हरियाणा में 3 दिन बिजली संकट का खतरा, 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल करेंगे कर्मचारी

नीरज वशिष्ठ

• 11:25 AM • 21 Oct 2026

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिन की पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया है. HERC ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का जिम्मा इलेवन पावर को 25 साल के लाइसेंस पर सौंपा है. कर्मचारियों ने फैसले के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की है.

Haryana electricity strike
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हरियाणा में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में बिजली संकट गहरा सकता है. बिजली कर्मचारियों ने 22 से 24 अक्टूबर तक लगातार तीन दिन की पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया है. हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) के एक फैसले के विरोध में कर्मचारियों ने यह कदम उठाया है. आयोग ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण का जिम्मा निजी कंपनी इलेवन पावर को 25 साल के समानांतर लाइसेंस पर सौंपने का फैसला किया है.

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बिजली निगम कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चे ने इस फैसले को जन-विरोधी और कर्मचारी-विरोधी बताया है. कर्मचारियों का कहना है कि इससे सरकारी बिजली निगम और आम उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा.

22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल का ऐलान

बिजली कर्मचारियों ने आयोग के फैसले के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है. इसके तहत 21 अक्टूबर को आदेश की प्रतियां जलाने का कार्यक्रम रखा गया है. इसके बाद 22, 23 और 24 अक्टूबर को कर्मचारी पूर्ण हड़ताल पर रहेंगे.

इंजीनियर एसोसिएशन के महासचिव रविंद्र घणघस के मुताबिक, 19 अक्टूबर को हुई आपात बैठक में आंदोलन की रणनीति तैयार की गई थी. हड़ताल के तीसरे दिन यानी 24 अक्टूबर को आंदोलन के अगले चरण की घोषणा भी की जाएगी.

निजीकरण के फैसले पर कर्मचारियों ने उठाए सवाल

संयुक्त मोर्चे का आरोप है कि गुरुग्राम और नूंह जैसे ज्यादा राजस्व देने वाले क्षेत्रों को निजी कंपनी को सौंपने से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) को नुकसान हो सकता है. कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी पैसे से तैयार बिजली के बुनियादी ढांचे का फायदा निजी कंपनी को मिलेगा. कर्मचारियों ने इस फैसले को बिजली व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया है. उनका मानना है कि इससे सरकारी बिजली निगम की स्थिति कमजोर हो सकती है.

40 हजार कर्मचारियों के भविष्य पर चिंता

बिजली कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चे ने चेतावनी दी है कि इस फैसले का असर करीब 40,000 नियमित, अस्थायी और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के साथ इंजीनियरों पर भी पड़ सकता है. कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण से उनकी नौकरी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ेगी.

उपभोक्ताओं और किसानों पर भी पड़ सकता है असर

कर्मचारियों का दावा है कि निजी कंपनी मुनाफे वाले क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दे सकती है. वहीं, ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में बिजली वितरण का आर्थिक बोझ सरकारी निगमों पर रह सकता है. संयुक्त मोर्चे ने आशंका जताई है कि निजीकरण की नीति से आम उपभोक्ताओं, किसानों और छोटे दुकानदारों पर महंगी बिजली का बोझ बढ़ सकता है. 22 से 24 अक्टूबर तक प्रस्तावित पूर्ण हड़ताल के चलते राज्य की बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है. ऐसे में आने वाले दिनों में बिजली कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं.

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