Azmat Ali–Nahida case Updates: कहते हैं न...प्यार की कोई सरहद नहीं होती, लेकिन जब यही सरहदें रिश्तों के बीच दीवार बन जाएं, तो इंसान जीते-जी मर जाता है. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के रहने वाले अजमत अली की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आज सोशल मीडिया और गलियारों में उन्हें 'भारत का गुलाम हैदर' कहा जा रहा है. 30 साल तक जिस छत के नीचे एक परिवार हंसता-खेलता रहा, आज उसी घर में सन्नाटा पसरा है और अजमत अली की आंखों में बस एक ही ख्वाब है...वो है अपने बच्चों से मुलाकात.
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30 साल का सफर और एक 'झूठा' बहाना
अजमत अली ने करीब तीन दशक पहले एक पाकिस्तानी महिला नाहिदा से निकाह किया था. नाहिदा भारत आई, यहां की नागरिकता की प्रक्रिया में शामिल हुई और दोनों ने मिलकर एक खुशहाल दुनिया बसाई. इस शादी से उनके चार बच्चे हुए. दो बेटियां और दो बेटे. अजमत ने दिन-रात मेहनत मजदूरी करके अपने बच्चों को पढ़ाया-लिखा और उन्हें काबिल बनाया. लेकिन साल 2017 में इस खुशहाल परिवार को किसी की नजर लग गई. नाहिदा ने अपनी सगी भांजी की शादी में शामिल होने का बहाना बनाकर पाकिस्तान चली गई. अजमत को अंदाजा भी नहीं था कि यह विदाई नहीं, बल्कि एक गहरा धोखा था.
पाकिस्तान की जेल और 17 महीने का टॉर्चर
नाहिदा जब पाकिस्तान पहुंची, तो उसने अजमत से दूरियां बना लीं. फोन उठाना बंद कर दिया और बच्चों से बात करने पर पाबंदी लगा दी. व्याकुल होकर अजमत वीजा लेकर अपनी पत्नी और बच्चों को वापस लाने पाकिस्तान पहुंचे. लेकिन वहां उनके साथ जो हुआ, वो रूह कंपा देने वाला है. अजमत का आरोप है कि उन्हें वहां के ससुराल वालों ने घर में घुसने तक नहीं दिया. इतना ही नहीं, वीजा नियमों में उलझाकर उन्हें पाकिस्तान की जेल में डाल दिया गया, जहां सजा महज एक महीने की होनी चाहिए थी, वहां अजमत को 17 महीने तक कालकोठरी में सड़ना पड़ा. अंत में उन्हें वहां से डिपोर्ट कर दिया गया.
अब मोमिन मलिक के सहारे न्याय की उम्मीद
भारत लौटने के बाद अजमत ने हार नहीं मानी. उन्होंने मानवाधिकार आयोग से लेकर विदेश मंत्रालय तक के चक्कर लगाए. आखिरकार, उन्होंने पानीपत के मशहूर वकील मोमिन मलिक से संपर्क किया है. गौर करने वाली बात यह है कि मोमिन मलिक वही वकील हैं जो सीमा हैदर के पाकिस्तानी पति गुलाम हैदर की कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. अजमत को उम्मीद है कि जिस तरह गुलाम हैदर अपने बच्चों के लिए लड़ रहा है, वैसे ही मलिक साहब उन्हें भी उनके जिगर के टुकड़ों से मिलवाएंगे.
दोनों सरकारों से भावुक अपील
अजमत अली आज अकेले और बीमार हैं. उनकी मां और भाइयों का भी इंतकाल हो चुका है. वे कहते हैं, "मैं कोई शराबी या जुआरी नहीं हूं, मैंने पूरी ज़िंदगी मेहनत करके बच्चों को पाला. अगर पत्नी वापस नहीं आना चाहती तो न आए, लेकिन मेरे बच्चे मुझे दे दिए जाएं." उन्होंने भारत और पाकिस्तान की सरकारों से अपील की है कि मानवीय आधार पर उनके बच्चों को भारत डिपोर्ट किया जाए ताकि एक पिता अपनी बाकी की जिंदगी अपने बच्चों के साये में काट सके.
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