पश्चिम बंगाल में इस बार भाजपा और तृणमूल कांग्रेस ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. SIR के बाद एक तरफ बीजेपी साफ-सुथरे मतदान का दावा कर रही है वहीं टीएमसी वोट काटने का आरोप लगा रही है. इन सबके बीच पहले चरण में 93.19% और दूसरे चरण में 91.41 फीसदी मतदान ने पूरे देश को चौंका दिया. भारत के इतिहास में ये चुनाव मील का पत्थर बन गया. इसके बाद से कयास लगाए जाने लगे कि ज्यादा मतदान के चलते इस बार सत्ता का बदलाव हो सकता है. इसी बीच पोल डायरी एग्जिट पोल के आंकड़े भी सामने आ गए हैं.
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पोल डायरी के आंकड़ों की मानें तो पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से बीजेपी को 142 से 171 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. जबकि टीएमसी को 99-127 सीटें मिलने की बात कही जा रही है. कांग्रेस को महज 3-5 सीटें और लेफ्ट फ्रंट को 2- सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. जिस बंगाल में कभी लेफ्ट का जलवा हुआ करता था वो 2-3 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है. पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटों में से बहुमत के लिए 148 सीटों के आंकड़े को छूना जरूरी होगा. साल 2021 के चुनाव में 215 सीटों पर जीत दर्ज की थी. वहीं बीजेपी को 77 सीटों पर थी. कांग्रेस पार्टी का खाता भी नहीं खुल पाया था. तब ममता बनर्जी ने 'खेला होबे' (Khela Hobe) के नारे के साथ 200 से अधिक सीटें जीतकर तीसरी बार सत्ता हासिल की थी.
साल 2016 में क्या थे हालात?
साल 2016 में टीएमसी को ममता बनर्जी के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत मिला था. टीएमसी को कुल 2011 सीटें मिली थीं. वहीं बीजेपी को महज 3 सीटें मिली थीं. 2016 में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में एंट्री मारी और 2021 में 77 सीटें जीतकर देश को सोचने पर मजबूर कर दिया कि बंगाल में भी कमल खिल सकता है. इस बार के चुनाव में एग्जिट पोल्स के नतीजे तो इस बात की तरफ इशारा भी कर रहे हैं. हालांकि नतीजे 4 मई को आएंगे. इसके बाद ही पता चलेगा कि बंगाल किसका?
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