कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया और देश में हाल में हुए चुनावों की निष्पक्षता को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. हरियाणा तक की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और उन पर शीर्ष नेतृत्व का दबाव है.
ADVERTISEMENT
ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और 'डिसेंट नोट' का जिक्र
राहुल गांधी ने बताया कि जब चुनाव आयुक्त का चयन किया जा रहा था, तब उन्होंने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक असहमति पत्र (Dissent Note) सौंपा था. राहुल गांधी के अनुसार, उन्होंने अपने नोट में स्पष्ट लिखा था कि चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्था में चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन कार्यकारी हस्तक्षेप (Executive Interference) से पूरी तरह मुक्त होना चाहिए. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उनकी राय और प्रक्रिया की तटस्थता को दरकिनार करते हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह ने ज्ञानेश कुमार को चुना, क्योंकि वह स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहे हैं और उन पर कंट्रोलर्स का दबाव है.
वोट चोरी और 'वोट अधिकार यात्रा' का मुद्दा
विपक्ष के नेता ने महाराष्ट्र और हरियाणा में हुए चुनावों के संदर्भ में 'वोट चोरी' के गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि माधोपुरा और आलंद में वोट चोरी से जुड़े प्रेजेंटेशन और 15 दिनों की 'वोट अधिकार यात्रा' के जरिए यह दिखाया गया कि किस तरह से एक केंद्रीकृत (Centralized) तरीके से चुनावी प्रक्रियाओं में हेरफेर किया गया.
राहुल गांधी ने दावा किया कि जब तक ये प्रस्तुतियां और प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई थीं, तब तक चुनाव आयोग के अधिकारियों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी. लेकिन जब वोट चोरी के सबूत सामने आने लगे, तो चुनाव आयोग के अंदर से भी चिट्ठियां लिखे जाने का दौर शुरू हो गया.
2024 के चुनाव और संस्थागत ढांचा प्रभावित
अपने वक्तव्य में राहुल गांधी ने कहा कि आने वाले समय में देश के सामने यह बात और स्पष्ट हो जाएगी कि चुनाव निष्पक्ष नहीं थे. उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद देश में कभी भी संवैधानिक, कानूनी और संस्थागत ढांचा (Institutional Structure) इस तरह से नहीं टूटा था. राहुल गांधी के अनुसार, यदि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता ही खत्म हो जाती है, तो उसके आधार पर बने कानून और संस्थाओं की वैधता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा होता है.
ये भी पढ़ें: 'राहुल गांधी की बातें बच्चों जैसी, निकाय चुनाव ने दिखा दिया जनता किसके साथ', बालमुकुंद आचार्य का तीखा हमला
ADVERTISEMENT


