पिछले कुछ दिनों से देश भर में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट की चर्चा हो रही है, लेकिन लगभग इतने ही दिनों से मध्य प्रदेश के छतरपुर में भी एक प्रदर्शन चल रहा है जिसके बारे में बहुत कम लोगों पता होगा. जिस दिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस ने अनशन से हटाया था, ठीक उससे एक दिन बाद यानी 19 जुलाई को दिल्ली से करीब 700 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के छतरपुर में अमित भटनागर को भी भूख हड़ताल के कारण तबीयत बिगड़ने पर हिरासत में लेकर बिजावर अस्पताल भेजा गया. जहां उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें छतरपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया.
ADVERTISEMENT
लगातार 14 दिनों की भूख हड़ताल और गले तक नदी के पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह और चिता सत्याग्रह करने वाले अमित भटनागर आखिर कौन हैं? और क्यों उनके इस अनोखे आंदोलन ने 44,000 करोड़ से ज्यादा की लागत वाली देश की पहली नदी-जोड़ो परियोजना (केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट) को लेकर सरकार की नींद उड़ा दी? आइए समझते हैं.
कौन हैं अमित भटनागर?
अमित भटनागर कोई पेशेवर नेता नहीं हैं बल्कि एक पढ़े-लिखे समाजसेवी और गांधीवादी कार्यकर्ता हैं. चित्रकूट के प्रतिष्ठित ग्रामोदय विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद अमित भटनागर बी.एड. कॉलेज में प्रोफेसर थे. साल 2011 में जब देश भर में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन छिड़ा तो अमित अपनी आरामदेह नौकरी छोड़ जनसेवा के रास्ते पर निकल पड़े.
बाद में वे आम आदमी पार्टी से जुड़े. उन्होंने बिना किसी बड़े कॉर्पोरेट या चुनावी फंड के स्थानीय लोगों और आदिवासियों से 5-10 रुपये का चंदा जुटाकर चुनाव लड़ा. पिछले 4-5 सालों से अमित बुंदेलखंड के छतरपुर और पन्ना जिले के उन हजारों गरीब आदिवासियों और किसानों के सबसे बड़े मददगार बने हुए हैं, जिनकी जमीनें और घर केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट की भेंट चढ़ रहे हैं.
14 दिनों तक किया अनशन
अमित भटनागर ने केन-बेतवा प्रोजेक्ट से प्रभावित आदिवासियों और किसानों के हक में केन नदी की सहायक नदी के बीचों-बीच ही मोर्चा खोल दिया. इस आंदोलन की शुरुआत 6 जुलाई को की गई थी. इस सत्याग्रह के दौरान आदिवासी महिलाएं नदी के ठंडे और लगातार बढ़ते पानी में घंटों गले तक डूबकर खड़ी रहीं. विरोध करने का ये अनोखा तरीका यहीं नहीं रुका बल्कि नदी के बीचों-बीच लकड़ी के ढांचे से चिता बनाकर लोग उस पर लेट गए और जलती हुई चिताओं के रूप में अपनी मांगों को लेकर अड़ गए.
गांव वालों ने सांकेतिक रूप से गले में फंदे तक डालकर 'फांसी सत्याग्रह' किया जिससे यह साफ झलक रहा है कि अपनी जमीन और जंगल छिन जाने के बाद वे खुद को जीते-जी मरा हुआ ही महसूस कर रहे हैं. अमित भटनागर खुद नदी के बीच बैठकर लगातार 14 दिनों तक बिना अन्न-जल के कड़क भूख हड़ताल पर डटे रहे. दिन-ब-दिन उनका शरीर ढलता गया और तबीयत बेहद नाजुक होती चली गई.
ऊपर से तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर भी खतरनाक ढंग से बढ़ने लगा, जिससे वहां मौजूद सैकड़ों आदिवासियों और खुद अमित भटनागर की जान पर बड़ा खतरा मंडराने लगा था. आखिरकार, स्थिति को बिगड़ता देख तड़के भारी पुलिस बल आंदोलन स्थल पर पहुंचा पूरे इलाके को खाली कराया और अमित भटनागर को आनन-फानन में छतरपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया.
क्या है ये केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट?
दरअसल केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना है. इस प्रोजेक्ट का विचार सबसे पहले साल 1990 के दशक में आया था. हालांकि उस वक्त इस प्रोजेक्ट के अमल लाने से पर्यावरण से जुड़े मुद्दों और पन्ना टाइगर रिजर्व पर पड़ने वाले संभावित असर के कारण ये परियोजना लंबे समय तक कानूनी अड़चनों में फंसी रही. तमाम पर्यावरण चिंताओं के बीच दिसंबर 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे हरी झंडी दी. लगभग 44,605 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस महत्त्वाकांक्षी योजना में केंद्र सरकार 39,317 करोड़ रुपये का वित्तीय सहयोग दे रही है.
इस परियोजना का मूल आधार केन नदी के अतिरिक्त पानी को दौधन बांध और एक लंबी नहर के जरिए बेतवा नदी में मोड़ना है. सरकार का मानना है कि इस कदम से सूखाग्रस्त बुंदेलखंड अंचल के मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश, दोनों राज्यों के कई जिलों की तस्वीर बदलेगी. योजना के पूरा होने पर करीब 10.62 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का पानी मिलेगा, जबकि 62 लाख से ज्यादा लोगों को पीने का स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जा सकेगा. सिंचाई और पेयजल के अलावा, इस प्रोजेक्ट से 103 मेगावाट जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा पैदा करने का लक्ष्य भी रखा गया है.
आखिर केन-बेतवा प्रोजेक्ट से क्या दिक्कत है?
प्रशासनिक आंकड़ों की मानें को दौधन बांध बनने से छत्तरपुर जिले के 14 और पन्ना जिले के 8 गांव प्रभावित होंगे. इन गांवों में बड़ी संख्या में आदिवासी, बंजारा और पिछड़े समुदाय के लोग हैं. वीं एक तरफ सरकार का कहना है कि 44,605 करोड़ की लागत से बनने वाला केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट सूखाग्रस्त बुंदेलखंड के लाखों लोगों को पीने का पानी और सिंचाई की सुविधा देगा. जबकि जिन आदिवासियों की जमीन पर यह बांध और नहरें बन रही हैं, उनका दर्द बिल्कुल अलग है.
अमित भटनागर और गांववालों का आरोप है कि इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी जमीन लेने के लिए सरकार की तरफ से भूमि अधिग्रहण कानून (LARR 2013) का पालन सही से नहीं किया गया है. सरकारी सर्वे में किसानों की उपजाऊ और सिंचित जमीनों को अनउपजाऊ लिख दिया गया, जिससे उनका मुआवजा 60 प्रतिशत तक घट गया.
गांववालों का आरोप ये भी है कि मुआवजे का बड़ा हिस्सा फर्जी कागजात बनाकर बाहरी और रसूखदार लोगों के खातों में डाल दिया गया. जबकि वहां पीढ़ियों से रह रहे गरीब आदिवासियों को कुछ नहीं मिला. आदिवासियों की पूरी जिंदगी महुआ, तेंदूपत्ता और जंगल की लकड़ियों पर टिकी है. उनका कहना है कि पैसों का मुआवजा कुछ महीनों में खत्म हो जाएगा लेकिन जंगल और नदी छीन जाने के बाद वे हमेशा के लिए बेरोजगार हो जाएंगे.
क्या है ये LARR 2013 कानून
भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 (LARR Act, 2013) के तहत केवल जमीन का पैसा देना काफी नहीं होता. इसमें सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA), पर्यावरण आकलन और हर प्रभावित परिवार के लिए उचित पुनर्वास शामिल होना अनिवार्य है.
पन्ना टाइगर रिजर्व पर भी खतरा
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट केवल इंसानों के विस्थापन का मुद्दा नहीं है. ये एक बहुत बड़े इकोसिस्टम के विनाश की कहानी भी है. दौधन बांध के बनने से पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा डूब क्षेत्र में चला जाएगा, जिसके लिए लाखों हरे-भरे पेड़ों को काटा जाएगा. पन्ना में बाघों का पुनर्वास भारत के सबसे सफल वाइल्डलाइफ प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है. इस बांध के कारण बाघों का मुख्य कॉरिडोर और गिद्धों के दुर्लभ प्राकृतिक घोंसले वाले चट्टानी इलाके पानी में समा जाएंगे.
सरकार और प्रशासन का क्या रुख है?
छतरपुर और पन्ना जिला प्रशासन का कहना है कि वे ग्रामीणों की समस्याएं और मुआवजे की गड़बड़ियों की जांच करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. प्रशासन का यह भी तर्क था कि बारिश के मौसम में नदी का पानी तेजी से बढ़ रहा था जिससे नदी के बीचों-बीच धरना दे रहे लोगों और भूख हड़ताल पर बैठे अमित भटनागर की जान को खतरा हो सकता था, इसीलिए उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया और प्रदर्शन स्थल खाली कराया गया.
ये भी पढ़ें: Datia Bypoll: कांग्रेस के मंच से बीजेपी प्रत्याशी ने मांग लिए वोट! जीतू पटवारी ने ली चुटकी तो गूंज उठे ठहाके,
ADVERTISEMENT


