हरियाणा में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए होने वाली जंग एक बार फिर 'रिजॉर्ट पॉलिटिक्स' और 'सियासी ड्रामे' की ओर मुड़ गई है. 16 मार्च 2026 को होने वाली वोटिंग से पहले कांग्रेस को अपने ही कुनबे में वैसी ही सेंधमारी का डर है जैसी उसने 2016 और 2022 में झेली थी.
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हरियाणा की सियासत में जब भी राज्यसभा के चुनाव आते हैं, कांग्रेस की धड़कनें बढ़ जाती हैं. वजह है- बीते चुनावों का वो 'कड़वा इतिहास' जिसने जीत को हार में बदल दिया था. एक बार फिर 2 सीटों के लिए 3 उम्मीदवार मैदान में हैं और कांग्रेस अपने 37 विधायकों को बचाने के लिए उन्हें हिमाचल प्रदेश के किसी सुरक्षित रिजॉर्ट में शिफ्ट करने की तैयारी कर चुकी है. क्या कांग्रेस इस बार अपना किला बचा पाएगी या इतिहास खुद को दोहराएगा?
कांग्रेस और बीजेपी के बीच कूदे निर्दलीय नांदल
अब जो चुनाव हो रहा है उसमें बीजेपी के संजय भाटिया, कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध के खेल में कूद गए बीजेपी समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल. बीजेपी को दोनों राज्यसभा सीटें जीतने के लिए 62 विधायक का वोट चाहिए, लेकिन पार्टी के पास 48 विधायक ही हैं. 48 विधायकों की बदौलत संजय भाटिया की जीत पक्की है. 17 वोट एक्स्ट्रा ही रहेंगे. एक सीट जीतने के बाद बीजेपी के पास 17 वोट बच रहे हैं. दूसरी सीट जीतने के लिए और 14 वोटों की अतिरिक्त जरूरत है. इनेलो के दो विधायक और तीन निर्दलीय काम आ सकते हैं. फिर भी बात नहीं बनेगी. 9 विधायकों के वोट का जुगाड़ करना ही होगा. असली बात तब बनेगी जब कांग्रेस के विधायक अपनी पार्टी से गद्दारी करके बीजेपी की मदद करेंगे.
कर्मवीर बौद्ध जोखिम में हैं. कांग्रेस के 37 वोटों से कर्मवीर जीत तो जाएंगे, लेकिन सतीश नांदल की एंट्री का इशारा माना जा रहा है कि कांग्रेस के विधायक तोड़ने के लिए आए हैं. कांग्रेस के विधायकों की क्रॉस वोटिंग हुई तो कर्मवीर बौद्ध की जीत मुश्किल और सतीश नांदल की जीत आसान हो सकती है. हालांकि सतीश नांदल के पास जीतने लायक वोट हैं नहीं.
हुड्डा की बैठक में नहीं पहुंची विनेश फोगाट
हड़कंप तब मचा जब हुड्डा की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई जिसमें 5 विधायक नहीं आए. सबसे बड़ा नाम जुलाना से कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट का निकला जो बैठक में नहीं आईं. बादली के विधायक कुलदीप वत्स, ऐलनाबाद के विधायक भरत सिंह बेनीवाल, कैथल के विधायक आदित्य सुरजेवाला और पंचकूला के विधायक चंद्र मोहन बिश्नोई ने भी बैठक से गायब रहकर हंगामा मचा दिया. आदित्य सुरजेवाला तो कांग्रेस हाईकमान के करीबी रणदीप सुरजेवाला के बेटे हैं. फिर भी शक में घेरे में है.
कांग्रेस के लिए ओपन बैलेट का खतरा है. राज्यसभा में व्हिप लागू नहीं होता, इसलिए विधायकों के टूटने या क्रॉस वोटिंग से भी सदस्यता नहीं जाती. कुछ विधायकों के बीजेपी से मेलजोल से भी डर बढ़ा है. हाल की बैठकों में 5 विधायकों के नहीं पहुंचने से धड़कनें टाइट है. हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने भी चंडीगढ़ में डेरा जमा रखा है. आरके आनंद, अजय माकन के बाद कर्मवीर बौद्ध को जिताने की जिम्मेदारी फिर भूपिंदर सिंह हुड्डा पर है, लेकिन दो मैच हार चुके हैं. इस बार भी हारे तो हैट्रिक लगेगी. वैसे भी हरियाणा विधानसभा का चुनाव कांग्रेस जीतते-जीतते हारी जिसका सदमा आज तक खत्म नहीं हुआ है.
कांग्रेस की घबराहट के पीछे 2 बड़े सबक
कांग्रेस की मौजूदा घबराहट के पीछे दो बड़े सबक हैं. 2016 की 'इंक कॉन्ट्रोवर्सी' यानी स्याही कांड. कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार आर.के. आनंद की जीत लगभग तय थी. ट्विस्ट तब आया जब वोटिंग के दौरान गलत पेन का इस्तेमाल हुआ और कांग्रेस के 12 विधायकों के वोट रद्द कर दिए गए. पेन गेम की वजह से बीजेपी समर्थित सुभाष चंद्रा चुनाव जीत गए और कांग्रेस देखती रह गई.
बीजेपी के अलग गेम प्लान से 2022 में अजय माकन वाला झटका लगा. अजय माकन को जिताने के लिए कांग्रेस के पास अपने 31 विधायकों का सेफ नंबर था. कांग्रेस ने विधायकों को छत्तीसगढ़ के रिजॉर्ट में रखा था. फिर भी कुलदीप बिश्नोई ने 'क्रॉस वोटिंग' कर दी और किरण चौधरी का एक वोट 'कैंसिल' हो गया. नतीजा ये हुआ कि अजय माकन मात्र 0.66 वोट के अंतर से निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा से हार गए.
इतिहास गवाह है कि हरियाणा में आंकड़े सिर्फ कागजों पर होते हैं, असली खेल तो वोटिंग की स्याही और रिसॉर्ट की दीवारों के पीछे होता है. क्या इस बार 'हाथ' सुरक्षित रहेगा?
आंकड़ों में समझिए पूरी गणित
| उम्मीदवार | पार्टी | नंबर | स्थिति |
| संजय भाटिया | बीजेपी | 48 | सेफ |
| कर्मवीर बौद्ध | कांग्रेस | 37 | डेंजर जोन |
| सतीश नांदल | निर्दलीय | 5+ | बीजेपी का समर्थन |
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