Rohtak Naresh Taxi Driver Death: हरियाणा के रोहतक से पुलिस कस्टडी में मौत का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. टिटोली गांव के रहने वाले 51 वर्षीय टैक्सी चालक नरेश की सीआईए-2 की हिरासत में मौत हो गई. नरेश को पुलिस ने फिरौती के एक मामले में पूछताछ के लिए उठाया था, लेकिन चंद दिनों बाद ही उसकी लाश घर पहुंची. इस घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं.
ADVERTISEMENT
रंगदारी मामले में शक के आधार पर गिरफ्तारी
यह पूरा मामला फिरौती के एक हाई-प्रोफाइल केस से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है. जानकारी के अनुसार, टिटोली गांव के ही एक ठेकेदार और ईंट भट्ठा संचालक अनूप कुंडू से विदेश में बैठे गैंगस्टर रणदीप मलिक के नाम पर भारी रकम की मांग की गई थी. अनूप कुंडू ने शक के आधार पर नरेश के खिलाफ शिकायत दी थी. इसी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सीआईए-2 की टीम ने 22 अप्रैल की सुबह करीब 10 बजे नरेश को उसके घर से पूछताछ के लिए उठाया था.
पुलिस का दावा बनाम परिजनों के आरोप
पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान नरेश ने अचानक छाती में दर्द की शिकायत की. इसके बाद उसे आनन-फानन में एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस इसे हार्ट अटैक का मामला बता रही है, लेकिन मृतक के परिजनों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. परिजनों का कहना है कि नरेश को हार्ट की कोई बीमारी नहीं थी. उनका आरोप है कि पुलिस कस्टडी में उसे बुरी तरह टॉर्चर किया गया, जिससे उसकी मौत हुई है.
मेडिकल प्रोसीजर पर उठते गंभीर सवाल
परिजनों ने सवाल उठाया है कि जब रोहतक में पीजीआईएमएस जैसा बड़ा मेडिकल संस्थान मौजूद है, तो पुलिस उसे किसी निजी अस्पताल में क्यों लेकर गई? मृतक के शरीर पर चोटों के निशान होने का भी दावा किया जा रहा है. गांव के लोगों का कहना है कि जिस फिरौती मामले में नरेश को उठाया गया था, उसमें उसका कोई हाथ नहीं था और उसे सिर्फ शक के आधार पर प्रताड़ित किया गया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और राजनीतिक गर्माहट
फिलहाल नरेश के शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआईएमएस के शव गृह में रखवा दिया गया है. डॉक्टरों के बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम किए जाने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा. इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है. पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने भी सीआईए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सादे कपड़ों में पुलिस का इस तरह लोगों को उठाना और प्रताड़ित करना गलत है. टिटोली गांव का यह टैक्सी चालक अपने परिवार का इकलौता सहारा था, उसके एक भाई की मौत पहले ही कोरोना काल में हो चुकी थी. अब बूढ़े माता-पिता और परिवार के सामने न्याय की गुहार लगाने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा है.
ADVERTISEMENT


