पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद भी सियासी पारा काफी गरमाया हुआ है. जब से TMC के हाथ से राज्य की सत्ता गई है तब से ही पार्टी की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आनी लगी है. मौजूदा हालात में पश्चिम बंगाल की राजनीति में दो नामों की खूब चर्चा है, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा का नाम शामिल है. विधानसभा चुनाव में भले ही दोनों नेता TMC के टिकट पर जीत गए लेकिन पार्टी से निकाले जाने के बाद दोनों नेताओं लगातार सुर्खियों में बने हुए है.
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इसी बीच TMC के 58 बागी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर रथीन बोस को समर्थन पत्र सौंपते हुए ऋतब्रत को अपना विधायक दल का नेता चुन लिया है. बताया जा रहा है कि दलबदल कानून से बचने के लिए 80 विधायकों में कम से कम 54 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है, जबकि बागी खेमे में 58 विधायकों के समर्थन का दावा किया है. मिली जानकारी के मुताबिक बागी गुट ने साफ कहा है कि वे ममता बनर्जी को अपना नेता मानते है लेकिन अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व से सहमत नहीं है. ऐसे में सवाल उठने लगा है कि आखिर ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा कौन है, जिन्होंने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
पश्चिम बंगाल में महाराष्ट्र जैसा खेल!
पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति महाराष्ट्र में हुए खेल को याद दिला रही है, जहां शिवसेना में एकनाथ शिंदे और NCP में अजित पवार के विद्रोह के बाद पार्टी में ही एक बड़ा विभाजन देखने को मिला था. हालांकि ममता बनर्जी ने ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद राज्य में मौजूद TMC की सभी संगठनात्मक कमेटियों और संगठनों को भंग करने का फैसला लिया है. पार्टी ने कहा है कि जल्द ही नए सिरे से संगठन को खड़ा किया जाएगा और नई टीम बनाई जाएगी.
कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी?
TMC के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी बंगाल की राजनीति में एक जाना-पहचाना चेहरा है और उनका राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. ऋतब्रत पश्चिम बंगाल की राजनीति के उन चेहरों में से हैं जिन्होंने बहुत कम उम्र में ही बड़ी सफलताएं देखीं है. उन्होंने कोलकाता के आशुतोष कॉलेज और कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और साल 2000 के दशक की शुरुआत में SFI से राजनीति की शुरुआत की थी. ऋतब्रत बनर्जी लगभग 8 साल तक SFI के राष्ट्रीय महासचिव रहे और वामपंथ के युवा नेता माने जाते थे.
साल 2014 में मात्र 34 साल की उम्र में माकपा ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया था. हालांकि 2017 में उन्हें पार्टी के मोटिव के विपरीत आलीशन लाइफस्टाइल (एप्पल वॉच और महंगे पेन का विवाद) और शीर्ष नेतृत्व जैसे प्रकाश करात, बृंदा करात और मोहम्मद सलीम के खिलाफ बयानबाजी करने की वजह से पार्टी से निकाल दिया गया.
लेफ्ट के बाद थामा TMC का दामन
माकपा से निकाले जाने के बाद अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने पाला बदला और ममता बनर्जी की पार्टी TMC का दामन थाम लिया. TMC ने उन्हें तवज्जो भी दी और उन्हें अपनी ट्रेड यूनियन विंग का प्रदेश अध्यक्ष बनाया. हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऋतब्रत बनर्जी को TMC ने उलुबेरिया पूर्व सीट से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने यह सीट जीता भी. लेकिन विधायक बनने के तुरंत बाद वे दिल्ली पहुंचे और सीएम सुभेंदु से मुलाकात की, जिसके बाद TMC ने उन्हें निष्कासित कर दिया.
अब जानिए दूसरे नेता संदीपन साहा कौन?
TMC में हुए दो फाड़ के पीछे जो दूसरा चेहरा है वो संदीपन साहा का है. ऋतब्रत बनर्जी के मुकाबले संदीपन साहा का सियासी सफर शांत रहा लेकिन राजनीतिक तौर पर काफी मजबूत बताया जाता है. संदीपन को राजनीति विरासत में मिली क्योंकि के कोलकाता के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक स्वर्ण कमल साहा के बेटे है.
राजनीति में एंट्री से पहले संदीपन एक बिजनेसमैन रहे हैं और उन्होंने IIM कोलकाता से PGDM की डिग्री हासिल की है. कुछ दिन नौकरी की और फिर अपना कारोबार शुरू कर दिया. संदीपन ने नगर निगम के काउंसिलर(पार्षद) के रूप में राजनीति में एंट्री ली थी और धीरे-धीरे संगठन के अंदर मजबूत पैठ बना ली. 2026 विधानसभा चुनाव में साहा ने एंटाली विधासभा सीट से चुनाव जीता लेकिन उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी के साथ हाथ मिला लिया. उन्होंने भी अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोला जिसके बाद TMC ने उन्हें निष्कासित कर दिया.
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