जिस पायलट की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है उसी के नाम को लेकर इतना कन्फ्यूजन है. कोई स्मित मचार लिख रहा है तो कोई स्मित मच्छार. ये नाम जो पूरी दुनिया में चर्चित चेहरा बना है उसके नाम से ही कहानी शुरू करते हैं. फ्लाइंग फ्लाइट में 170 प्लस लोगों की जान बचाने वाले जांबाज कैप्टन स्मित मच्छर पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुके हैं. एविएशन की दुनिया में हमेशा के लिए केस स्टडी बन गए. ये ऐसी जांबाजी की कहानी है जिसे सुनाने वाले पीएम मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप, इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू हैं. इन्होंने कैप्टन की केवल तारीफ ही नहीं, बल्कि एहसान माना कि कैप्टन स्मित मच्छर ने दुनिया को कैसे दुनिया के एक और 9/11 जैसे आतंकी हमले से बचा लिया. आइए विस्तार से जानते हैं स्मित मच्छर की पूरी कहानी.
ADVERTISEMENT
कौन हैं स्मित मच्छर और क्या है उनके पायलट बनने की कहानी?
स्मित का मतलब होता है मुस्कान. सरनेम मच्छर गुजरात के कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लोहाना समुदाय में रखा जाता है. पायलट कैप्टन स्मित मच्छर का परिवार भी गुजराती है लेकिन स्मित की जिंदगी मुंबई के घाटकोपर-चेंबूर से शुरू हुई. परिवार कभी चॉल में रहा करता था. बाद में वही चॉल रीडेवलप होकर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बन गई.
पायलट बनकर आसमान में उड़ना, हवा से बातें स्मित का कभी सपना नहीं था. वो तो शांत बच्चे थे लेकिन तब कहां किसी को पता था कि इरादों में इतना बारूद छिपा होगा कि आतंक का बारुद फुस्स हो जाएगा. पिछले साल कैप्टन मच्छर ने 'बोना-फाइड बैंटर' नाम के पॉडकास्ट पर बताया था कि एविएशन कभी भी बचपन का सपना नहीं था. स्कूल के बाद टेक्सटाइल इंजीनियरिंग करने लगे. तब तक फैमिली बिजनेस ज्वाइन करने का ही इरादा था. उसी दौर में किसी एविएशन सेमिनार में चले गए. लौटे तो जिंदगी और करियर गोल सब बदल चुका था.
पायलट बनाने में पिता का है अहम रोल!
मां को जरूर पसंद नहीं था कि बेटा पायलट बने और आसमान में उड़े लेकिन पिता कतई पीछे नहीं पड़े कि फैमिली बिजनेस ही संभालो. बल्कि उन्होंने लोन लेकर न्यूजीलैंड के डुनेडिन में फ्लाइंग ट्रेनिंग के लिए भेजा. न्यूजीलैंड से लौटे तो पायलट बनकर. स्पाइस जेट ज्वाइन की और करीब 10 साल तक उसकी फ्लाइट उड़ाते. स्पाइस जेट में ट्रेनिंग कैप्टन और नए पायलटों के मेंटर भी रहे. फिर भी तब तक स्मित दुनिया के हजारों-लाखों पायलट में एक मामूली पायलट थे.
4 साल पहले दुबई एयरलाइन किया था ज्वाइन!
करीब 9 हजार 750 घंटे फ्लाइंग एक्सपीरियंस के दौरान कैप्टन स्मित ने जितनी फ्लाइट उड़ाई उसमें से किसी एक की भी इमरजेंसी लैंडिंग की नौबत नहीं आई. करीब 4 साल पहले कैप्टन स्मित ने फ्लाई दुबई एयरलाइन ज्वाइन की. फैमिली लेकर दुबई में सेटल हो गए. वही टर्निंग प्वाइंट था जिसकी आज चर्चा हो रही है.
30 सितंबर को क्या हुआ था?
30 सितंबर की रात फ्लाई दुबई की फ्लाइट फिदायीन हमले के निशाने पर आ गई. किसी को भनक नहीं थी कि कॉकपिट में कैप्टन स्मित की बगल वाली सीट पर बैठा को पायलट फिदायीन हमलावर बन गया. उसे तो 9/11 जैसा आतंकी एयर स्ट्राइक करना था. बंद कॉकपिट यानी पायलटों के केबिन में उसने सोचा कि फ्लाइट उड़ाने में पहला रोड़ा कैप्टन स्मित बनेंगे तो चाकू से ताबड़तोड़ हमला उन्हीं पर कर दिया. को-पायलट का पहला हमला सफल रहा लेकिन मंशा और साजिश नाकाम हो गई लेकिन स्मित ने वो कर दिखाया जिसकी कल्पना भी नहीं था.
फिर शुरू हुआ 29 सेकंड का डेथ डाइव. फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में जब ओमान मूल के को-पायलट सुलेमान अल-बलोशी ने स्मित पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए, तो प्लेन हवा में अनियंत्रित होकर महज 29 से 30 सेकंड के भीतर 14,000 फीट से ज्यादा नीचे आ गिरा. प्लेन के भीतर बैठे पैसेंजर्स अपनी-अपनी सीटों से उछलने लगे. चारों तरफ चीख-पुकार मची. मौत से डरे लोग जिंदगी के लिए दुआएं मांग रहे थे.
स्मित ने दिखाई जांबाजी!
कैप्टन स्मित खून से सनकर गिरे पड़े थे. आगे कोई चारा नहीं था फिदायीन को रोकने का. उन्होंने ब्रेन गेम से पूरी साजिश तार-तार कर दिया. स्मित बुरी तरह लहूलुहान होकर गिर चुके थे लेकिन उन्होंने किसी तरह मैनेज करके बंद कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया. पैसेंजर्स को भनक लग गई कि कॉकपिट में ही कुछ गड़बड़ी हो रही है. कुछ जांबाज यात्रा और केबिन क्रू कॉकपिट में घुस गए.
कॉकपिट में फर्श से लेकर दीवारों पर खून ही खून था. सबकी जान लेने पर तुले पायलट को नीचे गिराकर काबू में किया. गिरते विमान को किसी तरह से हैंडल कर सेफ लैंडिंग कराई. अगर स्मित ने कॉकपिट का बटन नहीं खोला तो शायद को-पायलट के खौफनाक इरादे कामयाब हो जाते. हालांकि जांच में अभी कन्फर्म नहीं कि इरादा आतंकी हमले का था या सिर्फ सनक में इतना कुछ कर दिया.
यात्रियों ने बताया कैप्टन स्मित के जांबाजी की कहानी
पूरी दुनिया को कैप्टन स्मित मच्छर के इस साहस और सूझबूझ का पता चला इजरायली यात्री यानिव हयून, डेंटिस्ट डॉ. शोटा मुसाएव जैसे पैसेंजर्स से जो सबसे पहले अंदर गए, फिदायीन पायलट को काबू में किया. एकइ सरायली यात्री यानीव हायून जो कि प्लंबर हैं उसकी भी चर्चा हो रही है जिसने कभी विमान नहीं उड़ाया था, यानीव हायून ने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट को संभाला. यानीव हायून ने टीवी शो एयर डिजास्टर्स देखकर विमान उड़ाने के बारे में कुछ-कुछ सीखा था. उसी नॉलेज के दम पर प्लंबर ने तुरंत प्लेन के स्टीयरिंग को पीछे की तरफ खींचा और गोता खा रहे विमान को हवा में स्टेबलाइज किया. वही प्लंबर यानीव हायून खून से लथपथ टी-शर्ट पहने सीधे एयरपोर्ट पर पीएम नेतन्याहू से मिलने पहुंचे.
किस्मत से फ्लाइट में दो और फ्लाइट ऑफ ड्यूटी पायलट ट्रैवल कर रहे थे, उन्होंने फ्लाइट की सेफ लैंडिंग सऊदी अरब में कराई. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू खुद तेल अवीव एयरपोर्ट पहुंचे और उन्होंने उस जांबाज इजरायली यात्री प्लंबर समेत उन लोगों से मुलाकात की, जिन्होंने हमलावर को बांधा था.
यानिव हायून ने बताई आंखों-देखी
यानिव हायून की आंखों-दखी के मुताबिक जब वो अंदर पहुंचे, तो पूरा केबिन खून से लथपथ था. कैप्टन स्मित लहूलुहान होकर फर्श पर गिर चुके थे, लेकिन उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक हमलावर सह-पायलट को सिस्टम सबोटेज यानी विमान क्रैश करने से रोके रखा. कॉकपिट का दरवाजा तो खुला लेकिन पायलट मच्छर दरवाजे के इतने करीब थे कि उसे खोलना मुश्किल था. तब ये आभाष हुआ कि कैप्टन ने अपनी सूझबूझ से बेहोश होने से पहले दरवाजा खोल दिया.
दरअसल, पायलटों के पास कॉकपिट में एक स्विच होता है, जो अंदर से कॉकपिट का दरवाजा लॉक करने के लिए होता है. जख्मी होने के बाद कैप्टन स्मित मच्छर ने मदद के लिए आवाज लगाई होगी जो शायद बाहर पहुंची न हो. तब उन्होंने बेहोश होने से पहले उन्होंने वही स्विच दबाकर खतरे का सिग्नल भी दिया और हमले को नाकाम भी कर दिया. अगर कॉकपिट का दरवाजा लॉक रहता तो न किसी को कुछ पता चलता, न कोई कुछ कर पाता.
डेंटिस्ट ने बताई ये बात!
डेंटिस्ट डॉ. शोटा मुसाएव ने आंखों देखी बताई कि कैप्टन स्मित का ब्लड प्रेशर बुरी तरह गिर चुका था, हेवी ब्लीडिंग के कारण बेहोश हो रहे थे. बेहोश होने से पहले किसी तरह दरवाजे का लॉक खोल दिया था. तब भी मच्छर बोलकर ये बताने की स्थिति में थे कि दूसरे पायलट ने उन पर हमला किया था. अगर दरवाजा खोलने में आधा मिनट की भी देरी होती, तो हम प्लेन और कैप्टन दोनों को खो देते. फ्लाइट रेडार 24 के डेटा ने भी पुष्टि कर दी कि विमान महज 29 सेकंड में 14,000 फीट से ज्यादा नीचे गिरा था क्योंकि कॉकपिट में भयानक जानलेवा संघर्ष चल रहा था. असाफ रेगाविम तो सबसे बड़ा सबूत लाए जिन्होंने केबिन के अंदर से वीडियो रिकॉर्ड किया था और पायलट को काबू करने में मदद की थी.
स्मित ने पॉडकास्ट में ऐसा क्या कहा कि हो रहा वायरल?
स्मित का इस घटना से ठीक कुछ महीने पुराना पॉडकास्ट (Bona-Fide Banter) सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो गया है. उसमें स्मित ने कहा कि जब मैं वर्दी पहनता हूं, तो मैं सिर्फ 100% काम के बारे में सोचता हूं, नो-नॉनसेंस! कॉकपिट में कदम रखते ही दुनिया भूल जाते हैं. कैप्टन स्मित की सलाह कि युवा पायलटों को सेल्फी या सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि सिर्फ उड़ने पर ध्यान देना चाहिए. हादसा या देरी मेरी दिक्कत नहीं है, जब तक आप प्लेन से सुरक्षित बाहर चल कर आ रहे हैं, मेरे लिए वही सबसे जरूरी है.
ADVERTISEMENT


