तमिलनाडु की राजनीति में सुपरस्टार विजय थलपति ने अपनी नई पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम(TVK) के साथ कदम रखते ही इतिहास रच दिया है. विधानसभा चुनाव के नतीजों ने न केवल राज्य की पुरानी दिग्गज पार्टियों AIADMK और DMK को चौंका दिया है, बल्कि अब राज्य की सत्ता की चाबी भी विजय के हाथों में नजर आ रही है. इस बड़ी जीत के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, खासकर राहुल गांधी के एक संदेश और उस पर विजय थलपति के जवाब ने नए गठबंधन की सुगबुगाहट पैदा कर दी है.
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राहुल गांधी की बधाई और विजय का खास जवाब
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए विजय थलपति को उनकी पार्टी के शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी थी. राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा था कि उन्होंने विजय से बात की है और यह जनादेश युवाओं की बुलंद आवाज को दर्शाता है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
अब विजय थलपति ने राहुल गांधी की इस शुभकामना का गर्मजोशी से जवाब दिया है. विजय ने लिखा, 'लोकसभा में विपक्ष के माननीय नेता का फोन और शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद. हम लोक सेवा में उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे. अपने राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए सामूहिक सहयोग की आवश्यकता है. राजनीति से परे हम तमिलनाडु की जनता के कल्याण को प्राथमिकता देंगे.' विजय के इस सामूहिक सहयोग वाले बयान को राजनीतिक गलियारों में बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
तमिलनाडु विधानसभा का नंबर गेम और बहुमत का पेच
तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों में से विजय थलपति की पार्टी TVK ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की है. हालांकि यह प्रदर्शन बेहद शानदार है, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से विजय अभी भी थोड़ा दूर हैं. तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की आवश्यकता होती है, जबकि विजय के पास 108 सीटें हैं. यानी उन्हें सत्ता के शिखर तक पहुंचने के लिए कम से कम 10 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है. इसी 10 सीटों के अंतर ने कांग्रेस और अन्य छोटी पार्टियों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है.
क्या कांग्रेस बनेगी विजय की किंगमेकर?
मौजूदा समीकरणों को देखें तो कांग्रेस के पास इस चुनाव में 5 सीटें आई हैं. यदि कांग्रेस विजय थलपति को समर्थन देने का फैसला करती है, तब भी TVK को 5 और सीटों की दरकार होगी. ऐसे में इंडिया गठबंधन की अन्य पार्टियां जैसे सीपीआई और सीपीएम, जिनके पास दो-दो सीटें हैं, उनकी भूमिका अहम हो जाएगी. अगर ये सभी दल एक साथ आते हैं, तब भी विजय को एक और सीट की जरूरत पड़ सकती है, जिसके लिए पीएमके जैसी पार्टियों से बातचीत की संभावना जताई जा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी और विजय के बीच यह डिजिटल संवाद दरअसल पर्दे के पीछे चल रही गठबंधन की तैयारी का हिस्सा हो सकता है.
विजय के पिता ने दिए गठबंधन के खुले संकेत
इस पूरी सियासी तस्वीर में विजय थलपति के पिता एस.ए. चंद्रशेखर के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है. उन्होंने कांग्रेस को TVK के साथ गठबंधन करने का खुला निमंत्रण दे दिया है. चंद्रशेखर का कहना है कि कांग्रेस ने अतीत में अन्य दलों को समर्थन देकर अपनी जमीन कमजोर की है, और अब उसके पास खुद को फिर से मजबूत करने का सुनहरा मौका है.
कांग्रेस के भीतर भी एक धड़ा ऐसा है जो मानता है कि डीएमके का साथ छोड़ विजय थलपति जैसे युवा और प्रभावशाली नेता के साथ जुड़ना भविष्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या राहुल गांधी और विजय थलपति की यह नई केमिस्ट्री तमिलनाडु में एक नई सरकार को जन्म देगी.
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