एशियन गेम्स 2026 में भारत के युवा बॉक्सर अंकुश पंघाल (Ankush Panghal) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया है. अंकुश ने 80 किलोग्राम भार वर्ग में कोरियाई बॉक्सर को एकतरफा मुकाबले में हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है. इस ऐतिहासिक जीत के बाद उनके पैतृक गांव भोरिया (हिसार, हरियाणा) और पूरे परिवार में जश्न का माहौल है.
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कबड्डी छोड़कर चुनी थी बॉक्सिंग, गांव वालों ने उड़ाया था मजाक
अंकुश पंघाल के पिता सुरेश पंघाल खुद स्टेट लेवल के कबड्डी खिलाड़ी रह चुके हैं. शुरुआत में अंकुश भी कबड्डी ही खेलते थे और उन्होंने जिला स्तर पर गोल्ड मेडल भी जीता था. लेकिन पिता की सलाह पर उन्होंने कबड्डी छोड़कर बॉक्सिंग में हाथ आजमाने का फैसला किया. शुरुआती दिनों में जब उन्होंने बॉक्सिंग शुरू की थी, तो गांव के लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया था. हालांकि, अंकुश ने इन बातों की परवाह किए बिना अपनी कड़ी मेहनत जारी रखी.
मां बोलीं- "गांव आने पर देसी घी के मालपुड़े बनाऊंगी"
बेटे की इस बड़ी सफलता पर मां की खुशी का ठिकाना नहीं है. उन्होंने गर्व से कहा कि जब उनका बेटा गांव लौटेगा, तो वे अपने हाथों से उसे देसी घी के गरमा-गरम मालपुड़े खिलाएंगी. मां ने बताया कि अंकुश रोजाना सुबह 4 बजे उठकर दिन में कई-कई घंटे कड़ी ट्रेनिंग करता था और उसने पिछले 9 सालों में इस मुकाम तक पहुंचने के लिए बेहद कड़ा संघर्ष किया है.
करियर का टर्निंग पॉइंट और अब तक का सफर
अंकुश के करियर में साल 2018 का वक्त ऐसा भी आया था जब स्टेट चैंपियनशिप के फाइनल में हार मिलने के बाद उन्होंने बॉक्सिंग छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन पिता के समझाने पर उन्होंने फिर से वापसी की. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा:
एशियन चैंपियनशिप: ब्रॉन्ज मेडल
- वर्ल्ड कप (दिल्ली): सिल्वर मेडल
- कॉमनवेल्थ गेम्स: गोल्ड मेडल
- एशियन गेम्स: गोल्ड मेडल (14वां गोल्ड)
परिवार और कोच प्रदीप सावंत के मार्गदर्शन में अब अंकुश का अगला लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतना है. उनकी इस सफलता से उनके गांव के अन्य युवाओं में भी खेलों के प्रति भारी उत्साह देखने को मिल रहा है.
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