पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है. 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में यहां मतदान होने वाले है और 4 मई को वोटों की गिनती होगी. इसी बीच न्यूज़ तक के विशेष कार्यक्रम साप्ताहिक सभा में राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी और तक चैनल्स के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने बंगाल चुनाव के गणित और समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की. इस दौरान अमिताभ तिवारी ने बताया कि कैसे '3M' (मोदी, महिला, और मुस्लिम) और SIR फैक्टर इस चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं. आइए विस्तार से जानिए पूरा एनालिसिस.
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क्या ममता के वोट बैंक में लगेगी सेंध?
बंगाल में चर्चा है कि SIR के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं. आंकड़ों के अनुसार, 2021 के मुकाबले लगभग 52 लाख वोटर्स डिलीट हुए हैं, जिनमें से अधिकतर दक्षिण और मध्य बंगाल से हैं. अमिताभ तिवारी के अनुसार, 'औसतन हर सीट पर 17,000 वोट कटे हैं. यदि ये सभी टीएमसी के वोटर मान लिए जाएं, तब भी ममता बनर्जी की 40-42 सीटें खतरे वाले क्षेत्र में आ सकती हैं.' हालांकि, अमतिाभ तिवार ने यह भी कहा हैं कि सिर्फ इस आधार पर ममता को हराना मुश्किल है, क्योंकि उनकी पिछली जीत का मार्जिन काफी बड़ा था.
महिला वोट बैंक: 'लक्ष्मी भंडार' बनाम 'संदेशखाली'
ममता बनर्जी का सबसे मजबूत स्तंभ महिला वोटर्स रही हैं. लेकिन सर्वे के अनुसार, जो बढ़त पिछली बार 14% थी, वह अब घटकर 5-6% रह गई है. इसके पीछे मुख्य कारण संदेशखाली की घटना, आरजीकर मेडिकल कॉलेज मामला और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे हैं. दूसरी ओर, टीएमसी 'लक्ष्मी भंडार' योजना के जरिए महिलाओं को सीधे आर्थिक मदद पहुंचा रही है. बीजेपी ने 3000 रुपये देने का वादा तो किया है, लेकिन टीएमसी इसे 'जुमला' बताकर न्यूट्रलाइज करने की कोशिश कर रही है.
बीजेपी की जीत का क्या है फॉर्मूला?
बीजेपी के लिए बंगाल की राह अभी भी चुनौतीपूर्ण है. अमिताभ तिवारी ने समझाया कि 2021 में बीजेपी को 38% और टीएमसी को 48% वोट मिले थे. उन्होंने कहा कि, 'बीजेपी को चुनाव जीतने के लिए कम से कम 5% के स्विंग की जरूरत है. यदि हिंदू समाज का वोट शेयर बीजेपी के पक्ष में 50% से बढ़कर 58-60% हो जाता है, तो बीजेपी 153 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकती है.'
केवल 'SIR' काफी नहीं
एनालिसिस का निचोड़ यह है कि मतदाता सूची से नाम कटना (SIR) बीजेपी की जीत की गारंटी नहीं है. जब तक हिंदू वोट बैंक में एक बड़ा हिस्सा (करीब 7-8%) ममता के खिलाफ शिफ्ट नहीं होता, तब तक टीएमसी का पलड़ा भारी रह सकता है. बंगाल का यह चुनाव अंततः इस बात पर टिका है कि क्या बीजेपी एंटी-इनकंबेंसी और महिला सुरक्षा के मुद्दों को वोटों में तब्दील कर पाएगी या ममता का कल्याणकारी योजनाओं वाला कार्ड एक बार फिर उन्हें सत्ता दिलाएगा.
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