"कहां जा रहा है हमारा टैक्स का पैसों?..." गुरुग्राम में जलभराव में फंसी स्कूल बसों तो पेरेंट्स ने खुद संभाला मोर्चा, अब बयां किया दर्द

नीरज वशिष्ठ

26 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 26 2026 1:01 PM)

Gurugram Waterlogging News: गुरुग्राम में मूसलाधार बारिश के बाद भीषण जलभराव में दर्जनों स्कूल बसें 7 से 8 घंटे तक फंसी रहीं. बसों में बंद मासूम बच्चे रोते-बिलखते नजर आए. किसी भी प्रशासनिक मदद के न पहुंचने पर खुद अभिभावकों ने बच्चों को रेस्क्यू किया. डरे-सहमे पेरेंट्स ने अब सरकार से मानसून की छुट्टियां घोषित करने की मांग की है.

गुरुग्राम प्रशासन पर फूटा पेरेंट्स का गुस्सा
गुरुग्राम प्रशासन पर फूटा पेरेंट्स का गुस्सा
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Gurugram Waterlogging School Bus Trapped News: हरियाणा की आर्थिक राजधानी और 'मिलेनियम सिटी' के नाम से मशहूर गुरुग्राम में महज डेढ़ से दो घंटे की मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों और बुनियादी ढांचे की धज्जियां उड़ा दीं. बीते दिनों 90 एमएम से अधिक बारिश के बाद शहर के प्रमुख चौराहे और सड़कें 3 से 4 फीट पानी में डूब गईं.

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इस जलभराव का सबसे भयावह और खौफनाक असर स्कूली बच्चों और उनके चिंतित अभिभावकों पर पड़ा, जब दोपहर में स्कूल से निकले मासूम बच्चे 7 से 8 घंटे तक सड़कों पर खड़ी स्कूल बसों में बंधक बने रहे.

3 किमी की दूरी और 8 घंटे का दर्दनाक इंतजार

सेक्टर 51 (ऑर्केड आइलैंड) के रहने वाले रितेश ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनकी 7 साल की बच्ची सेक्टर 45 स्थित स्कूल से दोपहर 1:30 बजे घर पहुंच जाती थी. लेकिन सुभाष चौक के पास 3 से 4 फीट जलभराव में बस फंसी रही और मासूम बच्ची रात 8 बजे घर पहुंच सकी. उन्हों ने कहा कि "आधे घंटे का सफर तय करने में बच्ची को 7 घंटे लगे. एक 7 साल का मासूम बच्चा जब 7 घंटे तक पानी में फंसी बस में बंद रहे, तो उसके दिमाग में क्या चल रहा होगा? ऑफिस में बैठकर हमारे लिए यह समय बेहद ट्रोमैटाइजिंग था. हम खुद पानी भरा होने के कारण बच्चे तक नहीं पहुंच पा रहे थे."

शीतला माता रोड पर रो पड़ा मासूम, पानी में फंसी रहीं दर्जनों बसें

सोशल मीडिया पर गुरुग्राम के कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. शीतला माता मंदिर रोड से सामने आए एक मार्मिक वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म में एक छोटा सा मासूम छात्र डर के मारे बुरी तरह रोता-बिलखता नजर आ रहा है, क्योंकि उसकी वैन/बस गहरे पानी में खराब हो गई थी.

इसी तरह सुभाष चौक, राजीव चौक और हीरो होंडा चौक पर अलग-अलग बड़े स्कूलों की दर्जनों बसें 3 से 4 फीट पानी में फंसी रहीं. जो दूरी अमूमन 10 से 15 मिनट में तय होती है, उसे तय करने में बच्चों को 7 से 8 घंटे का समय लग गया.

ना पुलिस आई ना रेस्क्यू टीम: पेरेंट्स ने खुद संभाला मोर्चा

पेरेंट्स का सबसे बड़ा आक्रोश इस बात को लेकर है कि जब मासूम बच्चे बसों में 8 घंटे तक पानी के बीच फंसे रहे, तो जिला प्रशासन, पुलिस या आपदा प्रबंधन (SDRF) का कोई भी नुमाइंदा उनकी मदद को नहीं पहुंचा.

  • स्कूल शिक्षकों ने दिया सहारा: बसों में फंसे शिक्षकों ने बच्चों को बिस्किट व पानी देकर शांत रखने की कोशिश की.
  • अभिभावकों ने खुद निकाला: जब घंटों तक कोई मदद नहीं पहुंची, तो कई इलाकों में अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने खुद अपनी जान जोखिम में डालकर जलभराव के बीच पहुंचकर बच्चों को बसों से बाहर निकाला.

"सरकार से उम्मीद खत्म, अब घोषित हों मानसून की छुट्टियां" पेरेंट्स 

प्रशासनिक नाकामी से आहत और डरे-सहमे पेरेंट्स ने अब सरकार और शिक्षा विभाग से 'मानसून की छुट्टियां' घोषित करने की मांग शुरू कर दी है. अभिभावकों का कहना है कि:

  • हर बार ऑनलाइन क्लास समाधान नहीं: बारिश होते ही अगले दिन ऑनलाइन क्लास शुरू कर देना या ऑफिस बंद कर देना पक्के समाधान का विकल्प नहीं हो सकता.
  • टैक्स के पैसों का हिसाब दो: करोड़ों रुपये के फ्लैट्स वाले इस शहर में भारी-भरकम टैक्स देने के बाद भी अगर 1 घंटे की बारिश में बच्चे 8 घंटे फंसे रहें, तो यह सरकारी नाकामी है.
  • जनप्रतिनिधि नदारद: संकट के समय शहर के चुने हुए नुमाइंदे, सांसद, विधायक या मंत्री धरातल पर नजर नहीं आते.

2016 के महाजाम के बाद से ड्रेनेज सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर पर 1000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है. बेबस पेरेंट्स का कहना है कि जब तक शहर का ड्रेनेज सिस्टम ठीक नहीं होता, तब तक बच्चों की जान जोखिम में डालने के बजाय स्कूलों में मानसून की छुट्टियां घोषित की जानी चाहिए.

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