बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे फेज में मिलीं 77 शिकायतें... जहांगीर खान की फाल्टा सीट ने सबको चौंकाया

Bengal EVM controversy: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग के बाद EVM से जुड़ी 77 शिकायतों ने सियासी माहौल गरमा दिया है. कई जगहों पर काले टेप लगाए जाने के आरोप लगे हैं. चुनाव आयोग ने 23 मामलों की पुष्टि के बाद अब पुनर्मतदान को लेकर बड़ा फैसला लेने की तैयारी शुरू कर दी है.

West Bengal election 2026
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संजय शर्मा

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West Bengal election 2026: पश्चिम बंगाल में दूसरे फेज का विधानसभा चुनाव की वोटिंग बुधवार को संपन्न हो गई. इसके खत्म होने के साथ ही अब देशभर की नजरें 4 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए चुनावों के नतीजों पर टिकी हैं. दूसरे फेज की वोटिंग के दौरान निर्वाचन आयोग को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर कुल 77 शिकायतें मिली हैं. इनमें EVM पर काले टेप, चिपकने वाला पदार्थ, स्याही और इत्र डालने जैसी शिकायतें शामिल हैं.

इन इलाकों से आई शिकायतें

सूत्रों के मुताबिक, दूसरे फेज में निर्वाचन आयोग को फाल्टा से 32, मगराहाट से 13, डायमंड हार्बर से 29 और बजबज से 3 शिकायतें मिली हैं. आयोग के सूत्रों ने पुष्टि की है कि इनमें से 23 मामलों की पुष्टि हो चुकी है. आयोग के अनुसार, इनमें अकेले फाल्टा से 20 शिकायतें शामिल हैं. अब इन सभी रिपोर्टों और शिकायतों की पुष्टि के बाद गुरुवार को ECI अपनी फुल कमिशन मीटिंग में यह तय करेगा कि किन विधानसभा सीटों या बूथों पर पुनर्मतदान यनी रि-पोलिंग कराया जाएगा.

EVM को लेकर आयोग के सख्त निर्देश

आपको बता दें कि इससे पहले निर्वाचन आयोग ने 21 अप्रैल को बंगाल के पहले फेज और तमिलनाडु में मतदान से पहले सभी बूथों के पीठासीन अधिकारियों के लिए निर्देश जारी किए थे. इसके अनुसार, हर पीठासीन अधिकारी को वोटिंग से पहले और उसके दौरान यह सुनिश्चित करना होगा कि EVM पर सभी उम्मीदवारों के बटन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हों. आयोग के मुताबिक, किसी भी उम्मीदवार के नाम और चुनाव चिह्न वाले हिस्से या बटन को टेप, गोंद, स्याही या किसी अन्य सामग्री से ढका नहीं होना चाहिए.

गोपनीयता से छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

इसके साथ ही वोट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए बैलेट यूनिट के उम्मीदवार बटन पर किसी भी प्रकार का रंग, स्याही, इत्र या अन्य रसायन नहीं लगाया जाना चाहिए, जिससे बाद में यह पता लगाया जा सके कि वोट किसे दिया गया है. आयोग ने साफ कहा था कि अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो पीठासीन अधिकारी तुरंत सेक्टर अधिकारी या रिटर्निंग अधिकारी को इसकी जानकारी देंगे. निर्वाचन आयोग के अनुसार, यह एक गंभीर चुनावी अपराध है और ऐसे मामलों में पुनर्मतदान के आदेश के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है.

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