Tamil Nadu Elections 2026: तमिलनाडु की राजनीति में 23 अप्रैल की सुबह किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के क्लाइमेक्स जैसी रही. दशकों से 'द्रविड़ किलों' की रखवाली करने वाली DMK और AIADMK की दीवारों में इस बार एक नई दरार दिखाई दी. दीवार पर एक चेहरा चिपका विजय चंद्रशेखर जोसेफ जिसे थलापति पुकारा जाता है. पहली बार विजय की फोटो और नाम ईवीएम पर दिखाई दिए. पहली बार चुनाव में दो-दो सीटों से चुनाव लड़ रहे विजय वोट देने आए तो वायरल हुए. दूसरी तस्वीर वायरल हुई एक्ट्रेस तृषा कृष्णन की जो वोट देने आईं तो विजय के फैंस को हिम्मत बंधी.
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तमिलनाडु में पहली बार ऐसा नहीं है कि कोई स्टार सिनेमा के पर्दे पर उतरा और राजनीति का बादशाह बन गया. नया ये है कि बहुत लंबे गैप के बाद किसी स्टार ने जोरदार दस्तक देकर द्रविड़ राजनीति की दीवारें हिलाई हैं. विजय ने जितना माहौल बनाया तो उसके पीछे और कोई नहीं उनकी हिम्मत और उनका फैन क्लब विजय मक्कल इयक्कम यानी VMI है जिसने चुनाव पलट दिया. 17 साल पहले फैन क्लब शुरू करने का जो प्रयोग हुआ था उसका टेस्ट चुनाव में हुआ. विजय मक्कल इयक्कम (VMI) के नाम से एक अनुशासित 'मिनी आर्मी' ही वो ताकत है जो विजय को तमिलनाडु चुनावों के सेंटर में लाई है. फैन क्लब अब TVK के रूप में पहली बार राज्य के चुनाव में अपना भी भाग्य आजमा रहा है.
द्रविड किले में विजय लगा पाएंगे सेंध?
चुनाव केवल लड़ना नहीं होता. पोस्टर चिपकाने से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक जिसने तरीके से कर लिया वहीं विजेता माना जाता है. विजय ने फैंस को पोस्टर चिपकाने से लेकर बूथ मैनेजमेंट का काम देकर देश की राजनीति में बड़ा प्रयोग किया है जो बन सकती है तमिलनाडु में 'पावर ट्रांजिशन' की सक्सेस स्टोरी. सवाल सिर्फ ये नहीं कि विजय सीएम बनेंगे या नहीं. उससे भी बड़ा गंभीर सवाल है कि वो द्रविड पार्टियों के वोट बैंक में कितनी बड़ी सेंधमारी कर सकते हैं.
क्या है 'विजय मक्कल इयक्कम'?
विजय के फैन क्लब तब से शुरू हो गए थे जब उनका एक्टर का करियर 1993 से शुरू हुआ था. संगठित ताकत के रूप में विजय मक्कल इयक्कम (VMI) का जन्म जुलाई 2009 को पुदुक्कोट्टई में हुआ. विजय के करियर का वो दौर था जब 2007 में फिल्म पोक्किरी ब्लॉकबस्टर साबित हुए और वो मास-हीरो बन गए. हालांकि उसके बाद की कुछ फिल्में विल्लू, कुरुवी बॉक्स ऑफिस पर खास नहीं चलीं, लेकिन इसी दौरान विजय ने महसूस किया कि उनके प्रशंसक केवल 'ताली बजाने' वाली भीड़ नहीं बल्कि एक सामाजिक ताकत हैं. विजय ने करीब 85,000 फैन क्लब्स को संगठित सामाजिक कल्याण संगठन 'विजय मक्कल इयक्कम' (VMI) के तहत जोड़ा.
शुरू में इसे एक 'वेलफेयर एसोसिएशन' के रूप में पेश किया गया, जिसने रक्तदान, मुफ्त भोजन और छात्रों को छात्रवृत्ति देने जैसे काम शुरू किए. तकनीकी रूप से, विजय मक्कल इयक्कम (VMI) ही वो आधार बना जिससे तमिलगा वेट्टी कझगम (TVK) की नींव रखी. विजय ने फरवरी 2024 को जब अपनी पार्टी TVK का एलान किया तो फैन क्लब का पार्टी में मर्जर नहीं हुआ.
फैन क्लब का VMI का पूरे कैडर और स्ट्रक्चर ही पार्टी बन गई. VMI के जिला स्तर पर वाले पदाधिकारी TVK के जिला पदाधिकारी बन गए. पार्टी की चुनावी रणनीति और बूथ कमेटियों का पूरा काम वही फैंस कार्यकर्ता बनकर संभाल रहे हैं जिन्होंने दशकों तक विजय की फिल्मों का प्रचार किया.
कैसे हुई VMI की पॉलिटिकल एंट्री?
2021 में विजय ने फैन क्लब को पार्टी में बदलने का साइलेंट प्रयोग किया था. 2021 के स्थानीय निकाय चुनावों में फैन क्लब के एक्टिविस्ट निर्दलीय चुनाव लड़कर 115 से अधिक सीटें जीतीं. उसी जीत ने ही विजय को ये विश्वास दिलाया कि उनका 'मक्कल इयक्कम' अब चुनावी राजनीति के लिए तैयार है. विजय ने अपने फैंस को 'अनुशासित राजनीतिक कार्यकर्ताओं' में बदलने के लिए कई सालों तक सामाजिक कार्यों के जरिए ट्रेनिंग दी.
फिर अपने पुराने फैन क्लब VMI को ही चुनावी कैडर में बदल दिया. टीवीके पार्टी बनते समय VMI के ही पदाधिकारियों ने दिल्ली जाकर चुनाव आयोग में पार्टी के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की थी. VMI के पूर्व जनरल सेक्रेटरी बुसी आनंद (Bussy Anand) को ही नई पार्टी TVK का भी जनरल सेक्रेटरी बनाया गया है, जो इस बात का सबूत है कि संगठन का पूरा ढांचा वही पुराना है. पार्टी (TVK) के जनरल सेक्रेटरी बुसी आनंद सालों से VMI के सर्वेसर्वा रहे हैं. साथ ही वे विजय और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच के सबसे बड़े सेतु हैं.
चुनाव में VMI से विजय को मिला सीधा फायदा!
VMI के कार्यकर्ता, जो कभी फिल्मों के पोस्टर लगाते थे, अब बूथ एजेंट और वार्ड सचिव के रूप में काम कर रहे हैं. कल तक जो सिनेमाई पर्दों पर 'व्हिसल' (सीटी) बजाते थे, आज वे बूथों पर 'वोट' की बिसात बिछा रहे हैं. चुनाव प्रचार के दौरान टीवीके ने 27 अलग-अलग वॉलंटियर टीमें तैनात कीं, जो सीधे तौर पर उनके पुराने फैन क्लब के ढांचे से आई. सालों से फिल्मों के लिए जुटाया गया 'फैन डेटा' अब 'वोटर डेटा' में बदल चुका है, जिससे TVK को पता है कि किस घर में उनका पक्का समर्थक है.
VMI को कहां से मिलती है फंडिंग?
विजय के फैन क्लब केवल डोनेशन पर नहीं चलते, बल्कि उनका कमाई का अपना सिस्टम है. एक सिस्टम है सेल्फ-फंडिंग का जिसमें जिला स्तर के पदाधिकारी अक्सर स्थानीय व्यवसायी या रीयल एस्टेट से जुड़े लोग होते हैं जो क्लब की गतिविधियों को फंड करते हैं. VMI ने डिजिटल सदस्यता अभियान चलाकर फंड जुटाया. मर्चेंडाइज का भी मॉडल है. विजय की तस्वीरों वाली टी-शर्ट, झंडे जैसे प्रोडक्ट की बिक्री से होने वाली कमाई का एक हिस्सा वेलफेयर कामों में लगता है. फैन क्लब में राज्य स्तर से लेकर जिला, ब्लॉक और अंत में 'बूथ लेवल' तक पदाधिकारियों की नियुक्ति होती है. वही लीडरशिप केवल चुनाव में नहीं, बल्कि साल भर सक्रिय रहती है ताकि जनता के बीच उनकी 'मददगार' छवि बनी रहे.
विजय की फिल्म रिलीज होना तमिलनाडु में किसी त्योहार से कम नहीं होता, लेकिन VMI इसे एक 'पॉलिटिकल एक्सरसाइज' की तरह इस्तेमाल करता है. 50-60 फीट के कटआउट पर दूध चढ़ाने लेकर चैरिटी करके विजय का माहौल बनाया जाता है.
4 मई को तस्वीर होगी साफ!
फिलहाल तो वोट पड़ चुके. अब 4 मई को मशीनें खुलेंगी तो पता चलेगा कि किसकी मेहनत काम आई, किसकी नहीं. सवाल ये कि क्या विजय का 'फैन-टू-कैडर' मॉडल उन्हें 'किंग' बनाएगा या कम से कम किंगमेकर की भूमिका तक पहुंचाया? विजय ने अपनी फिल्मों को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक पार्टी TVK की लॉन्चिंग पैड की तरह इस्तेमाल किया है. वोटिंग के बाद नतीजे वाले दिन साबित होगा कि फैन-बेस' विजय का स्थायी 'वोट-बेस' बदल पाया या नहीं.
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