तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में सरकार बनाने को लेकर जारी गतिरोध अब गहराता जा रहा है. एक तरफ सुपरस्टार विजय (थलापति विजय) अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की सरकार बनाने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं, तो दूसरी तरफ राज्यपाल के सख्त रुख ने इस प्रक्रिया को अटका दिया है. इस बीच, दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज खुलकर विजय के समर्थन में आ गए हैं और उन्होंने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
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प्रकाश राज का राज्यपाल पर तीखा हमला
हमेशा अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के व्यवहार की कड़ी आलोचना की है. प्रकाश राज ने लिखा-
"राज्यपाल का यह व्यवहार घृणित, अस्वीकार्य और असंवैधानिक है. हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन विजय को जनादेश मिला है. उन्हें सदन में अपना अधिकार जताने की अनुमति मिलनी चाहिए."
प्रकाश राज ने 'जस्ट आस्किंग' हैशटैग के साथ सीधे तौर पर राज्यपाल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए.
राज्यपाल का 'झटका' और विजय की चुनौती
विजय अब तक दो बार राज्यपाल से मुलाकात कर चुके हैं और सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके हैं. हालांकि, राज्यपाल ने उन्हें दो टूक शब्दों में कह दिया है कि शपथ ग्रहण की अनुमति तभी मिलेगी जब विजय 118 विधायकों के समर्थन का हस्ताक्षर (Letter of Support) लेकर आएंगे.
ध्यान देने वाली बात है कि इस चुनाव में विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. बहुमत के लिए 118 का आंकड़ा चाहिए. कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बावजूद विजय अभी भी बहुमत के जादुई आंकड़े से 6 सीट पीछे हैं. राज्यपाल की इसी शर्त को प्रकाश राज और अन्य विपक्षी दल 'असंवैधानिक' करार दे रहे हैं.
4 मई का वो पोस्ट और बदली हुई राजनीति
प्रकाश राज ने चुनाव नतीजों के दिन (4 मई) को भी एक पोस्ट साझा किया था, जिसमें उन्होंने एमके स्टालिन की हार और विजय की जीत पर तंज कसते हुए कहा था कि अब राजनीति 'प्रशंसक केंद्रित' (Fan-centric) हो गई है. हालांकि, अब जब संवैधानिक संकट की स्थिति बनी है, तो प्रकाश राज ने निजी मतभेदों को दरकिनार कर लोकतंत्र और जनादेश का सम्मान करने की बात कही है.
सियासत का बढ़ा पारा
सिर्फ प्रकाश राज ही नहीं, बल्कि सीपीआई (CPI) जैसे दलों ने भी राज्यपाल के रवैये पर सवाल उठाए हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते संवैधानिक तौर पर राज्यपाल को विजय को न्योता देना चाहिए और बहुमत साबित करने के लिए सदन के पटल पर मौका देना चाहिए, न कि राजभवन में हस्ताक्षर की मांग करनी चाहिए. तमिलनाडु की यह सियासी जंग अब राजभवन बनाम जनता के जनादेश की लड़ाई बनती जा रही है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं.
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