हरियाणा के कद्दावर भाजपा नेता और पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने साल 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उनकी रोहतक स्थित कोठी पर हुए हमले को लेकर पहली बार खुलकर अपना दर्द साझा किया है. एक पॉडकास्ट के दौरान इमोशनल होते हुए कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि वह केवल एक राजनीतिक हमला नहीं था, बल्कि उनके परिवार को खत्म करने की एक सोची-समझी साजिश थी.
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"चोटी पकड़कर गिराया और बुरी तरह पीटा"- अभिमन्यु
कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि उस दिन उनके घर में पत्नी, भाभी और बच्चे मौजूद थे. उनकी 70 साल की मामी को उपद्रवियों ने चोटी पकड़कर जमीन पर गिरा दिया और उनके साथ मारपीट की. उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "सौभाग्य से मेरी मां एक दिन पहले ही दिल्ली शिफ्ट हुई थीं, वरना वह व्हीलचेयर पर थीं, उनके साथ क्या होता भगवान ही जानता है." उपद्रवियों ने उनकी मां की खाली व्हीलचेयर तक को आग के हवाले कर दिया था.
"कांग्रेस पदाधिकारियों ने सिलेंडर से लगाई आग"
पूर्व मंत्री ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके घर पर हमला करने वाले कोई साधारण प्रदर्शनकारी नहीं थे. सीसीटीवी और मोबाइल लोकेशन के आधार पर उन्होंने दावा किया कि वे कांग्रेस के पदाधिकारी थे जो गाड़ियों में गैस सिलेंडर लेकर आए थे. उन्होंने बताया कि उपद्रवियों ने घर के मंदिर, 100 साल पुरानी 20 हजार बेशकीमती किताबों और उनकी पूरी धरोहर को राख कर दिया.
बेजुबान पशुओं के साथ क्रूरता
घटना की भयावहता बताते हुए उन्होंने कहा कि केवल घर ही नहीं, बल्कि उनके स्कूल में मौजूद 80 बेजुबान पशुओं को भी जिंदा जलाने की कोशिश की गई. बाद में ग्रामीणों ने उनके रस्से काटकर उन्हें बचाया. कैप्टन ने बताया कि 8 घंटे तक उन्हें पता ही नहीं चला कि उनकी पत्नी और बच्चे जिंदा हैं या नहीं, उन्हें पड़ोसियों ने 'ह्यूमन वॉल' बनाकर सुरक्षित निकाला था.
"राजनीति के लिए मुझ पर ही लगाए गए आरोप"
कैप्टन अभिमन्यु ने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जिन्होंने उस समय ट्वीट किया था कि उन्होंने बीमा के पैसे लेने या मुख्यमंत्री बनने के लिए खुद अपने घर में आग लगवाई. उन्होंने कहा, "शुक्र है कि घर का कोई इंश्योरेंस ही नहीं था. जिसकी जैसी सोच थी, उसने वैसी टिप्पणी की."
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