लोकप्रिय यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी हाल ही में एक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए, जहां उन्होंने अपने संबोधन के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले किए. इस दौरान उन्होंने अपने ऊपर लग रहे तमाम आरोपों का खुलकर जवाब दिया और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए.
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ना सरकार बदलने आया हूं, ना किसी से फंडिंग मिली है
बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रम और प्रोटेस्ट के दौरान ध्रुव राठी ने कहा कि लैंड करने के बाद वह सोशल मीडिया पर देख रहे थे कि राइट विंग और बीजेपी समर्थकों द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि वह देश में 'रेजम चेंज' (सरकार बदलने) आए हैं. इस पर सफाई देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा, "न तो मुझे एलन मस्क ने और न ही जॉर्ज सोरोस ने फंड किया है, मैं अपने खुद के पैसों से यहां आया हूँ."
वोटिंग लिस्ट में हेराफेरी के गंभीर आरोप
ध्रुव राठी ने बीजेपी और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लेते हुए वोटिंग लिस्ट से नाम गायब होने और जोड़े जाने को लेकर तीन बड़े उदाहरण सामने रखे:
- पश्चिम बंगाल: चुनाव से ठीक पहले लगभग 70,000 वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए, जो चुनाव में वोट नहीं डाल सके। लेकिन हैरानी की बात यह है कि चुनाव परिणाम आते ही उन सभी को वापस लिस्ट में जोड़ दिया गया.
- बिहार: चुनाव के दौरान करीब 65 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए और चुनाव आयोग (ज्ञानेश कुमार) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही नामों को सार्वजनिक किया.
- उत्तर प्रदेश: कुछ समय पहले यूपी में मिस्टीरियस तरीके से लगभग 14 लाख वोटर्स के नाम अचानक लिस्ट में जोड़ दिए गए, लेकिन किसका नाम जोड़ा गया, इसकी पारदर्शिता नहीं रखी गई.
यह किसी एक पार्टी का नहीं, हर नागरिक का मुद्दा है
उन्होंने बीजेपी मतदाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि चाहे आप किसी भी पार्टी को वोट दें, यह देश के हर नागरिक के अधिकार और लोकतंत्र से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए चुनाव अधिकारियों से इन सवालों के जवाब देने की अपील की. प्रोटेस्ट के अंत में उन्होंने भीड़ के साथ मिलकर 'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारे भी लगाए.
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