Who is suvendu adhikari : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है. इस जीत के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे हैं सुभेंदु अधिकारी, जिन्होंने न केवल अपनी नंदीग्राम सीट बचाई, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके सबसे सुरक्षित गढ़ भवानीपुर में 15,105 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी. इस प्रचंड जीत के बाद अब विधायक दल ने सुभेंदु को अपना नेता चुना है. सुभेंदु के सीएम बनने का ऐलान ऑब्जर्वर और देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कर दिया.
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भवानीपुर और नंदीग्राम: सुभेंदु का डबल धमाका
2026 के विधानसभा चुनावों में सुवेंदु अधिकारी ने TMC प्रमुख को उन्हीं के निर्वाचन क्षेत्र में निर्णायक रूप से हरा दिया. इस सीट को वे अपना सबसे सुरक्षित गढ़ मानती थीं. सुभेंदु ने ममता को 15,105 वोटों के अंतर से हराया है. वहीं दूसरी सीट नंदीग्राम में TMC के पवित्र कर को 9,665 वोटों से हरा दिया है.
छात्र राजनीति से CM बनने तक का सफर
- 57 वर्षीय सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक करियर बेहद प्रभावशाली रहा है.
- शुरुआत: 1995 में कांथी नगरपालिका के पार्षद के रूप में करियर शुरू किया.
- अनुभव: 4 बार विधायक और 2 बार सांसद (लोकसभा) रह चुके हैं.
- शिक्षा: नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी से एम.ए. की डिग्री.
- आंदोलन: 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के असली सूत्रधार रहे, जिसने 34 साल के वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका था.
TMC के 'पावर हाउस' से BJP के 'पोस्टर बॉय' तक
दिसंबर 2020 में टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले सुभेंदु कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार थे. हालांकि, अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद के चलते उन्होंने बगावत कर दी. मई 2021 से विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने सदन के भीतर ममता सरकार की नाक में दम किए रखा, जिसका फल आज उन्हें बड़ी जीत के रूप में मिला है.
विरासत और विवाद
सुभेंदु कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शिशिर अधिकारी के बेटे हैं. शिशिर अधिकारी UPA-2 सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री थे. उनका पूरा परिवार मिदनापुर की राजनीति में गहरी पैठ रखता है. सुभेंदु का परिवार पहले कांग्रेस से जुड़ा रहा. बाद में 1998 में ममता बनर्जी द्वारा बनाई गई तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गया. हालांकि, उनका करियर विवादों से अछूता नहीं रहा. सितंबर 2014 में शारदा चिट फंड घोटाले में सीबीआई ने उनसे पूछताछ भी की थी, जिसे लेकर विपक्षी दल अक्सर उन पर हमलावर रहते हैं.
जब नंदीग्राम आंदोलन की सुभेंदु ने की अगुआई
साल 2007 में, सुवेंदु अधिकारी विधायक थे.उन्होंने नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन की अगुवाई की. इस आंदोलन की बदौलत ही 2011 में तृणमूल कांग्रेस, 34 साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से बेदखल करने में कामयाब रही. 2009 में, सुवेंदु अधिकारी ने तमलुक लोकसभा चुनाव में CPM के कद्दावर नेता लक्ष्मण सेठ को 1.73 लाख वोटों के भारी अंतर से हरा दिया. 2014 में, वे दोबारा लोकसभा के लिए चुने गए (यह उनका दूसरा कार्यकाल था). 2016 में, उन्होंने नंदीग्राम विधानसभा सीट से जीत हासिल की और उन्हें परिवहन मंत्री बनाया गया.
57 के सुभेंदु की कुल नेटवर्थ 85.87 लाख रुपये बताई गई है, जबकि उनके ऊपर किसी भी तरह का कोई कर्ज नहीं है. अधिकारी के पास अचल संपत्ति के तौर पर 9 लाख रुपये की कृषि भूमि है. 27 लाख रुपये के करीब कीमत वाली नॉन एग्रीकल्चर लैंड-प्लॉट हैं. सुभेंदु के पास कोई कमर्शियल बिल्डिंग नहीं है, जबकि रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी नाम पर तीन घर-फ्लैट हैं. इनकी कीमत चुनावी हलफनामे में 24.75 लाख रुपये के करीब बताई गई है.
सुभेंदु के पास न कार है न ही बाइक
सुभेंदु अधिकारी के पास न तो कोई कार है और न ही बाइक. चुनावी हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक उनके पास कोई अभूषण भी नहीं है. उनके भाई सौमेंदु अधिकारी भी बीजेपी में है. शुभेंदु के एक भाई दिब्येंदु अधिकारी भी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद रह चुके हैं.
सुभेंदु अधिकारी ने क्यों नहीं की शादी?
सुभेंदु अधिकारी ने 57 साल के हैं और उन्होंने अभी तक शादी नहीं की है. ऐसा माना जाता है कि इसके पीछे की वजह उनका सियासत में आगे बढ़कर जनता की सेवा करने का दृढ़ संकल्प है. उन्हें लगा कि कहीं न कहीं पारिवारिक जिम्मेदारियां उनके संकल्प में बाधा बन सकती है. दूसरी तरफ सिंगल रहकर राजनीति करने वालों के लिए पश्चिम बंगाल लकी माना जाता है. ममता बनर्जी ने 15 साल तक शासन किया. ऐसे में इसी को कहीं न कहीं लक मानते हुए सुभेंदु अधिकारी ने भी शादी करना उचित नहीं समझा.
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