ना नाम था, ना बोलने की उम्मीद...' अपने ही गढ़ में अनदेखी पर भड़के केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह

न्यूज तक डेस्क

• 05:08 PM • 14 Aug 2026

गुरुग्राम में आयोजित बीजेपी के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने मंच पर ही आयोजकों द्वारा प्रोटोकॉल की अनदेखी और क्षेत्र के सांसद के तौर पर अपनी उपेक्षा करने पर जमकर अपनी नाराजगी जाहिर की.

राव इंद्रजीत सिंह
राव इंद्रजीत सिंह
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गुरुग्राम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद राव इंद्रजीत सिंह का गुस्सा मंच पर ही फूट पड़ा. राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ पार्टी नेताओं की मौजूदगी में राव इंद्रजीत ने आयोजकों द्वारा प्रोटोकॉल की अनदेखी, क्षेत्र के सांसद को दरकिनार करने और भाषणों के क्रम को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की. उनके इस तीखे तेवर से कार्यक्रम स्थल पर सन्नाटा पसर गया और यह पूरा वाक्या चर्चा का केंद्र बन गया है.

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मंच से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के तीखे बोल

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के संदर्भ में आयोजित पंजाबी समाज के इस कार्यक्रम में बोलते हुए राव इंद्रजीत सिंह ने आयोजकों की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया.

  • प्रोटोकॉल पर उठाए सवाल: उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की व्यवस्था में "उल्टी गंगा बह रही है". सीनियर नेताओं को पहले बुलवा दिया गया और जूनियर नेताओं को बाद में बोलने का मौका दिया जा रहा है.
  • क्षेत्रीय सांसद की अनदेखी: स्थानीय सांसद होने के नाते अपनी अनदेखी पर दर्द छलकाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा था मानो उन्हें अपने ही क्षेत्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष व अतिथियों का स्वागत करने का अवसर भी नहीं दिया जाएगा.
  • आमंत्रण सूची पर आपत्ति: उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह कार्यक्रम पानीपत में होता तो क्या संजय भाटिया को नहीं बुलाया जाता, या करनाल में होता तो क्या पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को नजरअंदाज किया जाता?

समाज को दिया एकजुटता और 36 बिरादरी का संदेश

अपनी नाराजगी के साथ-साथ राव इंद्रजीत सिंह ने पंजाबी समाज और स्थानीय लोगों के आपसी संबंधों पर भी विस्तार से बात की:

  • सहानुभूति और वोट का धन्यवाद: उन्होंने पंजाबी समाज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र के लोगों ने उन्हें छह बार चुनाव जिताकर संसद भेजा है.
  • संस्कृति में योगदान: उन्होंने कहा कि विभाजन के समय पीड़ित परिवार हरियाणा आए और यहां के मूल निवासियों ने उनका दिल से स्वागत किया. उन्होंने माना कि हरियाणा में संस्कृति और विकास को बढ़ाने में पंजाबी समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा है.
  • ताली दोनों हाथों से बजती है: स्थानीय राजनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल एक वर्ग के दम पर राजनीति नहीं चलती. गुरुग्राम में 36 बिरादरी के सहयोग से ही पंजाबी एमएलए और जनप्रतिनिधि बनते आए हैं [07:09]. इसलिए राजनीति में सभी वर्गों को साथ लेकर चलना बेहद जरूरी है.

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