लोग कहते हैं कि अच्छे से पढ़ो-लिखो और फिर विदेश जाकर पैसे कमाओ, जिससे की जिंदगी अच्छी कटेगी. लेकिन हरियाणा के अंबाला के साहा में रहने वाले रवींद्र सिंह उर्फ बिल्लू ने इस सोच को ही पलट दिया है. इसके पीछे की वजह है उनकी मुर्रा भैंस जिसे वह प्यार से सुंदरा कहते है. बिल्लू के लिए सुंदरा किसी लॉटरी से कम नहीं है क्योंकि उसने पिछले 1 साल में तीन प्राइज जीत लिए है. सुंदरा ने हाल में ही 29.650 किलो दूध देकर कुरुक्षेत्र की एक प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया और इनाम के तौर पर बिल्लू को एक नई-नवेली बुलेट मोटरसाइकिल मिली है. आइए विस्तार से जानते हैं बिल्लू और सुंदरा की कहानी और बिल्लू क्यों नहीं चाहते है कि उनके बच्चे विदेश में जाकर पढ़ाई करें?
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बिल्लू ने डेयरी फर्म से बनाया अपना नाम
अंबाला के साहा कस्बे के रहने वाले रवींद्र सिंह उर्फ बिल्लू की मानिए किस्मत ही पलट गई हो. बिल्लू भले ही कम पढ़े-लिखें हो, लेकिन उनके पशुओं के साथ लगाव ने उन्हें लगातार नए-नए मुकाम दिए है. बिल्लू को बचपन से ही पशुओं का शौक रहा और उनका फैमिली बिजनेस भी यही रहा है. उन्होंने अपने डेयरी फार्म पर काम कर अपनी पहचान काफी दूर तक बना ली है.
बिल्लू की भैंस का कमाल
बिल्लू ने लगभग एक साल पहले पवित्र सरदार से वर्ल्ड की सबसे महंगी भैंस मुर्रा 51 लाख 30 हजार में खरीदी थी. भैंस खरीदने के बाद से ही वे उसे मेलों और प्रतियोगिता में ले जाने लगा. इसी बीच कुरुक्षेत्र में DFA(डेयरी फार्म एसोसिएशन) हरियाणा की ओर से एक तीन दिवसीय पशु मेला का आयोजन किया गया जो कि रविवार को खत्म हुआ. इस मेले में हरियाणा के अलावा पंजाब राजस्थान, उत्तर प्रदेश समेत कईं अन्य राज्यों से किसान अपने पशुओं के साथ पहुंचे थे. लेकिन इस मेले का शान बिल्लू की सुंदरा बनी. बिल्लू की भैंस सुंदरा ने 29.650 किलो ग्राम दूध देकर पहला इनाम जीता, जिसमें उन्हें बुलेट दिया गया.
सुंदरा ने जीता अपना तीसरा इनाम
बिल्लू भले ही कम पढ़ें-लिखें हो लेकिन उन्हें पशुओं के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. हमारी टीम के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि, पहले हमारे पिता जी अपने हिसाब से पशु रखते थे, लेकिन उन्हें ब्रीड के बारे में कुछ पता नहीं था. जबकि पशुओं में ब्रीड सबसे ज्यादा जरूरी बात होती है क्योंकि अगर हमारे पास अच्छे पशु है तो हम मेले में प्रतियोगिता लड़ सकते है. बिल्लू ने आगे बताया कि, इससे पहले दिसंबर 2025 में हमने दो प्रतियोगिता जीती. इनमें एक में इनाम के तौर पर ट्रैक्टर मिला और एक बार 2 लाख रुपए कैश जीते. बुलेट बाइक सुंदरा की तीसरी गिफ्ट है.
बिल्लू बच्चों को क्यों नहीं भेजना चाहते विदेश?
बिल्लू ने कहा कि लोग अपने बच्चों को विदेश भेजते है और मुझे भी कहते है. लेकिन मैंने अपने बच्चों को इसी व्यवसाय में लगाया है और मैं उन्हें कभी विदेश नहीं भेजूंगा. बिल्लू का कहना है कि, ये धंधा बहुत अच्छा है और इससे लोगों को दूध भी मिलेगा और हमारी इनकम भी अच्छी होगी. इसलिए मेरे बच्चों को विदेश जाने की कोई जरूरत नहीं है.
पशुपालकों के बीच मिसाल बनी 'सुंदरा'
बिल्लू ने अपनी इस खास भैंस का नाम 'सुंदरा' रखा है, जो अब पूरे इलाके में मशहूर हो चुकी है. बिल्लू का कहना है कि सुंदरा ने हमेशा उनकी इज्जत रखी है. गाय, भैंस और बकरी पालने के अपने इस शौक को उन्होंने अब एक सफल प्रोफेशन बना लिया है, जिससे उन्हें आगे बढ़ने की लगातार प्रेरणा मिल रही है.
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