पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुई भारी वोटिंग के बाद अब राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है. वरिष्ठ पत्रकार विजय विद्रोही ने अपने विशेष कार्यक्रम 'विजय फैक्टर' में इस वोटिंग पैटर्न का बारीकी से विश्लेषण किया है. उनका मानना है कि इस बंपर वोटिंग ने टीएमसी (TMC) और बीजेपी (BJP) दोनों खेमों की धड़कनें बढ़ा दी हैं.
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क्या बढ़ा हुआ मतदान बदलाव का संकेत है?
विजय विद्रोही के अनुसार, वोटिंग परसेंटेज बढ़ने के पीछे कई तकनीकी और राजनीतिक कारण हो सकते हैं जैसे-
SIR (एसआईआर) फैक्टर
वोटर लिस्ट में नामों की काट-छांट के कारण बेस वोटर कम हुए, जिससे प्रतिशत बढ़ा हुआ दिख रहा है. वहीं, जिन परिवारों के नाम कटे, उनमें बीजेपी के प्रति नाराजगी या बदला लेने की भावना भी देखी गई.
प्रवासी मजदूरों की वापसी
खाड़ी युद्ध और अन्य राज्यों में संकट के कारण बंगाल के मजदूर बड़ी संख्या में वापस लौटे हैं, जिन्होंने इस बार बढ़-चढ़कर मतदान किया.
खुलकर निकले बीजेपी वोटर
अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती के कारण ग्रामीण इलाकों में वह वोटर भी बाहर निकले जो पहले टीएमसी के डर से मतदान करने से बचते थे.
बीजेपी की बढ़त और टीएमसी की चुनौती
पिछले चुनाव (2021) में पहले चरण की 152 सीटों पर 82.3 फीसदी मतदान हुआ था. तब टीएमसी के पास 92+ और बीजेपी के पास 59 सीटें थीं. विजय विद्रोही का विश्लेषण कहता है कि इस बार करीब 80 सीटों पर बेहद कड़ा मुकाबला है. निष्पक्ष पत्रकारों के फीडबैक के आधार पर ये कहा जा सकता है कि बीजेपी को इस चरण में 10 से 15 सीटों का फायदा हो सकता है. वहीं टीएमसी को इतनी ही सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है.
क्या सत्ता परिवर्तन होगा?
विजय विद्रोही स्पष्ट करते हैं कि बीजेपी की सीटें बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि वह सीधे सत्ता पर काबिज हो रही है, और न ही टीएमसी के कुछ नुकसान का मतलब सत्ता से बेदखली है. असली खेल दूसरे चरण (Second Phase) में तय होगा. अगर बीजेपी दूसरे चरण में भी अप्रत्याशित प्रदर्शन करती है, तब वह 120-125 के आंकड़े तक पहुंच सकती है. फिलहाल, पहले चरण में मुकाबला बेहद रोचक और कड़ा बना हुआ है.
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