Indian Shooter Neeru Dhanda News: निशानेबाजी में देश का नाम रोशन करने वाली नीरू ढांडा (Neeru Dhanda) की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके परिवार और पूरे गांव में जश्न का माहौल है. बेहद सादे और गरीब परिवार से आने वाली नीरू ढांडा ने अपनी लगन और कड़ी मेहनत के दम पर स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम किया है. हरियाणा तक से बातचीत में नीरू की मां सुदेश देवी और उनके पिता ने बेटी की इस शानदार सफलता और उसके पीछे छिपे संघर्ष की भावुक कहानी साझा की.
ADVERTISEMENT
गेहूं का कोटा लेने जा रही थीं मां, तभी मिला समाचार
नीरू की मां सुदेश देवी ने बताया कि जिस वक्त उनकी बेटी ने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता, उस समय वह गरीबी रेखा (BPL) के तहत राशन का गेहूं (कोटा) लेने जा रही थीं. उसी दौरान चंडीगढ़ से एक पत्रकार का फोन आया और उन्होंने बेटी के गोल्ड मेडल जीतने की खुशखबरी दी. मां ने बताया कि एक दिन पहले ही बेटी से वीडियो कॉल पर बात हुई थी और नीरू के सिर में दर्द था, जिसके लिए उन्होंने फोन पर ही बेटी का ढांढस बंधाया था और अगले दिन मैच के लिए शुभकामनाएं दी थीं.
उधार की बंदूक और फार्म की दीवारों पर साधा निशाना
नीरू ढांडा का यहां तक पहुंचने का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है. परिवार के पास मात्र 3 किल्ले जमीन है और वे खेती-बाड़ी कर बेहद सीमित संसाधनों में जीवन यापन करते हैं. नीरू के पास शुरुआत में शूटिंग के लिए अपनी बंदूक तक नहीं थी और उन्होंने दूसरों से बंदूक उधार लेकर प्रैक्टिस शुरू की थी. शुरुआती दौर में शूटिंग रेंज की उचित व्यवस्था न होने पर उन्होंने फार्म और खुली जगह में दीवारों पर निशाना साधकर अभ्यास किया. इसके बाद SAI (Sports Authority of India) के ट्रायल में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर सिलेक्शन हासिल किया और पीछे मुड़कर नहीं देखा.
परिवार और पूरे गांव में खुशी की लहर
बेटी की इस उपलब्धि पर नीरू के पिता और मां का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी पर बेहद गर्व है और पूरे गांव में खुशी का माहौल है. सरकार से किसी मदद या मांग के सवाल पर परिजनों ने सादगी से कहा कि वे अनपढ़ लोग हैं और उन्हें सरकार से कुछ मांगने की जरूरत नहीं है. बच्चे की मेहनत और काबिलियत को देखते हुए सरकार जो भी फैसला करेगी, वह उन्हें पूरी तरह से मंजूर है.
ADVERTISEMENT


