Haryana Unique Marriage HIV Test Before Wedding: हरियाणा के चरखी दादरी जिले में हुई एक शादी ने आधुनिक समाज के सामने सादगी और जागरूकता की एक नई मिसाल पेश की है. आज के इस दौर में जहां शादियां सिर्फ दिखावे, भारी-भरकम खर्च और लाखों-करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाने का माध्यम बनती जा रही हैं. वहीं चरखी दादरी के एक जोड़े ने समाज को एक बड़ा आईना दिखाने का काम किया है. इस विवाह की सबसे हैरान और खास बात यह रही कि शादी के बंधन में बंधने से ठीक पहले लड़का और लड़की दोनों ने बाकायदा अपना एचआईवी (HIV) टेस्ट और तमाम जरूरी ब्लड टेस्ट करवाए. उन्होंने अपनी मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया और जब दोनों की रिपोर्ट पूरी तरह से नेगेटिव और सही आई, उसके बाद ही उन्होंने एक-दूसरे का हाथ थामने का फैसला किया.
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स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अनोखा संदेश
पवित्र बंधन में बंधने वाले इस नवदंपत्ति का नाम मनिंदर दहिया और मोनिका तंवर है. ये दोनों ही पेशे से चाइल्ड काउंसलर हैं. शादी से पहले एचआईवी टेस्ट और ब्लड चेकअप कराने के पीछे उनकी दलील यह है कि समाज के हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह जागरूक होना चाहिए. वे इस अनोखी पहल के जरिए समाज को यह बड़ा संदेश देना चाहते हैं कि यदि आप भी अपनी शादी कर रहे हैं, तो लोक-लाज या झिझक को छोड़कर विवाह से पहले मेडिकल चेकअप जरूर कराएं. इससे मेडिकल रिपोर्ट में सब कुछ साफ हो जाता है और आप पूरे आत्मविश्वास के साथ एक सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकते हैं. मोनिका का कहना है कि एचआईवी जैसे गंभीर विषयों पर आज भी समाज में खुलकर बात नहीं की जाती, जबकि सही जागरूकता ही इससे सबसे बड़ा बचाव है.
ना मंत्रोच्चारण ना कोई पंडित ऐसे रचाई शादी
यह विवाह केवल मेडिकल टेस्ट की वजह से ही खास नहीं रहा, बल्कि इसके संपन्न होने का तरीका भी एकदम जुदा था. इस शादी में किसी पंडित को नहीं बुलाया गया और न ही अग्नि के चारों तरफ सात फेरे लिए गए. यहाँ तक कि विवाह के दौरान कोई मंत्रोच्चारण भी नहीं हुआ. यह पूरी शादी हमारे संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर और प्रतिमा के सामने पांच विशेष प्रतिज्ञाएं लेकर संपन्न हुई. वर-वधू ने एक-दूसरे को वरमाला जरूर पहनाई, लेकिन पारंपरिक रीति-रिवाजों के आडंबरों से दूरी बनाए रखी. मनिंदर ने बताया कि उन्होंने सात फेरों के बदले बाबा साहब के सामने पांच प्रतिज्ञाएं लीं, जिनमें एक-दूसरे का हमेशा सम्मान करना, समाज से भ्रूण हत्या को मिटाना और अपने स्वास्थ्य की निरंतर जांच कराते रहना शामिल है.
ना बैंड-बाजा, ना डीजे और दहेज से पूरी तरह परहेज
इस शादी की एक और बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें न तो कोई डीजे था, न बैंड-बाजा था और न ही कोई दिखावा था. दूल्हा मनिंदर दहिया ने इस विवाह में लड़की पक्ष से किसी भी प्रकार का दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे जीवन में कभी भी दहेज का न तो लेन-देन करेंगे और न ही इसका समर्थन करेंगे. शादी में सैकड़ों या हजारों मेहमानों की भीड़ जुटाकर भारी-भरकम भोज की व्यवस्था भी नहीं की गई थी. दोनों पक्षों के परिवार के गिने-चुने सदस्यों को ही आमंत्रित किया गया था और बेहद साधारण तरीके से सारे कार्यक्रम निपटाए गए. जोड़े ने कहा कि वे समाज में चली आ रही दहेज जैसी कुरीतियों के खिलाफ हैं क्योंकि यह लड़की के परिवार पर एक मानसिक और आर्थिक दबाव पैदा करता है.
गुलाब के बजाय हाथ में थामी ज्ञान की कलम
जब नवदंपत्ति से इस क्रांतिकारी और लीक से हटकर उठाए गए कदम की प्रेरणा के बारे में पूछा गया, तो मनिंदर ने बताया कि उन्हें इसकी सीख अपने पिता मास्टर कृष्ण कुमार दहिया और क्षेत्र के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता भाई संजय रामफल से मिली है. सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ने ही उन्हें प्रेरित किया था कि वे पारंपरिक शादियों के भारी-भरकम और अनावश्यक खर्चों से बचें. मनिंदर ने बताया कि संजय भाई ने उनसे कहा था कि अपनी जीवनसंगिनी को प्रपोज भी ऐसे करो कि हाथ में गुलाब का फूल नहीं बल्कि ज्ञान की 'कलम' हो. इसी सीख से प्रभावित होकर दोनों ने शादी को केवल एक सामाजिक रस्म न मानकर, इसे आपसी विश्वास और जिम्मेदारी का रिश्ता माना और सादगी को तरजीह दी.
शादी पर दूल्हा-दुल्हन ने लिया ये संकल्प
दूल्हा-दुल्हन केवल स्वास्थ्य और सामाजिक कुरीतियों को लेकर ही सजग नहीं थे, बल्कि उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी समाज को जागरूक करने का प्रयास किया. दुल्हन मोनिका तंवर ने अपने संदेश में कहा कि आजकल जिस तरह से देश में भीषण गर्मी पड़ रही है और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, उसे देखते हुए उन्होंने अपनी शादी में ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाने का भी विशेष संकल्प लिया है. मनिंदर के पिता मास्टर कृष्ण दहिया ने भी बच्चों की इस अनोखी पहल की जमकर सराहना की और कहा कि विवाह से पहले स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर उठाई गई यह आवाज समाज में एक बेहद सकारात्मक बदलाव लाएगी. उन्होंने देश के अन्य युवाओं से भी अपील की कि वे शादियों में दिखावेबाजी और हवाबाजी के चक्कर को छोड़ें और इसी तरह साधारण व संदेशपरक विवाह करें.
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