कौन हैं SA चंद्रशेखर जिनके मास्टर प्लान से विजय थलापति बने तमिलनाडु के असली Hero

थलापति विजय की ऐतिहासिक जीत के पीछे उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर की 30 साल की तपस्या और संघर्ष की कहानी. जानिए कैसे एक पिता ने अपने बेटे को फिल्मी पर्दे से राजनीति के शिखर तक पहुंचाया.

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TVK की जबदस्त जीत के बाद एसए चंद्रशेखकर की क्यों हो रही इतनी चर्चा.

रूपक प्रियदर्शी

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देश में चर्चा दक्षिण भारत के उस थलापति की, जिसने परदे पर तो सैकड़ों जंग जीतीं, लेकिन राजनीति के मैदान में अपनी पहली ही दस्तक से तमिलनाडु का 60 साल पुराना इतिहास बदल दिया. कहानी सिर्फ विजय की नहीं है, ये कहानी है एक पिता एस.ए. चंद्रशेखर की भी है, जिन्होंने तीन दशक पहले ही अपने बेटे की आंखों में थलापति और थलाइवा बनने का सपना पढ़ लिया था. विजय की कामयाबी के साथ वायरल हैं विजय के पिता एस ए चंद्रशेखर यानी SAC जो बन गए हैं देश का चर्चित चेहरा. 

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सोशल मीडिया, कैमरे की नजरों से देश ने विजय की मुस्कान तो देखी, पिता और मां की आंखों में सीएम के पेरेंट्स बनने का उमंग भी दिखा. इंटरनेट पर लोग टूटे पड़े हैं उस वीडियो को देखने और शेयर करने के लिए जब घर के अंदर वाला लिफ्ट खुलता है और घर के बच्चे चहक कर चंद्रशेखर से लिपट जाते हैं. ये जीत केवल विजय की नहीं, एक पिता के बरसों से संजोए सपने के पूरा होने का उदघोष था.

राजनीति में आने को तैयार नहीं थे विजय

एक वक्त था जब विजय राजनीति में आगे नहीं बढ़ने को तैयार नहीं थे. राहुल गांधी से मिले. 2011 के चुनाव में AIADMK को साइलेंट सपोर्ट दिया. विजय को किंग  बनाने वाले चाणक्य तो पिताजी ही निकले. विजय के राजतिलक की घड़ी में विजय के साथ एस ए चंद्रसेखर के संघर्ष, विवाद, जिद की हार-जीत की पुरानी कहानियां वायरल हैं. 

थलापति के पीछे पिता SAC की तपस्या

थलापति विजय की सफलता के पीछे उनके पिता, दिग्गज निर्देशक एस. ए. चंद्रशेखर (SAC) की लंबी तपस्या और दिलचस्प कहानी है.  एस. ए. चंद्रशेखर का जन्म तमिलनाडु के तंगचिमदम में एक कैथोलिक ईसाई परिवार में हुआ था. फिल्म लाइन में आने का उनका सफर आसान नहीं था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में की. धीरे-धीरे अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने निर्देशन की कुर्सी संभाली और 70 से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया. 1981 में रिलीज हुई फिल्म सत्तम ओरु इरुत्तरई ने स्टार डायरेक्टर बना दिया. फिर उनका करियर तमिल से निकलकर बॉलीवुड तक पहुंचा. हिंदी में 'आज़ाद देश के गुलाम' और 'कुदरत का कानून' जैसी फिल्में बनाईं.

पिता की शादी में शामिल थे विजय? 

चंद्रशेखर जब असिस्टेंट डायरेक्टर हुआ करते थे तब सिंगर शोभा को दिल से बैठे, लेकिन कह नहीं पा रहे थे. एक संकोच ये भी कि वो थे ईसाई और शोभा ठहरी हिंदू. चंद्रशेखर ने अपने दिल की बात दिग्गज एक्टर शिवाजी गणेशन को बताई. शिवाजी गणेशन ने पंच बनकर रिश्ता पक्का करा दिया. 24 अप्रैल 1973 को दोनों की शादी भी हो गई. दोनों का प्यार वाला रिश्ता विजय के जन्म के साथ और आगे बढ़ा. कहा जाता है कि विजय जब 6 साल के हुए तो शोभा की इच्छा के अनुसार दोनों ने चर्च में दोबारा शादी की थी, जिसमें नन्हे विजय भी शामिल हुए थे. 

चंद्रशेखकर का पहला सपना- बेटा एक्टर बने

जैसे हर पिता अपने बच्चों के लिए एक सपना बुनता था. चंद्रशेखर ने अपने बेटे विजय के लिए एक्टर का पहला सपना देखा. 
विजय के 18 साल के होते ही एस ए चंद्रशेखर ने 1992 में विजय को फिल्म 'नालैया थीरपु में बतौर हीरो लॉन्च कर दिया. फिल्म इतनी नहीं चली कि विजय एक्टर इन डिमांड हो जाएं. उन्होंने कुछ और फिल्में की लेकिन वो सक्सेस नहीं मिली जो चंद्रशेखर को बेटे के लिए चाहिए थे. ये जरूर था कि उन्होंने सोच लिया कि विजय को ऐसे रोल करने चाहिए जो फिल्मों का ही नहीं, लोगों का हीरो बनाए. थलापति इन मेकिंग वहीं से शुरू हुआ. 

पिता की फिल्म से मिला थलापति का टैग

विजय को सबसे पहले 'इलाय थलापति' यानी युवा थलापति का टैग एस. ए. चंद्रशेखर की फिल्म 1994 की रसिगन से मिला. 90 के दशक में उन्होंने रोमांटिक और फैमिली फिल्में कीं जिनसे वो घर-घर में पहचाने जाने लगे. 2000 के आसपास विजय ने अपनी चॉकलेट बॉय इमेज छोड़कर एक्शन हीरो वाले रोल करने शुरू किए. वहीं से मास अपील बनने लगी. विजय करीब 23 सालों तक 'इलाय थलापति' कहलाते रहे, लेकिन 2017 में 40 प्लस होने पर डायरेक्टर एटली की फिल्म 'मर्सल' के फर्स्ट लुक पोस्टर से उन्हें थलापति पुकारा जाने लगे. 

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले हीरो की भूमिका निभाई

मर्सल (2017), सरकार (2018), और बिगिल (2019) जैसी फिल्मों में विजय ने न केवल एक्शन किया, बल्कि भ्रष्टाचार और सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले एक 'लीडर' की भूमिका निभाई. ये वही दौर था जब उनकी फिल्मों के सामाजिक संदेशों और लोकप्रियता ने उन्हें परदे के नायक से जनता के थलापति के रूप में बदल दिया. 

निर्देशक के तौर पर चंद्रशेखर ने विजय की फिल्मों में जानबूझकर सामाजिक और राजनीतिक संवाद डलवाए. उन्होंने विजय को एक 'मसीहा' के रूप में पेश किया जो गरीबों और अन्याय के खिलाफ लड़ता है, ताकि जनता उन्हें एक भविष्य के नेता के रूप में देखने लगे.विजय के पूरे ट्रांसफॉर्मेशन में एसए चंद्रशेखर बड़ा रोल प्ले करते रहे. 

विजय को राजनीति में लाने में SAC की भूमिका

विजय को राजनीति में लाने और उनके राजनीतिक आधार को तैयार करने में उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर (SAC) की भूमिका एक 'मास्टरमाइंड' की रही है. चंद्रशेखर ने दशकों पहले से इसकी बिसात बिछानी शुरू कर दी थी. चंद्रशेखर ने विजय के करियर के शुरुआती दिनों (1993) में ही उनके नाम पर 'रसिगर मंद्राम' (प्रशंसक क्लब) की शुरुआत की थी. उन्होंने बाद में इसे 'विजय मक्कल इयक्कम' (VMI) में बदल दिया, जो केवल एक प्रशंसक क्लब नहीं बल्कि एक समाज सेवा करने वाला संगठन बना, जिससे विजय की छवि एक जन-नायक के रूप में उभरी. 

राहुल गांधी से मुलाकात हुई और फिर...

एस ए चंद्रशेखर को बेटे को सुपर स्टार बनाना था जो काबिल एक्टर ने कर दिखाया था. एक और सपना अधूरा था विजय को राजनीति में लॉन्च करने का. विजय राजनीति की ओर बढ़े, लेकिन टुकड़ों में. 2009 के आसपास राहुल गांधी से उनकी मुलाकात हुई थी. राहुल को तमिलनाडु कांग्रेस के लिए विजय जैसा फेस चाहिए थे. विजय राहुल के कहने पर दो कदम आगे बढ़े, लेकिन फिर चार कदम पीछे खींच लिए.

2011 में एक औऱ साइलेंट एक्सपेरिमेंट किया. 2011 के चुनाव में AIADMK  का साइलेंट सपोर्ट दिया. जयललिता से विजय की अच्छी बनने लगी, लेकिन कहा जाता है कि 2013 में विजय की थलाइवा फिल्म की टैग लाइन टाइम टू लीड ने अम्मा को नाराज किया. फिल्म तो फंस गई. ये कभी कन्फर्म नहीं हुआ क्या उस समय विजय थलापति से थलाइवा बनने का कोई प्लान पर काम कर रहे थे या नहीं. 

राजनीति को लेकर बेटे की खामोशी ने पिता को किया परेशान

राजनीति को लेकर विजय की खामोशी चंद्रशेखर को परेशान करती रही. विजय को लीडर बनाने की महत्वाकांक्षा इतनी बढ़ी कि उन्होंने 2020 में बिना विजय की सहमति के जबरन राजनीतिक पार्टी ऑल इंडिया थलापति विजय मक्कल इयक्कम बना ली.  फैन क्लब की एक्टिविटी, विजय की पॉपुलरिटी को देखकर चंद्रशेखर ने बड़ा कदम उठा लिया. बिना विजय से पूछे, साथ लिए उन्होंने पॉलिटिकल पार्टी ऑल इंडिया थलापति विजय मक्कल इयक्कम रजिस्टर्ड करा ली. 

बेटे ने पिता के ही खिलाफ दर्ज करा दिया सिविल केस

चंद्रशेखर ने विजय के नाम और उनकी तस्वीरों का उपयोग करके सार्वजनिक बैठकें और चुनावी गतिविधियां शुरू कर दी थीं. विजय इसके इतने खिलाफ हुए कि औपचारिक बयान जारी करके कहा कि उनका अपने पिता की पार्टी से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने फैंस को भी पार्टी से जुड़ने से मना किया. तब विजय ने माता-पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का कदम उठाया. आपराधिक FIR तो नहीं की लेकिन सितंबर 2021 में चेन्नई कोर्ट में माता-पिता समेत 11 लोगों के खिलाफ सिविल मुकदमा दर्ज कराया. तब माना गया कि दोनों के रिश्ते बहुत खराब हो गए हैं, लेकिन जब 2022 में विजय ने टीवीके नाम की नई पार्टी लॉन्च की तब स्टेज पर मां शोभा और पिता एस ए चंद्रशेखर मौजूद थे और उनके चरणों में झुके दिखे भावी सीएम विजय. 

कांग्रेस से गठबंधन को लेकर पिता SAC का रुख

पिता का सपना पूरा हो रहा है. विजय का सीएम बनना तय माना जा रहा है. चंद्रशेखर विजय की पार्टी में कुछ नहीं लेकिन उनका कहा रह-रहकर हलचल मचाती रही है. सुपरस्टार विजय की राजनीतिक पार्टी TVK और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर का रुख बेहद दिलचस्प और रणनीतिक रहा है. चुनाव से पहले, जनवरी 2026 में चंद्रशेखर ने कांग्रेस को एक खुला प्रस्ताव देते हुए कहा था कि वह DMK जैसे द्रविड़ दलों का पिछलग्गू बनकर अपनी ताकत खो चुकी है और उसे अपनी पुरानी गरिमा वापस पाने के लिए TVK के साथ हाथ मिलाना चाहिए. हालांकि डे वन से विजय की लाइन रही कि किसी से अलायंस नहीं करना है. अकेले सरकार बनानी है. हालांकि अब हालात बदले हैं. बस 10 सीटों के लिए उन्हें किसी न किसी से समर्थन लेना पड़ेगा.

हालांकि, उस समय  कांग्रेस ने उनका आइडिया खारिज कर दिया था. अब, मई 2026 के ताजा चुनावी नतीजों में जब TVK 108 से ज्यादा सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, चंद्रशेखर ने अपने उसी रुख को और मजबूती से दोहराया है. उन्होंने कहा है कि विजय कांग्रेस को सत्ता में सम्मानजनक भागीदारी (Power Sharing) देने के लिए तैयार हैं, लेकिन अंतिम फैसला विजय को ही करना है. कुल मिलाकर, चंद्रशेखर की रणनीति कांग्रेस को एक 'जूनियर पार्टनर' के रूप में साथ लाकर तमिलनाडु में एक नया राजनीतिक समीकरण बनाने की है.

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