तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए मतदान संपन्न हो चुका है, और राज्य में इस बार 85.15% की बंपर वोटिंग रिकॉर्ड की गई है. इस भारी मतदान के बीच राज्य के राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है. वरिष्ठ पत्रकार एन. राम ने पहले चरण के मतदान के बाद अपना चुनावी विश्लेषण साझा करते हुए डीएमके गठबंधन की जीत और अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी के प्रभाव पर बड़ी बात कही है. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
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डीएमके गठबंधन के लिए बहुमत का अनुमान
वरिष्ठ पत्रकार एन. राम के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाले डीएमके गठबंधन को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है. उन्होंने अनुमान जताया है कि डीएमके गठबंधन 155 से 160 सीटें हासिल कर सकता है. इतना ही नहीं, उन्होंने डीएमके के लिए अकेले दम पर बहुमत की उम्मीद भी जताई है. उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री स्टालिन की सांगठनिक ताकत और जमीनी स्तर पर किए गए काम का फायदा गठबंधन को मिलता नजर आ रहा है.
थलापति विजय की पार्टी बनेगी 'गेम चेंजर'?
इस चुनाव में सबसे दिलचस्प पहलू थलापति विजय की पार्टी 'टीवीके' (TVK) का प्रवेश रहा है. एन. राम का मानना है कि यदि विजय की पार्टी 20% से ज्यादा वोट हासिल कर लेती है, तो यह उनके लिए सामान्य से कहीं बड़ी जीत मानी जाएगी. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि इतने वोट प्रतिशत के आधार पर उन्हें बहुत अधिक सीटें मिलें, लेकिन त्रिकोणीय मुकाबले में उनका यह प्रदर्शन राज्य की पारंपरिक राजनीति के समीकरण बदल सकता है.
DMK और AIADMK के बीच कड़ा मुकाबला
तमिलनाडु का यह चुनावी दंगल मुख्य रूप से दो बड़े गुटों के बीच है. एक तरफ डीएमके के नेतृत्व वाला 'इंडिया' गठबंधन है, जिसमें कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां शामिल हैं, जो स्टालिन की सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में हैं. दूसरी तरफ एआईएडीएमके (AIADMK) के एडप्पादी के. पलानीस्वामी हैं, जो बीजेपी के साथ मिलकर 5 साल बाद सत्ता में वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं.
पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की तारीफ
एन. राम ने तमिलनाडु में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों के प्रबंधन की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के विपरीत, तमिलनाडु में मतदाता सूची (SSR) को लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं देखा गया. उनके अनुसार, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की कार्यप्रणाली और चुनाव आयोग के सहयोग ने इसे एक विवादरहित प्रक्रिया बनाया है, जो राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक सकारात्मक संकेत है.
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