करनाल: हरियाणा राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस के भीतर घमासान मच गया है. चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग और वोटों के रद्द होने के मुद्दे पर कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व विधायक शमशेर सिंह गोगी ने अपनी ही पार्टी के आलाकमान और नेतृत्व पर तीखे सवाल खड़े किए हैं.
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पार्टी में 'कंफ्यूजन' और अपनों को बचाने का खेल?
शमशेर गोगी ने पार्टी प्रभारी और हाईकमान की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्रॉस वोटिंग के मामले में पहले पांच में से चार विधायकों का नाम लिया गया और बाद में पांचवें का नाम सामने आया. उन्होंने आरोप लगाया कि पर्दे के पीछे कुछ ऐसा है जिसे छिपाया जा रहा है. गोगी ने कहा, "किसी एक व्यक्ति को बचाने के लिए पार्टी के हितों को दांव पर नहीं लगाना चाहिए."
28 ईमानदार विधायकों को मिले 'क्लीन चिट'
गोगी ने मांग की है कि जिन विधायकों के वोट रद्द हुए हैं या जिन्होंने क्रॉस वोटिंग की है, उनके नाम सार्वजनिक होने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है, तो जनता सभी 31 विधायकों पर शक करेगी. गोगी के अनुसार, "उन 28 विधायकों को राहत मिलनी चाहिए जिन्होंने ईमानदारी से वोट दिया है, और गड़बड़ी करने वाले नौ लोगों के नाम सामने आने चाहिए."
"गद्दारों को मिल रही है शह"
पूर्व विधायक ने पार्टी की हार और गुटबाजी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पार्टी ने पिछले चुनावों से कोई सबक नहीं लिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी का विरोध किया, उन्हें ही टिकटें और संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां दी जा रही हैं. गोगी ने कहा कि जब तक गद्दारों को बड़े नेताओं का संरक्षण मिलता रहेगा, पार्टी मजबूत नहीं हो पाएगी.
ट्रेनिंग के बावजूद 25% विधायकों का 'दगा'
गोगी ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि विधायकों को ट्रेनिंग देने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर वोट रद्द हुए और क्रॉस वोटिंग हुई. उन्होंने कहा कि जनता के बीच यह संदेश गया है कि कांग्रेस के 25% विधायकों ने पार्टी के साथ दगा किया है, जिसे छिपाने से पार्टी का और अधिक नुकसान होगा.
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