करने के लिए खेलना और खुद को हमेशा पॉजिटिव रखना उनकी रणनीति रही. शुभम का कहना है कि उन्होंने खुद को AC का आदी नहीं बनाया ताकि किसी भी माहौल में परीक्षा दे सकें. साथ ही शुभम अपने आत्मविश्वास को मजबूत करने के लिए अपने कॉपी पर 'JEE Advanced Topper' लिखते थे.
दोस्त को लेकर कबील ने कही ये बातें
JEE-Main 2026 में गुरुग्राम के कबीर छिल्लर ने AIR-1 रैंक हासिल किया था, लेकिन JEE-Advanced में वो 1 नंबर से पीछे रह गए. हालांकि उनके चेहरे पर इस बात का तनिक सा भी दुख नहीं दिखाई दिया, बल्कि वह अपने दोस्त शुभम के लिए काफी खुश दिखाई दिए. कबीर ने कहा कि, शुभम ने लगातार दो साल से कड़ी मेहनत की और वह इस सफलता का हकदार है. कबीर ने साफ कहा कि अगर कोई दूसरा आगे निकलता तो दुख होता लेकिन दोस्त के टॉप करने से मेरी खुशी दोगुनी हो गई है.
गुरुग्राम के रहने वाले कबीर के पिता अमोल छिल्लर IIT खड़गपुर से पढ़े एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, जबकि उनकी मां प्रियंका एक प्राइवेट स्कूल में टीचर है. यहीं से कबीर ने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई की है. कबीर पढ़ाई के अलावा खेल-कूद में भी एक्टिव है और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं.
स्टूडेंट्स के लिए टॉपर्स का मैसेज
शुभम और कबीर दोनों का ही मानना है कि, हमें सिर्फ रैंक के दबाव में नहीं जीना चाहिए. पढ़ाई के साथ-साथ मानिसक स्वास्थ्य, अच्छी नींद और खेल भी काफी जरूरी है. कबीर कहते है कि हमें रिजल्ट की चिंता से ज्यादा सफर को एन्जॉय करना चाहिए. वहीं शुभम का कहना है कि किसी भी चीज को रटने की बजाय लॉजिक और कॉन्सेप्ट को समझना सफलता की असल कुंजी है.
गया के शुभम को जेईई में मिला 100 पर्सेंटाइल, अब बता दिया अपना सक्सेस मंत्रा
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