पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार डायमंड हार्बर की फलता सीट को लेकर खूब बवाल हुआ. मतदान के पहले से इस सीट की जो चर्चा शुरू हुई वो आज भी जारी ही है. 29 अप्रैल को हुए मतदान में गड़बड़ी के बाद आयोग ने इस सीट पर री-पोलिंग का आदेश दिया था और अब 21 मई को यहां फिर से वोट डाले जाएंगे. इसी बीच एक बार फिर हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ और TMC उम्मीदवार जहांगीर खान हाईकोर्ट पहुंचे और झूठे आरोपों में फंसाने की बात कह सुरक्षा की गुहार लगाई. कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए कहा कि 25 मई तक जहांगीर खान को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, हालांकि इस दौरान उन्हें जांच में सहयोग देना होगा.
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पिछले दिनों से चल रहे इसी हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच एक सवाल उठने लगा है कि जिस बीजेपी ने बंगाल में 207 सीटें जीत ली, क्या अब वो फलता सीट जीत पाएगी? या फिर पिछले 15 साल से TMC का गढ़ बना फलता में एक बार फिर टीएमसी ही अपना परचम लहराएगी? आइए विस्तार से जानते है इन्हीं सवालों के जवाब.
फलता में इस बार पुष्पा बनाम सिंघम की लड़ाई
फलता विधानसभा सीट का चुनाव इस बार सियासी लड़ाई से आगे निकलकर एक फिल्म स्क्रिप्ट की तरह हो चुका है. उत्तर प्रदेश कैडर के तेज तर्रार IPS अजय पाल शर्मा को चुनाव आयोग ने पर्यवेक्षक बनाकर भेजा है, जिसे यूपी में सिंघम के तौर पर देखा जाता है. वहीं TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने इसपर पलटवार करते हुए एक चुनावी जनसभा में भरे मंच से कहा था कि, 'अगर तुम सिंघम हो, तो मैं पुष्णा हूं...पुष्पराज, झुकेगा नहीं.'
हालांकि पश्चिम बंगाल में टीएमसी की करारी हार के बाद अब समीकरण पूरी तरह बदल गए है. चुनाव के बाद जहांगीर खान कुछ दिनों के लिए अंडरग्राउंड हो गए थे, लेकिन री-पोलिंग से पहले वह वापस आए और उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर अपनी सुरक्षा पुख्ता कर ली.
टीएमसी का गढ़ है फलता, जानें सियासी समीकरण
फलता विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में आती है. यह इलाका TMC और खास तौर पर अभिषेक बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता है. आजादी के बाद फलता सीट पर यह 18वां चुनाव हैं और इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यहां जब भी लहरें आई, जनता ने लंबे समय तक उसी पार्टी का साथ दिया.
सियासी समीकरण की बात करें तो 1952 से लेकर 2006 तक लेफ्ट ने 9 बार चुनाव जीता है. वहीं कांग्रेस और TMC ने 4 बार सीटें जीती है. साल 2011 में चुनाव जीतने के बाद से यहां TMC का दबदबा कायम है. 2021 के चुनाव में TMC ने यहां करीबन 40 हजार वोटों से चुनाव जीता था. यह सीट करीब तीन दशक तक वामपंथ का अभेद्य किला था, जिसे टीएमसी ने साधकर अपना गढ़ बसा लिया.
जहांगीर खान vs देवांग्शु पांडा की लड़ाई
21 मई को फलता सीट पर री-पोलिंग होगी. टीएमसी की ओर से जहांगीर खान चुनावी मैदान में है जिनका सीधा मुकाबला बीजेपी उम्मीदवार देवांग्शु पांडा से है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद बीजेपी अपना परचम लहराने की जुगत में है तो वहीं TMC अपना किला बरकरार रखना चाहती है. देवांग्शु पांडा, पेशे के एक वकील है और इस बार उन्होंने TMC के भय वाले नैरेटिव को तोड़ने के लिए काफी मेहनत की है.
यहां तक की इस सीट को जीतने के लिए खुद मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने फलता सीट की कमान संभाल ली है और एक बड़ी रैली करके जहांगीर खान पर सीधा निशाना साधा है. सुभेंदु ने रैली से साफ कहा है कि वो(जहांगीर खान) खुद को पुष्पा बताता है तो अब इस पुष्पा की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है. उन्होंने आगे कहा कि, फलता के लोगों ने पिछले 10 साल से आजादी से वोट नहीं डाला है, लेकिन इस बार बैखोफ होकर मतदान कीजिए और बीजेपी को 1 लाख से अधिक वोटों से जितवाइए.
क्या बीजेपी भेद पाएगी टीएमसी का किला?
फलता विधानसभा सीट के समीकरण की बात करें तो यहां मुस्लिम और दलित वोटर दोनों सबसे ज्यादा जरूरी है. यहां अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं के भरोसे ही टीएमसी अपनी नैया पार कर रही थी. अब बीजेपी इन्हीं दलित और हिंदू वोटरों के धार्मिक ध्रुवीकरण के तहत अपनी जीत की आस लगा रही है. साथ ही जिस तरह से बीजेपी को पश्चिम बंगाल की जनता का जनतादेश मिला है, इसलिए कहा जा रहा है कि इस बार वह TMC का किला ढहा देंगे.
पश्चिम बंगाल में जब से बीजेपी की सरकार आई है तब से स्थानीय प्रशासन और पुलिस का रवैया भी पूरी तरह बदला चुका है. फलता में ही पुलिस ने जहांगीर खान के बेहद करीबी और फलता पंचायत समिति के उपाध्यक्ष सैदुल खान को जानलेवा हमले करने और हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है.
आर-पार की लड़ाई!
फलता सीट पर 21 मई को री-पोलिंग है और ऐसे में अब चुनाव प्रचार के लिए चंद घंटे ही बचे है. एक तरफ जहांगीर खान घर-घर जाकर वोट मांग रहे है और सहानुभूति कार्ड खेलकर अपनी साख बचाने की कोशिश में है तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे 'आतंक से मुक्ति' के उत्सव के रूप में प्रचार कर रही है. हालांकि अब 24 मई को मतगणना के बाद ही पता चल पाएगा की इस बार किसका कार्ड काम आया.
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