हरियाणा के हिसार से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने एक बार फिर शुद्ध खान-पान को लंबे और स्वस्थ्य जीवन का राज बताने वाली चर्चा छेड़ दी है. इस चर्चा के केंद्र में हैं 100 साल की दादी और उनका 100वां बर्थडे सेलिब्रेशन. दादी न तो ह्वील चेयर पर हैं और न ही उन्होंने छड़ी या बैशाखी का सहारा लिया है, बल्कि वो अपने पांवों पर पूरे भरोसे के साथ खड़ी हैं और म्यूजिक की हाई बीट्स डांस भी कर रही हैं. ये नजारा देख हर किसी की जुबान पर बस एक ही शब्द है- वाह दादी...आप जियो हजारो साल.
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100वां जन्मदिन मनाने वाली मीरा देवी का भरा-पूरा परिवार है. 6 बेटे और 3 बेटियां, नाती-पोतों से पूरा घर भरा है. पति बिहारी लाल शर्मा अंग्रेजों की सेना में रहे. वे सेना में कुक थे. बाद में आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 'आजाद हिंद फोज' में शामिल हो गए. देश को आजादी मिली और बिहारी लाल शर्मा में आजाद देश में जीने का सुकूंन. बिना पेंशन वे घर वापस आ गए. साल 1998 में उनका निधन हो गया.
6 बेटे-6 बेटियां, 16 पोते-दोहती, 5 पड़पोतों से भरा है परिवार
इससे पहले कि मीरा देवी की लंबी उम्र और हेल्दी लाइफ का राज बताया जाए...इससे पहले आप उनकी पूरी कहानी जान लीजिए. हिसार के आदमपुर के दडौली गांव की रहने वाली मीरा देवी का जन्म सिरसा के ढूमडा गांव में साल 1926 में हुआ था. उनका विवाह बिहारी लाल शर्मा के साथ हुआ. मीरा देवी ने 6 बेटो और 6 बेटियों को जन्म दिया. परिवार में 16 पोता-पोती और दोहते दोहते के अलावा पांच पडपोते हैं.
सबसे बडे बेटे सज्जन कुमार (77) साल के हैं. फिर राजेद्र (71) वर्ष, महेंद्र (61) शंकर लाल (60) प्रदीप कुमार 56() संदीप (53) हैं. बहन सुमित्रा देवी का देहांत हो चुका है. ओम देवी (56) वर्ष कृष्णा देवी (55) वर्ष आयु है. तीनों बहनों की शादी राजस्थान के जोनाइता कला में हुई है. सज्जन राजेंद्र खेती का काम करते है और शंकर लाल सेवानिवृत अध्यापक हैं. महेंद्र लैकचरार के पद हैं.
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मीरा देवी के 'लंबी उम्र-स्वस्थ्य जीवन' का राज क्या है?
मीरा देवी के बेटे शंकर लाल ने बताया कि उनकी माता के 100 वां जन्मदिन बडे धूमधाम से मनाया गया है. माता के 100वें जन्म दिन पर परिवार के लोग इकट्ठा हुए और एक हजार लोगों को भोज दिया. इस मौके पर सरपंच मनोज कुमार, पूर्व सरपंच राजबीर हुड्डा, पूर्व चेयरमैन सतबीर मौजूद थे. शंकर लाल ने बताया कि मां का सरल स्वभाव और एक दूसरे को जोड़कर रखने की कोशिश से ही हम सब एक दूसरे के साथ एक धागा में मनके की तरह जुड़े हुए हैं. वे धार्मिक विचारों वाली हैं...हनुमान जी और खाटू्श्याम की भक्त हैं.
खेती और पशुपालन से जुड़ी रहीं
मीरा देव हमेशा खेती और पशुपालन के कामों से जुड़ी रही. हमेशा काम करने के कारण उनका स्वास्थ्य अच्छा रहा. उम्र होने पर दांत गिर गए, लेकन किसी गंभीर रोग का शिकार नहीं हुईं. खांसी-जुकाम भी कभी-कभार ही होता है. बड़े बेटे ने बताया कि उनकी मां ने हमेशा सादा और घर का पका खाना खाया है. बाहर के भुने भोजन से दूर रहीं. दूध, लस्सी, दही और हरी सब्जियों का सेवन करती रही हैं. वो 100 साल की उम्र में भी सुन और बोल सकती हैं. अभी भी वे चुप नहीं बैठती हैं. चलती-फिरती रहती हैं. इनकी एक आंख पहले से ही खराब थी पर दूसरी आंख से आज भी सबकुछ दिखा है. कभी-कभार ब्लड प्रेशर बढ़ जाता हैऔर उन्हें बीपी की दवा लेनी पड़ती है.
इनपुट- प्रवीण
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