पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस(TMC) के चुनाव हारने के बाद पार्टी को लगातार झटके पर झटके लग रहे हैं. इसी बीच पार्टी को एक बार फिर तगड़ा झटका लगने की खबर सामने आई है. एक ओर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में जहां 'इंडिया ब्लॉक' की बैठक करने के लिए पहुंचे है, तो दूसरी तरफ TMC के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने अपने पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही अलग-अलग क्राइसिस से जूझ रही है और ऐसे में इस खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. आइए विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी.
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पार्टी को भेजा अपना इस्तीफा
सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे से पार्टी को बंगाल और दिल्ली दोनों ही जगहों पर जोरदार झटका लगा है. मिली जानकारी के मुताबिक, सुखेंदु भी दिल्ली में मौजूद है और उन्होंने देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा पत्र सौंप दिया है. इसके बाद उन्होंने TMC से इस्तीफे का पत्र पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को ईमेल कर दिया है.
बंगाल चुनाव में जनता के फैसले को बताया ऐतिहासिक
सुखेंदु शेखर राय ने इस्तीफे में बंगाल चुनाव में जनता के लिए ऐतिहासिक फैसला का जिक्र भी किया है. उन्होंने लिखा कि, 'हालिया चुनावों में बंगाल की जनता ने 15 वर्षों के टीएमसी शासन, व्याप्त भ्रष्टाचार, महिला उत्पीड़न और शिक्षा-स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में फैली अराजकता के विरुद्ध अपना स्पष्ट जनादेश देते हुए बीजेपी को ऐतिहासिक जीत दिलाई है. नई निर्वाचित सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र के अनुसार राज्य के पुनर्निर्माण और सर्वांगीण विकास के कार्यों को गति देना शुरू कर दिया है, जिसे देखते हुए मैं जनता के इस अभूतपूर्व फैसले का सम्मान करता हूं और इसी के साथ तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता एवं राज्यसभा की सदस्यता से अपना त्यागपत्र देता हूं.'
कौन हैं सुखेंदु शेखर राय?
सुखेंदु शेखर राय बंगाल की राजनीति में काफी पुराना चेहरा है और पार्टी में भी उनकी अच्छी पकड़ थी. उनके इस्तीफे के बाद चर्चाएं शुरू हो गई है कि यह पार्टी के लिए बड़ा नुकसान है. साल 2011 में वे पहली बार राज्यसभा सांसद बने थे और TMC ने उनके अनुभव और कार्यशैली को देखते हुए लगातार तीन बार राज्यसभा भेजा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुखेंदु शेखर राय ममता बनर्जी के संकटमोटन रहे है. जब भी पार्टी को जरूरत पड़ी तो वे वहां खड़े है. SIR के मुद्दे पर भी जब ममता सु्प्रीम कोर्ट पहुंची थी, तब भी वे वहां उनके साथ खड़े थे. इसके अलावा 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की नंदीग्राम सीट पर पार्टी को मजबूत करने की कमान भी सुखेंदु शेखर राय ने ही संभाली थी.
कैसे बढ़ी दूरियां?
अब सवाल उठता है कि आखिर ममता बनर्जी के संकटमोचक के साथ ऐसा क्या हुआ की दूरियां इतनी बढ़ी कि उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया? तो इसके पीछे की कहानी RG KAR मेडिकल कॉलेज की घटना से शुरू होती है. उस वक्त जब पूरा बंगाल इंसाफ मांग रहा था, तब सुखेंदु शेखर राय ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व और राज्य प्रशासन के रवैये पर खुलकर आलोचना की थी और सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी किया था. उन्होंने जांच और प्रशासनिक कार्यवाही के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए थे. बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद से ही पार्टी ने उन्हें हाशिए पर रख दिया था और लगातार उनकी अनदेखी भी की जा रही थी. पिछले कुछ दिनों से इन्हीं वजहों से वो काफी परेशान थे और आज उन्होंने इस्तीफा दे दिया है.
बैकफुट पर आई TMC?
सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे के टाइमिंग को लेकर कहा जा रहा कि अब TMC पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है. पार्टी एक ओर अभी तक विधायकों के बागी होने के मामले से उभरी हीं नहीं थी कि अब राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने तगड़ा झटका दिया है. हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
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