V D Satheesan New CM:केरल में पिछले कई दिनों से मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर चल रहा सस्पेंस अब पूरी तरह खत्म हो गया है। कांग्रेस आलाकमान ने औपचारिक रूप से ऐलान कर दिया है कि वीडी सतीशन (V.D. Satheesan) केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे. दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के बीच हुई लंबी बैठकों के बाद सतीशन के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई. इस फैसले के साथ ही केरल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है. चर्चित चेहरा के इस खास एपिसोड में आज जानिए वीडी सतीशन के सीएम बनने की पूरी कहानी.
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सस्पेंस का अंत और हाईकमान का फैसला
केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए कई दिग्गजों के नाम रेस में थे, लेकिन पार्टी ने वीडी सतीशन के अनुभव और उनकी चुनावी रणनीतियों पर भरोसा जताया है. कांग्रेस नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पष्ट किया कि सतीशन को सीएलपी (CLP) नेता नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है. इस घोषणा से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ गहन विचार-विमर्श किया था.
बुधवार शाम को राहुल गांधी ने खड़गे के साथ करीब 30 मिनट तक बैठक की, जिसमें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर अंतिम राय बनाई गई. इसके बाद गुरुवार को राहुल गांधी ने एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की थी, जिसके बाद सतीशन के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया.
केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर को पछाड़ा
मुख्यमंत्री की इस दौड़ में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जा रहा था. चर्चा थी कि उन्हें दिल्ली से वापस केरल की राजनीति में भेजा जाएगा. उनके अलावा वरिष्ठ नेता शशि थरूर, रमेश चेन्निथला और के. सुधाकरण जैसे बड़े नाम भी रेस में शामिल थे.
केरल कांग्रेस में अक्सर गुटबाजी की खबरें आती रही हैं, जहां सतीशन, सुधाकरण और वेणुगोपाल के अपने-अपने गुट सक्रिय हैं. ऐसे में हाईकमान के लिए किसी एक चेहरे पर फैसला लेना चुनौतीपूर्ण था. हालांकि, चुनाव से पहले हुए तमाम सर्वे में सतीशन जनता की पहली पसंद बनकर उभरे थे, जिसने हाईकमान के फैसले को आसान बना दिया.
विपक्ष की धार तेज करने वाले रणनीतिकार
वीडी सतीशन को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जिन्होंने पिछले 5 वर्षों में केरल में विपक्ष की भूमिका को बेहद प्रभावी बनाया. उन्होंने पिनाराई विजयन की वामपंथी सरकार के अभेद्य किले में सेंध लगाने के लिए चुपचाप जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत किया. सतीशन ने ना केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एकजुट किया, बल्कि गठबंधन के सहयोगियों (UDF) के साथ भी बेहतर तालमेल बिठाया.
विपक्षी नेता के तौर पर उन्होंने सरकार के खिलाफ संस्थागत भ्रष्टाचार और शासन की विफलताओं के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया. उनकी रणनीति का ही परिणाम था कि कांग्रेस ने पिछले कुछ समय में हुए उपचुनावों और लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया.
'सतीशनिज्म' और चुनावी भविष्यवाणियों के माहिर
केरल की राजनीति में सतीशन के काम करने के तरीके को 'सतीशनिज्म' के नाम से भी पुकारा जाता है. उन्हें एक कुशल रणनीतिकार और सटीक भविष्यवाणी करने वाला नेता माना जाता है. नीलांबुर उपचुनाव के दौरान उन्होंने दावा किया था कि यूडीएफ उम्मीदवार 15,000 वोटों से जीतेगा और परिणाम भी लगभग वैसा ही रहा.
इसके अलावा 2022 में त्रिक्काकरा, पुथुपल्ली और पलक्कड़ उपचुनावों में कांग्रेस की हैट्रिक जीत के पीछे भी सतीशन को ही मुख्य सूत्रधार माना गया. उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान पूरे आत्मविश्वास के साथ दावा किया था कि यूडीएफ 100 से ज्यादा सीटें जीतेगी और हारने की स्थिति में राजनीति छोड़ने तक की बात कही थी.
संघर्षों से भरा रहा राजनीतिक सफर
करीब 60 वर्षीय वीडी सतीशन का राजनीतिक सफर काफी प्रेरणादायक रहा है. 30 साल पहले कांग्रेस में शामिल होने वाले सतीशन को 1996 के अपने पहले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने वकालत शुरू कर दी थी.
हालांकि, 2001 में उन्होंने एर्नाकुलम के परावुर से जीत दर्ज की और तब से वे लगातार 6 बार(2006, 2011, 2015, 2021 और 2026) विधायक चुने गए. उनके खिलाफ राजनीतिक विरोधियों ने जांच एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश भी की, लेकिन विजिलेंस जांच में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले. सतीशन ने हर चुनौती का डटकर मुकाबला किया और आज अपनी मेहनत व वफादारी के दम पर केरल के सर्वोच्च पद तक पहुंचने में सफल रहे हैं.
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