पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सियासी पारा गरमा गया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कोलकाता और सेरामपुर में होने वाली चुनावी रैलियों को प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है. 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान वाले दिन ही राहुल गांधी को यहां हुंकार भरनी थी, लेकिन अब यह कार्यक्रम खटाई में पड़ता नजर आ रहा है.
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पाक सर्कस मैदान पर छिड़ा विवाद
राहुल गांधी की रैली के लिए पार्क सर्कस मैदान या मीटियाब्रज को चुना गया था. कांग्रेस का आरोप है कि इसी पार्क सर्कस मैदान में 8 अप्रैल को ममता बनर्जी ने रैली की थी, लेकिन जब राहुल गांधी की बारी आई तो नियमों का हवाला देकर रोक लगा दी गई. चर्चा यह भी है कि कोलकाता नगर निगम ने एक प्रस्ताव पास किया है जिसके तहत इस मैदान को राजनीतिक रैलियों से मुक्त रखा जाएगा.
मीटियाब्रज में क्यों फंसा पेंच?
पार्क सर्कस के बाद कांग्रेस ने मीटियाब्रज का विकल्प दिया था, लेकिन वहां भी सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया. बताया जा रहा है कि उसी समय और उसी अल्पसंख्यक बहुल इलाके में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव का भी कार्यक्रम पहले से तय था. एक ही जगह दो बड़े नेताओं के कार्यक्रम होने के कारण प्रशासन ने अनुमति नहीं दी.
कांग्रेस और TMC के बीच वार-पलटवार
इस पूरी घटना को लेकर बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने कहा कि राहुल गांधी की मालदा और मुर्शिदाबाद रैलियों में उमड़ी भीड़ से ममता सरकार और बीजेपी घबरा गई हैं, इसलिए साजिश के तहत रैलियों को रोका जा रहा है. वहीं राज्य की मंत्री और टीएमसी प्रवक्ता शशि पांजा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान रैलियों की अनुमति राज्य सरकार नहीं बल्कि चुनाव आयोग देता है. उन्होंने कहा कि सभी आवेदन सुविधा पोर्टल के जरिए 2 से 7 दिन पहले करने होते हैं, जिसका पालन सभी को करना चाहिए.
अब क्या होगा?
कांग्रेस हार मानने को तैयार नहीं है. पार्टी अब 25 या 26 अप्रैल के लिए रैलियों की नई अनुमति मांगने की तैयारी कर रही है. एक तरफ जहां कांग्रेस इसे 'लोकतंत्र की हत्या' बता रही है, वहीं टीएमसी इसे तकनीकी प्रक्रिया और नियमों का मामला बता रही है.
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